जीएसवीएम के बाल रोग की निलंबित डाक्टर बोलीं- मुझे फंसाया गया, नहीं हुई बच्चे की मौत

जीएसवीएम मेडिकल कालेज अस्पताल के बाल रोग में वेंटिलेटर की वजह से बच्चे की मौत के मामले में निलंबित डाक्टर का कहना है कि बाल रोग के विभागाध्यक्ष ने प्राचार्य के माध्यम से शासन को गलत रिपोर्ट भेजी है।

Abhishek AgnihotriSun, 01 Aug 2021 09:55 AM (IST)
मेडिकल कालेज की कमेटी की रिपोर्ट में निलंबित डाक्टर को क्लीन चिट।

कानपुर, जेएनएन। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाद रोग विभाग का वेंटिलेटर प्रकरण में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। शनिवार को बाल रोग की निलंबित डाक्टर ने बाल रोग विभागाध्यक्ष पर फंसाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मैंने अपने पत्र में किसी भी बच्चे की मौत का जिक्र नहीं किया था। सिर्फ एक्वा वेंटिलेटर ही नहीं, बल्कि अन्य वेंटिलेटर में आई खराबियों का भी जिक्र किया था। फिर भी उन्होंने प्राचार्य के माध्यम से गलत रिपोर्ट शासन को भेजी है। उधर, वेंटिलेटर की वजह से बच्चे की मौत की जांच 20 जुलाई को डेथ आडिट कमेटी ने की थी, जिसमें निलंबित डाक्टर को क्लीन चिट दी थी। बच्चा उनकी यूनिट में नहीं, बल्कि बाल रोग विभागाध्यक्ष की यूनिट में भर्ती था। वेंटिलेटर की वजह से उसकी मौत भी नहीं हुई थी।

पीएम केयर फंड से मिले एग्वा वेंटिलेटर की वजह से बच्चे की मौत के मामले में डाक्टर के खिलाफ रिपोर्ट भेज कर मेडिकल कालेज प्रशासन ही फंसता हुआ नजर आ रहा है। पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव पर गलत रिपोर्ट देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पीआइसीयू के सभी वेंटिलेटर में खराबी से अवगत कराते हुए मरम्मत कराने का आग्रह किया था।

उस पत्र में किसी भी बच्चे की मौत होने का जिक्र नहीं किया था। वहीं, दैनिक जागरण में प्रकरण उजागर होने पर तीन सदस्यीय डेथ आडिट कमेटी से जांच कराई गई थी, जिसमें बतौर एक्सपर्ट प्रो. रूपा डालमिया सिंह को शामिल किया गया था। उस कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट दी थी। रिपोर्ट में बच्चे की मौत बाल रोग विभागाध्यक्ष की देखरेख में चल रहे इलाज के दौरान होने की बात कही थी। बच्चे के दिमाग में टीबी थी, उसे न्यूरोलाजी विभागाध्यक्ष प्रो. अलोक वर्मा ने भी देखा था।

प्राचार्य प्रो. संजय काला इस समय एसएन मेडिकल कालेज आगरा गए हुए हैं। वहां उन्हें नए प्राचार्य को कार्यभार सौंपना है। इस प्रकरण की जानकारी होने पर वहीं से शासन को पत्र लिखा है। उस पत्र में डा. नेहा अग्रवाल को निर्दोष बताया है। उनका निलंबन वापस लेने का आग्रह किया है।

-डेथ आडिट कमेटी ने 20 जुलाई को जांच की थी। उसमें वेंटिलेटर की वजह से मौत नहीं होने की बात बताई थी। बच्चा डा. नेहा के अंडर में भर्ती भी नहीं था। इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है। मंगलवार को प्राचार्य के आने के बाद ही विस्तृत जानकारी दी जाएगी। - प्रो. रिचा गिरि, प्रभारी प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कालेज।

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