कानपुर के इन अस्पतालों में रात के समय फार्मासिस्ट के भरोसे होता ग्रामीणों का इलाज

कई जगहों पर पीएचसी रोज खुलती नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की सीएचसी रात में फार्मासिस्ट के भरोसे रहती हैं। ऐसे हालात में अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो फिर भयावह तस्वीर सामने होगी। पेश है ग्रामीण अंचल की सीएचसी-पीएचसी की हकीकत बयां करती रिपोर्ट

Akash DwivediFri, 18 Jun 2021 02:25 PM (IST)
पेश है ग्रामीण अंचल की सीएचसी-पीएचसी की हकीकत बयां करती रिपोर्ट

कानपुर, जेएनएन। ग्रामीण क्षेत्र की जनता को चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहां पर रात में डाक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चत करने के लिए फरमान जारी किया है। अधिकारी सब कुछ बेहतर बता रहे हैं, लेकिन हकीकत उलट है। सीएचसी-पीएचसी में न तो पर्याप्त डाक्टर हैं और न पैरामेडिकल स्टाफ है। डाक्टरों की संबद्धता अभी तक खत्म नहीं की गई, जबकि कुछ खत्म होने के बाद लौटे नहीं हैं। कई जगहों पर पीएचसी रोज खुलती नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की सीएचसी रात में फार्मासिस्ट के भरोसे रहती हैं। ऐसे हालात में अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो फिर भयावह तस्वीर सामने होगी। पेश है ग्रामीण अंचल की सीएचसी-पीएचसी की हकीकत बयां करती रिपोर्ट।

बिधनू : इमरजेंसी ड्यूटी संभाल रहे फार्मासिस्ट

कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित बिधनू सीएचसी में डाक्टरों के नौ पद हैं, लेकिन छह तैनात हैं। यहां एक सर्जन, एक डेंटल, एक फिजीशियन और एक प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन एनस्थेटिक नहीं हैं। हाईवे की सीएचसी होने से दिन रात यहां मार्ग दुर्घटना में घायल भर्ती होते हैं। नाइट ड्यूटी में इमरजेंसी फार्मासिस्ट के भरोसे रहती है। दो भवनों की सफाई के लिए एक सफाईकर्मी है। छह वार्ड ब्वाय में दो की तैनाती है।

मझावन : नहीं शुरू हो सकी सीएचसी

बिधनू ब्लाक के मझावन गांव में दो माह पहले 30 बेड की क्षमता वाला सीएचसी भवन तो तैयार हो गया, लेकिन उसे शुरू नहीं किया जा सका है। डाक्टर और संसाधन नहीं मुहैया कराए जा सके हैं।

कठारा : संविदा चिकित्सक के भरोसे

कठारा पीएचसी में एक संविदा डाक्टर और एक फार्मासिस्ट तैनात हैं। संविदा चिकित्सक दो वर्ष से कोविड ड्यूटी में लगे हैं। अब उनकी वापसी हो चुकी है, अभी तक फार्मासिस्ट के भरोसे पीएचसी चल रही थी।

चौबेपुर : सप्ताह में तीन दिन ही आते डाक्टर

चौबेपुर सीएचसी के अंतर्गत तीन पीएचसी हैं। तरीपाठकपुर एवं बंसठी में डाक्टर सप्ताह में तीन दिन ही आते हैं। राजारामपुर में चिकित्सक दो दिन से नहीं आ रहे हैं। बताया गया कि यहां तैनात डा. दीपक छुट्टी पर हैं। वार्ड ब्वाय लोगों को खांसी-जुकाम की दवा खुद ही दे देते हैं। गंभीर मरीज को क्षेत्र में सक्रिय झोलाछाप का सहारा लेना पड़ता है। गुरुवार दोपहर एक बजे अस्पताल बंद मिला।

बिल्हौर : सीएचसी में एक्सरे मशीन ही नहीं

सीएचसी में 15 दिन पहले कोविड अस्पताल का शुभारंभ विधायक भगवती प्रसाद सागर ने किया है। यहां पर एक्सरे मशीन ही नहीं है। एक्सरे सुविधा न होने पर हादसे के घायलों को कानपुर रेफर करना पड़ता है। सीएससी में डाक्टर के 10 पद हैं, जिसमें छह तैनात हैं। यहां फिजीशियन और चेस्ट रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। अधीक्षक डा. अरविंद भूषण ने बताया, डाक्टर व स्टाफ की कमी से अधिकारियों को अवगत करा दिया है। इमरजेंसी में 24 घंटे डाक्टर रहते हैं। अरौल पीएचसी में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट व एक वार्ड ब्वाय है।

घाटमपुर : पांच डाक्टर, एक भी वार्ड ब्वाय नहीं

घाटमपुर में डाक्टरों के नौ पद हैं, लेकिन पांच तैनात हैं। वार्ड ब्वाय एक भी नहीं है। डाक्टरों में एक एनस्थेटिक, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन और दो एमबीबीएस हैं। सात फार्मासिस्ट, सात स्टॉफ नर्स और छह सफाईकर्मी हैं, जिनके भरोसे 35 बेड की सीएचसी और 35 बेड का कोविड हास्पिटल, ओपीडी व इमरजेंसी चलाने का दंभ भर रहे हैं। यहां की ओपीडी में रोज 500 से अधिक मरीज आते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डा. कैलाश चंद्रा ने बताया कि सीएचसी में 24 घंटे एक डाक्टर रहते हैं।

बरीपाल : कैसे चलेगी सीएचसी

नई बनी बरीपाल सीएचसी भी हैंडओवर हो चुकी है। उसे शुरू करने के लिए नया स्टाफ नहीं मिला है। घाटमपुर के स्टाफ से वहां काम चलाया जाएगा।

पतारा : दो डाक्टर कानपुर में संबद्ध

पतारा सीएचसी में चिकित्सा अधीक्षक मिलाकर छह डाक्टर हैं। इसमें दो डाक्टर कानपुर में संबद्ध है। सीएचसी में न तो महिला रोग विशेषज्ञ हैं और न बाल रोग विशेषज्ञ। चिकित्सा अधीक्षक के मुताबिक 24 घंटे एक एमबीबीएस डाक्टर रहते हैं।

भीतरगांव : डाक्टर हैं तो नॄसग स्टाफ कम

30 बेड की भीतरगांव सीएचसी में पांच डाक्टर तैनात हैं, जिसमें एक एनस्थेटिक, एक बाल रोग विशेषज्ञ और एक नेत्र सर्जन हैं। फार्मासिस्ट तीन हैं। वार्ड ब्वाय के चार पदों में दो, स्टाफ नर्स सात की जगह तीन और सफाईकर्मी चार की जगह तीन हैं।

सरसौल : कोविड के 15 बेड तैयार

सीएचसी सरसौल में 30 बेड का कोविड अस्पताल बनना है, जिसमें 15 बेड तैयार हैं और 15 बेड के लिए काम चल रहा है। सेंट्रल आक्सीजन पाइप लाइन पड़ चुकी है। आठ छोटे आक्सीजन सिलिंडर हैं। अधीक्षक डा. रमेश कुमार ने बताया कि कोविड के लिए चिकित्सक व पैरामेडिकल पर्याप्त हैं। आठ डाक्टर हैं, जो ओपीडी, इमरजेंसी व रात की ड्यूटी करते हैं। शीशूपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिना डाक्टर के चल रहा था। यहां पर डा. रंजना को तैनात कर दिया गया है। 

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