भू-अभिलेखों में हुआ खेल, जिल्द बंदोबस्त में फर्जी तरीके से सरकारी जमीन का भूमिधरी खाता बंधवाया

राजस्व अभिलेखों में हुए फर्जीवाड़े पर सवाल खड़ा होता ही कि सुरक्षित श्रेणी की जमीन फसली वर्ष 1348 में बीहड़ दर्ज थी वह 1359 फसली वर्ष में मुंशीलाल के नाम कैसे दर्ज हो गई। यही नहीं उसके बाद वह दूसरों को बेच दी गई।

Akash DwivediMon, 19 Jul 2021 11:05 AM (IST)
संशोधन करके जमीन फिर से सुरक्षित श्रेणी में दर्ज कर दी गई

कानपुर, जेएनएन। बैरी अकबरपुर बांगर की बेशकीमती सरकारी जमीन लूटने के लिए भू-माफिया ने सालों पहले से ताना-बाना बुना था। भू-अभिलेखों में वर्ष 1948-49 में आराजी संख्या 1098 बीहड़ में दर्ज थी। अभिलेख गवाही देते हैं कि उसके बाद से खेल शुरू हो गया। जिल्द बंदोबस्त में फर्जी तरीके से सरकारी जमीन का भूमिधरी खाता बंधवाकर मुंशीलाल का नाम कूटरचना करके 1359 फसली वर्ष के राजस्व अभिलेखों में बिना किसी आदेश के अंकित करा दिया गया। बाद में सरकारी भूमि को मुंशीलाल से क्रय दिखाकर अलग-अलग नामों पर स्थानांतरित कर दी गई। एसडीएम कोर्ट में वाद चलने पर फर्जीवाड़ा सामने आया तो अभिलेखों में संशोधन करके जमीन फिर से सुरक्षित श्रेणी में दर्ज कर दी गई।

राजस्व अभिलेखों में हुए फर्जीवाड़े पर सवाल खड़ा होता ही कि सुरक्षित श्रेणी की जमीन फसली वर्ष 1348 में बीहड़ दर्ज थी वह 1359 फसली वर्ष में मुंशीलाल के नाम कैसे दर्ज हो गई। यही नहीं उसके बाद वह दूसरों को बेच दी गई। एसडीएम कोर्ट में एक वाद दायर होने पर खेल सामने आ गया। केडीए की पूर्व उपाध्यक्ष किंजल सिंह की तैनाती के वक्त 12 कर्मचारी और अधिकारियों का जुड़ाव सामने आया था, बाद में केडीए के अधिकारियों के द्वारा ही मामले को दबा दिया गया था। दैनिक जागरण द्वारा एक बार फिर मामले से पर्दा उठाने पर केडीए और राजस्व विभाग में खलबली है।

अमीन हुए थे निलंबित, हटाए गए थे संविदा तहसीलदार : पूर्व उपाध्यक्ष किंजल सिंह ने इस मामले की 14 सितंबर 2018 को जांच कराई थी। इसके लिए तहसीलदार आत्मा स्वरूप और व्यास नारायण उमराव, वित नियंत्रक विनोद कुमार लाल, विशेष कार्याधिकारी अंजूलता और मुख्य अभियंता प्रभारी डीसी श्रीवास्तव की टीम बनाई थी। जांच में मामला सामने आया था कि सड़क बनी नहीं है। अभियंता, अमीन और तहसीलदार ने गलत रिपोर्ट लगाई है। उपाध्यक्ष ने कार्रवाई करके शासन को रिपोर्ट भेज दी थी। इस दौरान अमीन संतोष कुमार, रामलाल, अंकुर पाल, रमेश चंद्र प्रजापति और सोहनलाल को निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा संविदा तहसीलदार मन्ना सिंह को हटा दिया गया था।

तहसीलदार बीएन पाल, प्रदीप रमन और किशोर गुप्ता के खिलाफ आरोप पत्र सचिव राजस्व परिषद को भेज गया। इसके अलावा अधीक्षण अभियंता केके पांडेय, अधिशासी अभियंता आरके गुप्ता और सहायक अभियंता अजीत कुमार के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल कर प्रमुख सचिव आवास व शहरी नियोजन विभाग को विभागीय कार्रवाई के लिए भेजा था। अमीन भी बहाल हो गए। हालांकि बाद में मामला दब गया। अब अफसर मामले को दबा रहे है, मुकदमा तक नहीं दर्ज किया गया है। दो साल से हाईकोर्ट में मामला चल रहा है, लेकिन पैरवी ठीक से न होने के कारण देर लग रही है।

जमीन हथियाने का ऐसे हुए खेल

स्थान - बैरी अकबरपुर बांगर (इंदिरानगर से मकडीखेड़ा जाने वाला रास्ता) जगह - आराजी संख्या 1098 कुल रकबा 2.674 हेक्टेयर जमीन का स्वामित्व - फसली वर्ष 1348 वर्ष 1940-41 से फसली वर्ष 1356 वर्ष 1948-49 तक राजस्व अभिलेखों में बीहड़ के खाते में ग्राम समाज की जमीन अंकित थी।

खेल शुरू हुआ : फसली वर्ष 1359 में मुंशीलाल का नाम फर्जी ढंग से राजस्व अभिलेख में बिना किसी आदेश के अंकित कर दिया गया। इसके बाद अपने नाम भूमि स्थानांतरित करा ली। फर्जी एवार्ड 31 दिसंबर 1968 में दिखाया गया और कब्जा नौ सितंबर 1969 को प्राप्त किया गया। इसके बाद धोखे से सिद्ध गोपाल कपूर और अमरनाथ के नाम रजिस्ट्री कर दी गई।

जांच में खुला खेल : 29 सितंबर 2018 को जांच में खेल सामने आया कि बीहड़ की जमीन गलत तरीके से चढ़ा ली गई। उपजिलाधिकारी की कोर्ट ने आदेश दिए कि बीहड़ की जमीन है इसको राजस्व में अंकित किया जाए।

इनका ये है कहना

बैरी अकबरपुर बांगर की फाइल सोमवार को मंगवाकर देखेंगे कि अब तक क्या हो रहा है उसके बाद ही कुछ बता पाएंगे। - एसपी सिंह, सचिव केडीए 

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