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आयुष्मान मरीजों पर आफत, कानपुर में भर्ती नहीं कर रहे अस्पताल अब सिर्फ रामा का सहारा

कोरोना काल में अन्य मरीजों पर भी संकट।

आयुष्मान योजना के तहत सरकार द्वारा दिए गए कार्ड पर पांच लाख रुपये तक की इलाज की सुविधा है। महामारी के समय कार्डधारक परिवार के बीमार सदस्य को अस्पताल भर्ती करने से मना करके लौटा रहे हैं ।

Abhishek AgnihotriWed, 05 May 2021 09:52 AM (IST)

कानपुर, जेएनएन। कोविड संक्रमितों के साथ ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी अस्पतालों में जगह नहीं मिल पा रही है। आयुष्मान के लाभार्थियों का इलाज भी जिला प्रशासन नहीं करा पा रहा है। हैलट, उर्सला और कांशीराम अस्पताल में जगह मिल गई तो उनकी किस्मत अन्यथा उन्हें रामा मेडिकल कालेज का ही सराहा है। महामारी की इस विपत्ति में जब सरकार ने कैशलेश इलाज के निर्देश भी दे रखे हैं, उस वक्त में भी निजी अस्पताल कैश इलाज कराने वालों को ही भर्ती कर रहे हैं।

आयुष्मान योजना के तहत सरकार द्वारा दिए गए कार्ड पर एक परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक इलाज कराने की सुविधा दी गई है। इसके तहत इलाज करने वाले अस्पताल बिना पैसा लिए मरीज का इलाज करेंगे, जिसका पैसा सरकार देगी। इस सुविधा में कोविड का इलाज भी शामिल है। लेकिन आयुष्मान कार्ड पर निजी अस्पताल मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं।

चिकित्सा विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि कितने आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज कराया गया इसका आंकड़ा तो नहीं दे सकते, लेकिन इतना जरूर बता सकते हैं कि निजी अस्पताल रामा मेडिकल कॉलेज में उनका इलाज कराया जा रहा है। इसके साथ ही हैलट, उर्सला और कांशीराम में भी ऐसे मरीजों को भर्ती कराया जा रहा है। हालांकि यहां भर्ती होने वाले सभी मरीजों का इलाज निश्शुल्क होता है।

निजी अस्पतालों में तय है इलाज की दरें

प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों में इलाज की दरें तय कर दी हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों को भी इन दरों के हिसाब से आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज करना चाहिए, लेकिन वह उन्हें भर्ती ही नहीं करते। चिकित्साधिकारी कहते हैं कि जिन अस्पताल को आयुष्मान लाभार्थियों के इलाज अनुमति दी गई है उन्हें ऐसे लाभार्थियों को भर्ती करना चाहिए।

बेबस हैं कोविड कमांड सेंटर

कोविड कमांड सेंटर में अब ऐसे ही लोग फोन कर रहे हैं जो निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च नहीं कर सकते। लेकिन कोविड कमांड सेंटर बेबस है। यहां कॉल रिसीव करने वाले कर्मचारी तीमारदार से लंबी बातें करने के बाद कहते हैं आप अस्पताल से बात कर लीजिए, हम रेफरल लेटर बना देंगे। फिर कहते हैं आपका रजिस्ट्रेशन कर लिया गया है, जल्द ही आपको सूचित किया जाएगा लेकिन तीमारदार के पास फोन नहीं पहुंचता।

आयुष्मान के लाभार्थियों का इलाज रामा मेडिकल कॉलेज में कराया जा रहा है। निजी अस्पतालों में सरकार ने कोविड के इलाज की दरें तय कर दी हैं ऐसे में जिन अस्पतालों को अनुमति है उन्हें इलाज करना चाहिए। यदि वह इलाज नहीं कर रहे हैं तो उसे दिखवाया जाएगा। -डॉ. एके सिंह, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी

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