बदलते मौसम में आहार-विहार से बनाए रखें मजबूत इम्युनिटी और बचे रहें हर तरह के संक्रमण से..

कानपुर के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की चिकित्सा अधिकारी डा. अर्पिता सी. राज ने बताया कि मौसम बदल रहा है और अब सर्दियां शुरू होंगी। बदलता मौसम कई तरह की बीमारियों वाला होता है। ऐसे में आहार-विहार का रखना होगा विशेष ध्यान।

Sanjay PokhriyalTue, 26 Oct 2021 01:43 PM (IST)
मजबूत बने इम्युनिटी और बचे रहें हर तरह के संक्रमण से..

कानपुर, जेएनएन। शारदीय नवरात्र के आगमन के साथ ही सर्दियों की दस्तक शुरू हो जाती है। हर मौसम का हमारी सेहत पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए आहार-विहार मौसम के अनुकूल रखा जाता है। इससे शरीर में इम्युनिटी का सुरक्षा कवच बनता है और यह हमें हर तरह के संक्रमण से बचाता है। नवरात्र से सर्दी का असर दिखने लगता है। सर्दियों के मौसम में कैसे अपने को फिट रखना है, दिनचर्या कैसी हो और किस तरह की जीवनशैली अपनानी है, इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

सर्दियों के दिन छोटे और रातें बड़ी होती हैं। इस मौसम में जठराग्नि तीव्र हो जाती है, जिससे पाचनतंत्र बहुत सक्रिय रहता है। इन दिनों भूख खूब लगती है। ऐसे में सजग रहें कि कहीं अतिरिक्त भोजन अच्छी सेहत के साथ वजन न बढ़ा दे। बदलते मौसम में कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इनमें बुखार, खांसी, जुकाम, गले में खराश और जोड़ों के दर्द की समस्या का होना आम बात है। इसलिए बुजुर्ग और बच्चों को बहुत ही एहतियात बरतने की जरूरत रहती है।

तासीर का रखें खयाल: खानपान मौसम के अनुकूल होना चाहिए। ठंड शुरू होते ही प्याज का सेवन कम कर दें, जबकि लहसुन और अदरक का सेवन बढ़ाना चाहिए। बहुत अधिक तेल में बनी हुई सब्जियों के बजाय सादा भोजन करना चाहिए, जैसे सब्जियों को काटकर उबाल लें या स्टीम में पकाकर खाएं। भोजन में दालचीनी, काली मिर्च, हल्दी, लौंग, तेज पत्ता जैसे मसालों का प्रयोग बढ़ा देना चाहिए। आयुर्वेद में ये सभी मसाले शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। छुहारा, सूखा नारियल, बादाम, मूंगफली और अखरोट का सेवन इस मौसम में फायदेमंद होता है। ये आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। शुद्ध शहद मिल जाए तो इस मौसम में आपके लिए इसे खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है।

बीमारियों के प्रति रहें सजग: अक्टूबर-नवंबर के समय जब मौसम में बदलाव हो रहा होता है, तब आपको दिन में बिल्कुल नहीं सोना चाहिए। इस मौसम में दिन में सोने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। मौसम बदलने पर दिन और रात के तापमान में काफी अंतर आ जाता है। इसलिए अगर दिन में कहीं निकल रहे हैं तो रात की ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े अपने साथ जरूर रखें। अगर आपको दो दिन से ज्यादा समय तक बुखार है तो घरेलू नुस्खों के बजाय चिकित्सक से परामर्श करके आवश्यक जांचें अवश्य कराएं।

विटामिन-सी से भरपूर हो पोषण: बदलते मौसम में खुद को सर्दी, जुकाम, बुखार, गले में खराश और फ्लू जैसी समस्याओं से दूर रखने के लिए विटामिन-सी की उचित मात्र वाले खाद्य पदार्थो का सेवन बेहतर माना जाता है। विटामिन-सी की भरपूर मात्र वाले फलों और सब्जियों का सेवन हमें इन बीमारियों के खिलाफ लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि विटामिन-सी बदलते मौसम में कफ और फ्लू से लड़ने में बेहद कारगर है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को बदलते मौसम में फ्लू, बुखार और सर्दी जैसी समस्याओं से बचने के लिए विटामिन-सी की प्रचुर मात्रा वाली चीजों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

श्वसन रोगों के रोगी रहें सतर्क: अस्थमा से ग्रस्त लोगों को बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। देखा गया है कि तापमान संतुलित नहीं होने के कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है। ऐसे में ठंडे पदार्थो का सेवन त्यागकर गर्म पानी पिएं और भाप लें। जिन लोगों को जुकाम के लक्षण दिख रहे हैं, उनके लिए भी भाप लेने से बेहतर कोई दूसरा घरेलू उपाय नहीं है। भाप लेने से बंद नाक खुलती है और श्वांस नली की सूजन भी कम होती है। इसलिए गर्म पानी में कुछ बूंदें एसेंशियल आयल, जैसे टी ट्री आयल या यूकेलिप्टस आयल या लेमनग्रास आयल आदि डालकर भाप लें। भाप लेने से सीने की जकड़न और बंद नाक में आराम मिलता है। भाप श्वसनतंत्र से संबंधित हर रोग में लाभकारी है।

कारगर है यह नुस्खा: अगर आपको खांसी और गले में खराश, दर्द या जकड़न की समस्या है तो आयुष मंत्रलय के अनुसार आपको दिन में एक बार गर्म पानी में पुदीने की पत्तियां या फिर अजवाइन की पत्तियां डालकर भाप लेना चाहिए। इसके अलावा लौंग को पीसकर इसका पाउडर बना लें और इसे शहद के साथ मिलाकर दिन में दो-तीन बार खाने से खांसी की समस्या और गले में दर्द की समस्या दूर हो सकती है।

मजबूत बनेगी इम्युनिटी: बदलते मौसम में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए रोजाना रात में सोने से पहले एक गिलास गोल्डन मिल्क यानी हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी जाती है। इसे बनाने के लिए एक गिलास गुनगुने दूध में एक चौथाई चम्मच हल्दी मिलाएं। कुछ लोग दूध में बहुत ज्यादा हल्दी डाल लेते हैं, जो कि नुकसानदायक हो सकता है।

व्यायाम करना न भूलें: बेहतर इम्युनिटी और स्वस्थ शरीर के लिए जितना जरूरी खानपान होता है, उतना ही जरूरी व्यायाम भी है। आप जो खा रहे हैं, उसे पचाने के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय भी रहना है। इसके लिए योग, प्राणायाम और अपनी सामथ्र्य के अनुसार व्यायाम जरूर करें। योग करने से रक्त का संचार तेज होता है। इससे हमारा शरीर बेहतर तरीके से काम करता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। योग शरीर और मन के बीच संतुलन को बेहतर बनाकर प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है।

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