गुजरात के राज्यपाल की किसानों को नसीहत, नीति आयोग की कार्यशाला में साझा किए अनुभव

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती पर आनलाइन आयोजित कार्यशाला में किसानों को रसायनों का इस्तेमाल बंद करके प्राकृतिक खेती करने की अपील की है। यहां नीति आयोग के उपाध्यक्ष और विज्ञानियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

Abhishek AgnihotriWed, 01 Dec 2021 09:51 AM (IST)
प्राकृतिक खेती पर नीति आयोग की आनलाइन कार्यशाला।

कानपुर, जागरण संवाददाता। नीति आयोग की ओर से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मंगलवार को आनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती पर अपने अनुभव साझा किए। कहा, रसायनों का प्रयोग बंद किसान प्राकृतिक खेती करें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के जोन तीन रावतपुर स्थित कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान के विज्ञानियों ने भी कार्यशाला में हिस्सा लिया।

राज्यपाल ने कहा कि वह स्वयं किसान हैं और कई वर्षों से रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। पहले ही वर्ष प्राकृतिक खेती से उतना लाभ मिला, जितना रासायनिक खेती से मिलता था। कोविड-19 जैसी बीमारी से बचने में वही व्यक्ति सक्षम होगा, जिसकी प्रतिरोधक क्षमता अधिक होगी। प्रतिरोधक क्षमता उसमें अधिक होगी, जो प्राकृतिक खेती से उगे उत्पादों का सेवन करेगा। उन्होंने बताया कि 60-70 वर्ष पूर्व लोगों में रोग कम होते थे।

खेती में रसायनों का इस्तेमाल बढऩे से हृदय रोग, शुगर, बीपी, कैंसर बीमारियां होने लगीं। प्राकृतिक खेती के उत्पादों की विदेश में भी मांग होती है। हिमाचल प्रदेश में राज्यपाल रहते हुए उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए दो वर्ष तक कार्य किया था। 50 हजार किसानों ने इस खेती को अपनाया और अब 1.35 लाख किसान इससे जुड़ गए हैं। इससे उनकी आय 27 प्रतिशत तक बढ़ी और लागत में 56 प्रतिशत कमी आई। संस्थान के निदेशक डा. अतर सिंह ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत प्राकृतिक खेती विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया है।

नीति आयोग उपाध्यक्ष बोले- भूमि में कम हो रही कार्बन की मात्रा

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डा. राजीव कुमार ने कहा कि कई वर्षों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। किसानों की आय दोगुनी करनी है तो लागत कम करना जरूरी है। स्वास्थ्य का ध्यान रखना है तो रसायन मुक्त खेती जरूरी है। प्राकृतिक खेती से वातावरण का कार्बन जमीन में वापस लाते हैं। पहले जमीन में कार्बन का प्रतिशत 2.5 था, जो घटकर अब 0.4 प्रतिशत है।

अच्छी खेती के लिए भूमि में 1.5 प्रतिशत कार्बन होना चाहिए। प्राकृतिक खेती से उपज कम नहीं होती बल्कि किसानों की आय बढ़ती है। 86 प्रतिशत किसान दो हेक्टेयर से कम जमीन पर खेती करते हैं। उनके लिए प्राकृतिक खेती जरूरी है। कार्यशाला में देशभर से 930 से अधिक प्रतिभागी, कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विवि के विज्ञानी, आइसीएआर के निदेशक व विज्ञानी, किसान और शोधार्थी जुड़े।

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