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कानपुर में जनप्रतिनिधियों के दबाव में बस्तियों में नहीं चला बुलडोजर, सिंचाई विभाग की जमीन पर काफी समय से है कब्जा

कानपुर में कब्जा ढहाते बुलडोजर की प्रतीकात्मक तस्वीर।

दादानगर थम्सअप चौराहा पुल से लेकर सीटीआई शनिदेव मंदिर तक नहर पटरी में सैकड़ों लोगों ने पांच किमी में लोगों ने कच्चे और पक्के मकान बना रखे हैं। पिछले पांच वर्ष से सिंचाई विभाग बस्तियों को हटाने की कवायद कर रहा है लेकिन जनप्रतिनिधि इसके आड़े आ जाते हैं।

Shaswat GuptaFri, 07 May 2021 03:54 PM (IST)

कानपुर, जेएनएन। सिंचाई विभाग की जमीन पर कब्जों को हटाने के लिए विभाग ने पूरी तैयार कर ली थी, लेकिन अधिकारियों की इस तैयारियों पर जनप्रतिनिधियों ने पानी फेर दिया। उनके दबाव में विभाग कार्रवाई से पीछे हट रहा है।

दादानगर थम्सअप चौराहा पुल से लेकर सीटीआई शनिदेव मंदिर तक नहर पटरी में सैकड़ों लोगों ने पांच किमी में लोगों ने कच्चे और पक्के मकान बना रखे हैं। पिछले पांच वर्ष से सिंचाई विभाग बस्तियों को हटाने की कवायद कर रहा है, लेकिन जनप्रतिनिधि इसके आड़े आ जाते हैं। इस वजह से बस्तियों को हटाया नहीं जा सका। दो माह पहले पीएसी के साथ सिंचाई विभाग के अधिकारी बस्ती में बुलडोजर चलाने पहुंचे थे तो सत्ता पक्ष के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद सांसद सत्यदेव पचौरी ने कोविड का हवाला देते हुए डीएम को पत्र लिखा था। इस पर विभाग ने बुलडोजर नहीं चलाया। इसके बाद एक बार फिर विभाग के अधिकारी बस्तियों में एनाउंसमेंट किया, ताकि लोग मकान खाली कर चले जाएं, लेकिन लोग जस का तस नहीं हुए। अब जनप्रतिनिधियों द्वारा विभाग को एक के बाद एक कई पत्र लिखने के साथ ही मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर सिंचाई विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई को रोकने की मांग की है।

इनका ये है कहना

बस्ती को गिराने के लिए कई बार लोगों को नोटिस दी गई है। अब जनप्रतिनिधियों द्वारा विभाग को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की मांग की गई है। इस वजह से बस्ती में बुलडोजर नहीं चलेगा। - एके राव, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग

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