ICAI से बिहार, झारखंड और उत्तराखंड ने की मांग, कहा - इन राज्यों को भी मिले प्रतिनिधित्व का दर्जा

आइसीएआइ के चुनावों को लेकर एक सितंबर को अधिसूचना जारी हो गई है। साथ ही सीआइआरसी के चुनाव भी होने हैं। सीआइआरसी का मुख्यालय कानपुर है। इसके अधीन उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार झारखंड छत्तीसगढ़ राजस्थान मध्य प्रदेश और उत्तराखंड राज्य आते हैं।

Shaswat GuptaFri, 10 Sep 2021 05:40 PM (IST)
इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया की खबर से संबंधित फोटो।

कानपुर, [राजीव सक्सेना]। सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल (सीआइआरसी) के तीन राज्य बिहार, झारखंड और उत्तराखंड इस समय संस्थान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। झारखंड और उत्तराखंड जब से बने हैैं, तब से उसका कोई प्रतिनिधित्व काउंसिल में नहीं हुआ है। वहीं, बिहार को पिछले 30 वर्ष से अधिक समय से प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया (आइसीएआइ) के तीन वर्षीय चुनाव आते ही इन राज्यों ने प्रतिनिधित्व को लेकर मांग शुरू कर दी है। इसे लेकर चार्टर्ड अकाउंटेंट ने ई-मेल भी की हैं, जिस पर संस्थान ने उन्हेंं भविष्य के लिए आश्वस्त भी किया है।

आइसीएआइ के चुनावों को लेकर एक सितंबर को अधिसूचना जारी हो गई है। साथ ही सीआइआरसी के चुनाव भी होने हैं। सीआइआरसी का मुख्यालय कानपुर है। इसके अधीन उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड राज्य आते हैं। केंद्रीय परिषद और रीजनल काउंसिल के चुनाव में इन राज्यों से प्रतिनिधि चुने जाते हैं। इन चुनाव में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ से तो प्रतिनिधि चुन लिए जाते हैं लेकिन उत्तराखंड और झारखंड से आज तक कोई सदस्य नहीं चुना गया। बिहार से भी 1987-88 के बाद से कोई सदस्य सीआइआरसी में नहीं निर्वाचित हुआ। दरअसल, इन तीनों राज्यों में चार्टर्ड अकाउंटेंट की संख्या कम है जबकि अकेले कानपुर में दो हजार से ज्यादा सीए हैं लेकिन इन पूरे राज्यों में कानपुर जितने सीए भी नहीं हैं। प्रतिनिधित्व न मिलने की वजह से इन राज्यों के चार्टर्ड अकाउंटेंट आवाज उठाकर राज्य से भी प्रतिनिधि चयन का मौका देने की मांग कर रहे हैैं। पिछले दिनों पटना के चार्टर्ड अकाउंटेंट आरके पांडेय ने संस्थान के अध्यक्ष को मेल भी की कि इन राज्यों से कम से कम एक-एक प्रतिनिधि तो मिले। उनकी मेल के जवाब में संस्थान के चुनाव प्रकोष्ठ का कार्य देख रहे दीपक भारद्वाज ने आश्वस्त किया है कि इस बार तो चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन इस बिंदु पर भविष्य में विचार किया जा सकता है।

इनका ये है कहना: 

सभी राज्यों को एक-एक सदस्य के प्रतिनिधित्व का मौका मिले, यह मांग वर्ष 2015 में भी उठाई गई थी। ऐसा होने से सभी राज्यों को बराबरी का दर्जा मिलेगा। - दीप कुमार मिश्रा, पूर्व चेयरमैन, सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल।

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