कोरोना में एंटीबायोटिक के बेहिसाब इस्तेमाल से बिगड़ रही सेहत, हार्मोन असंतुलन की समस्या

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एलएलआर अस्पताल में डॉक्टरों के सामने अब तक 735 मामले सामने आ चुके हैं। ज्यादा एंटीबायोटिक सेवन से बुरे के साथ मित्र बैक्टीरिया भी मर रहे हैं जिससे समस्या पैदा हो रही है ।

Abhishek AgnihotriSat, 19 Jun 2021 07:54 AM (IST)
कोरोना के बाद लोगों को नई समस्या।

कानपुर, [ऋषि दीक्षित]। कोरोना महामारी में संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए बेहिसाब इस्तेमाल की गई हाई ग्रेड एंटीबायोटिक दवाओं का साइड इफेक्ट अब दिखने लगा है। इन दवाओं ने शरीर के अंदर बुरे बैक्टीरिया के साथ ही मित्र बैक्टीरिया (माइक्रो बायोम्स) को भी मारना शुरू कर दिया है। साथ ही बुरे बैक्टीरिया ने दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध क्षमता तैयार कर ली है, जिससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटने, पाचन तंत्र में गड़बड़ी, डायरिया और हार्मोन असंतुलन की समस्याएं हो रहीं हैं। ऐसी दिक्कतें लेकर मरीज एलएलआर अस्पताल (हैलट) पहुंच रहे हैं। डाक्टरों के मुताबिक, अब तक ऐसे 735 मरीज आ चुके हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, गंभीर स्थिति वाले कोरोना संक्रमितों के इलाज में हाई ग्रेड एंटीबायोटिक दवाइयों का तो खूब इस्तेमाल हुआ ही, होम आइसोलेशन वालों ने भी इनका सेवन किया, जबकि वायरल इंफेक्शन में एंटीबायोटिक दवाइयों का कोई काम नहीं होता है। ऐसे में एंटीमाइक्रोबायल रेजिस्टेंस म्यूटेशन (एंटीबायोटिक दवाओं का निष्प्रभावी होना) का खतरा लगातार बढ़ता जाता है।

मित्र बैक्टीरिया का ये काम : मित्र बैक्टीरिया विशेषकर हमारी आंतों में पाए जाते हैं, जो पाचक एंजाइम के रिसाव और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक होते हैं। शरीर से दूषित पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया व एंटी आक्सीडेंट बनाने में भी माइक्रो बायोम्स सहायक होते हैं। शरीर में फ्री आक्सीजन रेडिकल्स की कमी नहीं होने देते हैं।

यह समस्याएं हो रहीं : मित्र बैक्टीरिया मरने से एंटीबायोटिक जनित डायरिया, शरीर में पोषक तत्व के अवशोषण की प्रक्रिया बाधित होने से कुपोषण, इंफ्लामेट्री बबल डिजीज और अचानक से मोटापा बढऩे की समस्याएं हो रहीं हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

-मित्र बैक्टीरिया शरीर में बुरे बैक्टीरिया का प्रवेश रोकते हैं। एंटीबायोटिक दवाएं बेवजह खाने अच्छे बैक्टीरिया मरने लगते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से शरीर की प्रक्रिया प्रणाली का वातावरण असंतुलित होने से समस्याएं पैदा हो रहीं हैं। -डॉ. सौरभ अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कालेज।

-किसी भी तरह के वायरस का संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मरीज की कल्चर सेंसटिविटी जांच कराने के बाद ही सटीक एंटीबायोटिक का इस्तेमाल उचित डोज, मात्रा और दिन के हिसाब से करें। भूलकर भी बीच में एंटीबायोटिक नहीं छोड़ें, साथ में प्रोबायोटिक्स भी चलाते रहें। -डॉ. विकास मिश्रा, प्रोफेसर, माइक्रोबायोलाजी विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कालेज।

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