Govind Nagar Daicoti: हाथ की नस काटने वाला गार्ड बोला- जिल्लत की जिंदगी गंवारा नहीं, इसलिए उठाया ऐसा कदम

गोविंद नगर के अपार्टमेंट में डकैती के बाद पुलिस की पूछताछ से परेशान होकर हाथ की नस काटन वाला बुजुर्ग गार्ड आपबीती बताते हुए फफक पड़ा और कहा कि दिन में 10 बार सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी पूछताछ करने आते थे।

Abhishek AgnihotriSat, 25 Sep 2021 08:00 AM (IST)
गोविंद नगर में डकैती की घटना में पुलिस कर रही जांच।

कानपुर, जेएनएन। गोविंद नगर टी-ब्लाक स्थित शिवम इन्क्लेव अपार्टमेंट के गार्ड 70 वर्षीय गार्ड वीरेंद्र कुमार वर्मा को शुक्रवार दोपहर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्होंने अपार्टमेंट में रहने वाली वृद्धा आशा गुप्ता के घर डाली गई डकैती मामले में पुलिस की पूछताछ से परेशान होकर गुरुवार को दोनों हाथ की नस काट ली थीं। अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने के बाद वह मीडियाकर्मियों से आपबीती बताते हुए फफक पड़े।

गार्ड ने कहा कि पुलिस की पूछताछ से वह परेशान हो चुके थे। दिन में 10 बार सादे कपड़ों में आकर पुलिसकर्मी पूछताछ करते थे। उनका व्यवहार ठीक नहीं था। इसी वजह से वह अवसाद में आ गए थे। वह बोले, जिल्लत भरी ङ्क्षजदगी नहीं जीना चाहता था, इसीलिए ये आत्मघाती कदम उठाया। घटना के बाद से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है, जबकि वह बयानों पर अडिग हैं। तीन दिन थाने बुलाकर पूछताछ की गई थी। मधुमेह की बीमारी के चलते नजर कमजोर हो गई है।

उन्हें बताया कि वारदात वाली रात कुछ देर के लिए ही एक आरोपित से उनका आमना सामना हुआ था। मास्क लगाए होने के कारण उसका चेहरा भी स्पष्ट नहीं पहचान आ रहा था। हर बार पुलिस कर्मी पूछताछ करने आते तो आरोपितों की फोटो दिखाकर पहचानने के लिए कहते। बार-बार एक ही सवाल से परेशान होकर अवसाद में आ गया था। एडीसीपी साउथ डा. अनिल कुमार ने कहा कि गार्ड से किसी तरह की अभद्रता नहीं की गई। वह लगातार ड्यूटी करते रहे। हो सकता है कि पूछताछ से वह परेशान हो गए और आत्मघाती कदम उठा लिया। उनका बेहतर इलाज कराया गया है।

पुलिसकर्मी करते थे अभद्रता

गार्ड का आरोप है कि सादे कपड़ों में पूछताछ करने वाले पुलिसकर्मी अभद्रता भी करते थे। अपशब्दों का इस्तेमाल करते थे। कोई थप्पड़ मारकर चला जाता तो कोई परिवार बर्बाद करने और जेल में बंद छोटे बेटे को बाहर न निकलने देने और जेल भेजकर बुढ़ापा खराब करने की धमकी देता था।

बड़े बेटे को ले आए तो बर्दाश्त नहीं हुआ

गार्ड का कहना था कि वह पुलिस की यातनाएं और उनके व्यवहार को बर्दाश्त कर रहे थे। पुलिसकर्मी उनकी कानपुर देहात के पुखरायां स्थित ससुराल पहुंच गए और बड़े बेटे से कहा कि पापा भाग गए हैं। यह झूठ बोलकर बेटे को भी थाने ले आए और उससे भी पूछताछ की। बेटे को उठाने के बाद पूरा परिवार ही परेशान हो गया। तब लगा कि अगर हमारी वजह से परिवार के 10 लोगों की जिंदगी बर्बाद हो रही है तो खुद को खत्म करना बेहतर होगा।

बार-बार ये सवाल पूछ रही पुलिस

-बदमाशों को कहां से बुलाया, किसकी योजना थी

-सब कुछ जानते हो, लेकिन बता क्यों नहीं रहे

-यहां से पहले तुम कहां काम करते थे

-फोटो को पहचान लो, नहीं तो जेल जाने को तैयार रहो

-कब से इस गैंग के संपर्क में आए

-जब तुम बंधक थे तो दोनों हाथ कैसे खोले

-बदमाशों का पता बता दो तो हम तुम्हें बचा लेंगे

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