Mothers Day Special: कोरोना से जंग में मुस्तैद हैं मां, ड्यूटी का फर्ज निभा उठा रहीं जिम्मेदारी

खुद और बच्चों को सुरक्षित रख रहीं महिला पुलिसकर्मी।

कानपुर शहर में कोरोना की जंग में मुस्तैदी से खड़ीं महिला पुलिस कर्मी खुद को सुरक्षित रखने के साथ ही बच्चों को भी बचा रही हैं। ड्यूटी के कारण बच्चों के लिए ज्यादा वक्त न मिलने से देखभाल की भी चिंता बनी रहती है।

Abhishek AgnihotriSun, 09 May 2021 10:58 AM (IST)

कानपुर, [चंद्रप्रकाश गुप्ता]। कोरोना महामारी से जंग मेंं महिला पुलिसकर्मी भी पूरी मुस्तैदी से योद्धा बनकर लड़ रही हैं। वह लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए दिन रात पूरी शिद्दत से अपनी ड्यूटी कर रही हैं। खास बात ये है कि इसमें से तमाम महिला पुलिसकर्मी मां भी हैं, जो अकेले ही अपने ब'चों की परवरिश में जुटी हैं। कोरोना संक्रमण से खुद को बचाकर घर पहुंचना और फिर बच्चे को संक्रमण से बचाना भी उनके लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन वह परिवार और फर्ज के बीच तालमेल बनाकर चल रही हैं।

बेटी के लिए वक्त निकालना मुश्किल

हरबंशमोहाल थाने में तैनात दारोगा अंजलि तिवारी बताती हैं कि पति आनंद चित्रकूट के कर्वी थाने में उपनिरीक्षक हैं। परिवार में दो साल की बेटी आनंदिता है, जिसकी परवरिश का जिम्मा वह अकेले उठाती हैं। हूलागंज चौकी प्रभारी होने के कारण अंजलि बेटी के लिए ज्यादा वक्त नहीं निकाल पाती हैं। कभी भी घटना की सूचना आती है तो उन्हें जाना पड़ता है। जब से कोरोना संक्रमण का खतरनाक दौर शुरू हुआ, बेटी की चिंता बढऩे लगी तो उन्होंने मैनपुरी के बेवर निवासी अपनी छोटी बहन को बुलाया। फिर भी खाना बनाने और बेटी को खिलाने के बाद ही वह घर से निकलती हैं। खुद को संक्रमण से बचाकर वह जैसे-तैसे परिवार संभाल रही हैं।

कोरोना महामारी में ज्यादा फिक्र

हरबंशमोहाल थाने में ही तैनात सिपाही रोली यादव भी अपने तीन साल के बेटे तनिष्क की परवरिश अकेले करती हैं। रोली बताती हैं कि पति विकास फौज में हैं और इन दिनों हिमाचल प्रदेश में तैनात हैं। इटावा के भरथना में मायका और ससुराल उरई में है। कोरोना के कारण किसी का आना नहीं हो पाता, लेकिन रोली का साथ उनकी सहकर्मी रानी गुप्ता देती हैं। अलग अलग ड्यूटी लगने से दोनों मिलकर तनिष्क को संभालती हैं। रोली ने कहा कि कोरोना महामारी में तनिष्क की ज्यादा फिक्र होती है। ड्यूटी से आने के बाद पहले खुद को सैनिटाइज करती हैं, तभी तनिष्क के पास जाती हैं।

पति की मौत के बाद बच्चों की जिम्मेदारी

रेलबाजार थाने में तैनात दारोगा सरिता यादव के पति योगेश का आठ वर्ष पूर्व सड़क हादसे में निधन हो गया था। परिवार में सास, ससुर और दो बेटे 10 वर्षीय हर्ष व सात वर्षीय विधान हैं। पूरी जिम्मेदारी सरिता के कंधों पर है। सरिता बताती हैं कि छोटे ब'चों की परवरिश और नौकरी में सामंजस्य बैठाना मुश्किल होता है, फिर भी पूरी कोशिश करती हूं। पिछले दिनों ब'चों को बुखार आ गया था। पहले डॉक्टर की सलाह से दवाएं देती रही। सुधार न होने पर उन्होंने छुट्टी ली और ब'चों की तीमारदारी कर उन्हें स्वस्थ किया। शनिवार को सैफई निवासी उनकी मां की भी तबीयत खराब हो गई। सरिता ने तुरंत उन्हें बुलाकर कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया।

बर्रा थाने में तैनात महिला कांस्टेबल प्रियंका सिंह के परिवार में पति राजेंद्र ङ्क्षसह, दो बेटे 11 वर्षीय यश और 10 वर्षीय अंश है। दोनों ब'चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। प्रियंका ने बताया कि दिन की ड्यूटी में दिक्कत नहीं आती, क्योंकि ड्यूटी जाने से पहले ही वह ब'चों और पति के लिए नाश्ता व खाना तैयार कर देतीं हैं, लेकिन रात की ड्यूटी लगने पर काफी परेशानी होती है। पहले तो काफी समय तक मेस का खाना खाते रहे और अब पति हेल्प करा देते हैं। नाइट ड्यूटी होती है तो पति ही खाना बनाते हैं। कोविड काल में वह पूरी सतर्कता बरत रही हैं। ड्यूटी से आने के बाद कपड़े धोने और नहाने के बाद ही ब'चों के पास जाती हैं।

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