Mission Bharat-2 से आक्सीजन संकट का समाधान तलाशेगा IIT Kanpur, एसआइआइसी बनेगा मददगार

देश को ऑक्सीजन की समृद्धता देने का प्रयास।

आइआइटी कानपुर में एसआइआइसी ने मिशन भारत -2 ओपन चैलेंज प्रतियोगिता शुरू की है और सुझाव मांगे गए हैं । इसमें देश में आक्सीजन उत्पादन बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने और बेहतरी लाने का प्रयास किया जाएगा।

Abhishek AgnihotriThu, 06 May 2021 08:58 AM (IST)

कानपुर, जेएनएन। देश भर में आक्सीजन संकट को देखते हुए अब आइआइटी कानपुर ने उसका समाधान तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। यहां स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआइआइसी) ने मिशन भारत-2 ओपन चैलेंज प्रतियोगिता शुरू कर सुझाव मांगे हैं। इसके लिए प्रतिभागी को प्रोटोटाइप तैयार करके देना होगा।

आक्सीजन प्लांट और स्वदेशी बेड साइड आक्सीजन कंसनट्रेटर विकसित करने के लिए आइआइटी ने सभी स्टार्टअप और लघु उद्योगों को आमंत्रित किया है। इसके तहत वे अपनी बेहतर तकनीक का इस्तेमाल कर सस्ता, सदुपयोगी, अत्याधुनिक आक्सीजन प्लांट व कंसनट्रेटर विकसित करने का प्रोटोटाइप दिखा सकते हैं। इस प्रतियोगिता का नाम मिशन भारत-2 आक्सीजन दिया गया है। इसके लिए 222.ड्ढद्धड्डह्म्ड्डह्लश2.द्बठ्ठ पर आवेदन किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वैश्विक महामारी में देशभर में 3.3 लाख कोविड-19 मामलों के साप्ताहिक औसत मामलों के साथ अस्पतालों में दवाई, बेड, वेंटीलेटर और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों की कमी आ गई है। सबसे अधिक किल्लत आक्सीजन की है, जिससे न जाने कितने निर्दोष मर रहे हैं। पिछले कोरोना कॉल में जब वेंटीलेटर की किल्लत आई थी तो आइआइटी के स्टार्टअप नोका रोबोटिक्स ने वैज्ञानिकों की मदद से 90 दिन में पोर्टेबल वेंटीलेटर तैयार किया था, जो वर्तमान में देश के एक हजार से अधिक अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह, संस्थान के स्टार्टअप ई-स्पिन नैनोटेक का तैयार श्वासा मास्क करोड़ों लोगों को कोरोना वायरस के प्रकोप से बचा रहा है। यह मास्क नैनोपार्टिकल व नैनोटेक्नोलॉजी पर आधारित है। अब आक्सीजन की किल्लत आई है तो संस्थान ने नए स्टार्टअप आमंत्रित किए हैं।

वेंटीलेटर तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय, श्रीकांत शास्त्री, राहुल पटेल की टीम अब आक्सीजन को लेकर काम में जुट गई है। वर्तमान में भी संस्थान के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के 10 सदस्यों की टीम नई कार्ययोजना पर काम कर रही है। आइआइटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने उद्यमियों से इस चुनौती के लिए आवेदन करने का आग्रह किया है। प्रो. अमिताभ ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को लेकर निर्माताओं को मिलकर काम करना चाहिए, जिसकी उत्पादन क्षमता 100 यूनिट प्रतिदिन होनी चाहिए।

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