पहले लगाओ दस पौधे और पाओ जमानत, पर्यावरण संरक्षण पर अदालत की पहल

हमीरपुर राठ के रहने वाले एक व्यक्ति पर मध्य प्रदेश के सिरौज थाने में अमानत में ख्यानत का मुकदमा दर्ज होने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। उसने ग्वालियर हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी।

Abhishek AgnihotriSun, 17 Oct 2021 02:14 PM (IST)
कोर्ट ने पौधे लगाने की शर्त पर जमानत दी।

हमीरपुर, जेएनएन। मध्य प्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट की पर्यावरण संरक्षण काे लेकर खास पहल सामने आई है। अदालत ने अमानत में ख्यानत के आरोपित को जमानत मंजूर करने के साथ शर्त रख दी है। इसमें कहा है कि पहले दस पौधे लगाकर आओ फिर जमानत मंजूर होगी। पर्यावरण संरक्षण को लेकर सराहनीय पहल हो सकती है लेकिन आरोपित को दस पौधे जुटाना मुश्किल हो रहा है। उसने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाते हुए वन विभाग से दस पौधे और ट्री गार्ड दिलाने की मांग की है। उसकी इस मांग के बाद अब मामला चर्चा का विषय बन गया है।

अक्सर देखने में आया है कि अदालत के फैसलों के साथ टिप्पणी बेहद गंभीर होती हैं और आम जनजीवन से जुड़ी अहम बातों का ध्यान दिलाती हैं। ऐसी ही एक शर्त मध्य प्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका पर रखी गई है, जो इन दिनों महोबा जिला प्रशासन और कचहरी के वकीलों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। रुपये की हेराफेरी के आरोपित की जमानत स्वीकृति के साथ उच्च न्यायालय ने 10 पेड़ लगाने की शर्त रखी है। राठ निवासी शिवशंकर साहू ने बताया कि वह मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के सिरौज थानाक्षेत्र में एक फाइनेंस कंपनी में काम करता था। वहां उस पर रुपये की हेराफेरी एवं अमानत में खयानत का आरोप लगा था। सिरौंज थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।

उसने बताया कि निचली अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। जिस पर उसने हाईकोर्ट ग्वालियर मध्य प्रदेश में जमानत अर्जी डाली। 25 सितंबर को अदालत ने जमानत अर्जी स्वीकृत करते हुए रिहायशी जनपद में सड़क किनारे या अन्य स्थान पर 10 फलदार या छायादार पौधे लगाने की शर्त रखी है। इस संबंध में न्यायालय ने सूचनार्थ जिलाधिकारी व प्रभागीय वन अधिकारी को भी आदेश की प्रति भेजी है। शिवशंकर ने बताया कि वह गरीब व्यक्ति है, उसके पास पौधे व ट्रीगार्ड के लिए रुपये नहीं है। उसने प्रभागीय वन अधिकारी व रेंजर को प्रार्थनापत्र देकर पौधे व ट्री गार्ड मांगे हैैं ताकि उच्च न्यायलय के आदेश का पालन किया जा सके।

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