HBTU Kanpur के पूर्व छात्र की गणित में बड़ी खोज, विघटना का आसान फार्मूला देने पर विदेश में आमंत्रण

कानपुर में एचबीटीयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के पूर्व छात्र हैं हरिओम।

एचबीटीयू के पूर्व छात्र हिरओम को गणितीय फार्मूला खोजने पर अंतरराष्ट्रीय स्थान मिला है जिसे पेश करने के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों ने आमंत्रित किया है। उन्होंने दो साल में आंशिक भिन्नों के विघटन की नई विधियों पर आधारित फार्मूले बनाए हैं।

Abhishek AgnihotriSun, 07 Mar 2021 07:57 AM (IST)

कानपुर, जेएनएन। हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विवि (एचबीटीयू) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के पूर्व छात्र हरिओम गुप्ता के गणितीय फार्मूले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थान मिला है। उन्होंने शोध कार्य करते हुए गणित के दो नए फार्मूले खोजे हैं, जो बड़ी से बड़ी गणना को बेहद आसान करते हैं। उनके फार्मूले अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस वर्ल्ड कांग्रेस ऑन इंजीनियरिंग में स्वीकृत किए गए हैं।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इंग्लैंड, बर्मिंघम यूनिवर्सिटी दुबई, ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन आयरलैंड समेत दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज के गणितज्ञ व वैज्ञानिकों के सामने इन फॉर्मूलों को पेश करने के लिए हरिओम को आमंत्रित किया गया है। 2017 में हरिओम ने एचबीटीयू से बीटेक की डिग्री प्राप्त की थी। बीटेक अंतिम वर्ष में उन्हें मल्टीनेशनल कंस्ट्रक्शन कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) में अच्छे पैकेज पर जॉब मिली, लेकिन वह नौकरी छोड़कर गणितीय फार्मूले को इजाद करने के लिए शोध कार्य करने लगे। इसके साथ इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (आइईएस) परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। आइआइटी जेईई मेंस 2013 की परीक्षा में 99.2 पर्सेंटाइल अंक हासिल करने के साथ वह उप्र राज्य इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (यूपीएसईई) के टॉपर रहे हैं। वह चार बार ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट (गेट) भी क्वालीफाई कर चुके हैं।

इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज में मिली स्वीकृति

मूल रूप से हरदोई जिले के संडीला के मोहल्ला महतवाना निवासी हरिओम ने बताया कि उन्हें यह शोध कार्य करने में दो वर्ष का समय लगा। उन्होंने अपनी यह शोध सबसे पहले इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज में भेजी, जहां पर इसे स्वीकृति मिल गई। उनके शोध पत्र को जर्मनी बेस्ड पब्लिशर स्प्रिंजर द्वारा प्रकाशित किया जाएगा। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस वल्र्ड कांग्रेस ऑन इंजीनियरिंग में प्रकाशन के लिए भी उनके शोध पत्र का चयन किया गया है।

चार वर्ष में पिता की मृत्यु के बाद चाचा ने दिया सहारा

हरिओम ने बताया कि चार वर्ष की उम्र में उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद किराने की दुकान चलाने वाले चाचा मिथलेश गुप्ता ने सहारा दिया। उन्हें एचबीटीयू तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। हरिओम ने बताया यह इनका दूसरा रिसर्च पेपर है।

गणितीय फार्मूला ऐसे करता है काम

गणित का यह फार्मूला भिन्नों के विघटन के लिए लगाया जाता है। अभी तक जो आंशिक भिन्नों के विघटन की विधियां हैं उनके इस तरह के फंक्शन को विघटित करने के लिए बहुत समय लगता है। उनके इस फार्मूले से उसे सीधे विघटित किया जा सकता है।

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