GSVM Kanpur: पांच डाक्टरों के बचाव में लगा मेडिकल कालेज प्रशासन, तत्कालीन प्राचार्य पर फोड़ा ठीकरा

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एलएलआर अस्पताल में मौतों का डाटा कोविड पोर्टल पर अपडेट नहीं करने में दोषी पाए गए पांच चिकित्सा शिक्षक पर कार्रवाई को लेकर रिकार्ड न होने की बात कहते हुए तत्कालीन प्राचार्य पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है।

Abhishek AgnihotriFri, 24 Sep 2021 09:48 AM (IST)
कोविड पोर्टल पर मौतों का आंकड़ा अपडेट न करने का मामला।

कानपुर, जेएनएन। कोरोना की दूसरी लहर के पीक के दौरान जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एलएलआर अस्पताल (हैलट) स्थित कोविड हास्पिटल में हुईं मौतों का डाटा कोविड पोर्टल पर अपडेट नहीं करने के मामले में शासन-प्रशासन की जांच में पांच चिकित्सा शिक्षक दोषी पाए गए थे। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए अपर निदेशक स्वास्थ्य ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य को पत्र लिखा था। कालेज प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ा रिकार्ड न होने की बात कहते हुए तत्कालीन प्राचार्य पर ठीकरा फोड़ दिया है।

कोरोना की दूसरी लहर अप्रैल से लेकर आठ मई तक कोरोना से 145 की मौत हुई, जिसे पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। इसी तरह 31 कोरोना संक्रमितों की मौत विलंब से मिलने पर उसे भी अपलोड नहीं किया गया। साथ ही 12 कोरोना की संभावित मौतों का आंकड़ा अपलोड नहीं किया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने जिलाधिकारी को जांच के आदेश दिए थे। इस प्रकरण की जांच में डाटा टीम की नोडल अफसर कम्यूनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. सीमा निगम, फिजियोलाजी के डा. जयवर्धन, फारेंसिक मेडिसिन के डा. पीयूष गंगवार, फार्माकोलाजी विभाग के डा. हिमांशु शर्मा एवं डा अमित कुमार ने कार्य जिम्मेदारी से नहीं किया। बार-बार कहने के बाद भी उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। कहने के बाद भी न अपलोड कराया न समस्या का निराकरण किया। इसलिए उन्हें दोषी मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस संभर्द में एडी हेल्थ ने कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज मांगे थे।

प्राचार्य प्रो. संजय काला ने पत्र लिखा है कि यह प्रकरण 24 मई का मेरे आने से पहले का है। इस संबंध में तत्कालीन प्राचार्य प्रो. आरबी कमल ने उच्चाधिकारियों को सूचना भेजी थी। जब कार्यालय के कनिष्ठ लिपिक राकेश यादव व नितिन रंजन श्रीवास्तव से जानकारी की। इस पर राकेश ने बताया कि किसी प्रकार का रिकार्ड नहीं है। नितिन ने बताया कि प्रो. कमल ने इस प्रकरण से जुड़ा पत्र 30 मई को लिखाया था, उस पर गोपनीय डिस्पैच नंबर दर्ज कराकर अपने पास रख लिया। नितिन का टाइप किया हुआ बिना हस्ताक्षर के पत्र की प्रति भी भेजी जा रही है। रिकार्ड न होने पर पत्र नहीं लिखा जा सकता है।

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