बीमा नहीं है तो वाहन बेचकर देना होगा क्लेम, कोर्ट के आदेश पर अब होगा क्रियान्वयन

मार्ग दुर्घटना के मामलों में अक्सर वाहनों का बीमा नहीं होता है। एक्सीडेंट होने के बाद पीड़ितों को क्षतिपूर्ति देने की जिम्मेदारी वाहन स्वामी की होती है। चूंकि क्लेम की राशि लाखों में होती है लिहाजा वाहन बीमित न होने पर पीड़ितों को समय से क्षतिपूर्ति राशि नहीं मिल पाती।

Abhishek AgnihotriFri, 22 Oct 2021 04:41 PM (IST)
मार्ग दुर्घटना के मामलों में अक्सर वाहनों का बीमा नहीं होता है।

कानपुर, जेएनएन। मार्ग दुर्घटना के मामलों में अक्सर वाहनों का बीमा नहीं होता है। ऐसे में एक्सीडेंट होने के बाद पीड़ितों को क्षतिपूर्ति देने की जिम्मेदारी वाहन स्वामी की होती है। चूंकि, क्लेम की राशि लाखों में होती है लिहाजा वाहन बीमित न होने पर पीड़ितों को समय से क्षतिपूर्ति राशि नहीं मिल पाती। कोर्ट से के आदेश के बाद भी महीनों मामला लटका रहता है। केस एक में दिया गया मामला इसी से जुड़ा हुआ है, लेकिन अब एक्सीडेंट करने के बाद वाहन स्वामी क्षतिपूर्ति देने से बच नहीं पाएंगे। वाहन को बेचकर क्षतिपूर्ति की राशि वसूली जाएगी।

केस एक: महाराजपुर में चार साल पहले एक्सीडेंट हुआ, जिसमें क्षेत्रीय निवासी की मौत हो गई। मृतक की पत्नी राधा ने कोर्ट में क्लेम दाखिल किया। अधिवक्ता राजा अजय कुमार सिंह चंदेल ने बताया ट्रक मालिक सतीश के खिलाफ न्यायालय ने 12 लाख रुपये का एवार्ड (क्षतिपूर्ति) देने के आदेश किए। वाहन का बीमा न होने से यह धनराशि ट्रक मालिक से वसूल करने के लिए रिकवरी जारी की गई है। अधिवक्ता के मुताबिक बीमा नहीं है तो वाहन बेचकर पीडि़ता को क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रार्थना पत्र देंगे।

केस दो: तीन साल पहले हुए एक्सीडेंट में संजय सोनकर को शारीरिक क्षति हुई थी। उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करा न्यायालय से क्लेम मांगा। वाहन मालिक अभय पर न्यायालय ने 64 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। उनका वाहन बीमित नहीं था लिहाजा अभय ने स्वयं चेक के माध्यम से यह धनराशि जमा कर दी। अधिवक्ता संजय प्रताप सचान ने बताया कि जुर्माना अदा होने पर मुकदमा नाट प्रेस (बल नहीं दिया) कर दिया। अधिवक्ता के मुताबिक क्षतिपूर्ति नहीं मिलती तो वाहन बेचकर पैसा दिलाने का प्रार्थना पत्र देते।

तीन साल बाद शुरू हुआ क्रियान्वयन

वरिष्ठ अधिवक्ता अंबरीश मिश्रा बताते हैं कि पंजाब में वर्ष 2015 में हुए एक्सीडेंट में महिला की मौत हो गई थी, जबकि उसका बच्चा घायल हो गया था। मामले में जिलास्तर से लेकर हाईकोर्ट तक महिला के स्वजन का क्लेम खारिज किया जाता रहा। तर्क था कि वाहन बीमित नहीं है, जिसके बाद वर्ष 2018 में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने आदेश दिया था कि वाहन बेचकर क्षतिपूर्ति दें। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों को अपने यहां यह व्यवस्था शुरू करने के आदेश दिए थे। अब इसका क्रियान्वयन शुरू हुआ है।

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