Kanpur Bus Accident : बिना एस्टीमेट मंजूर हुए ही एक मार्च 2019 को करा दिया गया था सचेंडी अंडरपास का शिलान्यास

सचेंडी और आसपास के गांव के लोगों की मांग पर अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने अंडरपास का प्रस्ताव रखा था। एनएचएआइ ने एक मार्च 2019 को सांसद से इसका शिलान्यास भी करा लिया। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक पंकज मिश्र ने बताया कि एस्टीमेट भेजा गया था

Akash DwivediFri, 11 Jun 2021 08:25 AM (IST)
पहली बार में नहीं मंजूरी मिली तो बाद में दो बार एस्टीमेट भेजा गया

कानपुर, जेएनएन। सचेंडी में अंडरपास होता तो मंगलवार रात शायद 18 लोगों की जान न जाती। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने यहां व्हीकुलर अंडरपास (वीयूपी) का एस्टीमेट बनाया था, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। सबसे बड़ी बात यह कि मंजूरी मिले बिना ही इसका शिलान्यास करा लिया गया। अंडरपास न होने से वाहन चालक लंबा चक्कर बचाने को गलत दिशा से वाहन लेकर जाते हैं। मंगलवार रात भी टेंपो चालक ने वही गलती की और हादसा हो गया।

सचेंडी और आसपास के गांव के लोगों की मांग पर अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने अंडरपास का प्रस्ताव रखा था। एनएचएआइ ने एक मार्च 2019 को सांसद से इसका शिलान्यास भी करा लिया। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक पंकज मिश्र ने बताया कि एस्टीमेट भेजा गया था, उम्मीद थी कि सैद्धांतिक सहमति मिल जाएगी और इसी वजह से शिलान्यास करा लिया गया। पहली बार में नहीं मंजूरी मिली तो बाद में दो बार एस्टीमेट भेजा गया पर उसे अब तक मंजूरी नहीं मिली।

अंडरपास तो बना नहीं, शिलान्यास का पत्थर भी गायब हो गया : मौके पर लगाए गए पत्थर पर बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा और विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक की मौजूदगी में सांसद देवेंद्र सिंह भोले द्वारा शिलान्यास किया जाना अंकित था। अंडरपास बना नहीं और कुछ वक्त बाद पत्थर भी वहां से गायब हो गया।

वादाखिलाफी से ग्रामीण खफा : मंगलवार को हुए हादसे के बाद सचेंडी और आसपास के गांव के लोगों में इस बात की नाराजगी थी कि शिलान्यास के बाद भी अंडरपास नहीं बना। हादसे में जान गंवाने वालों के स्वजन ने भी इस पर नाराजगी जताई। इंटरनेट मीडिया पर भी इस पर लिखा गया।

एनएचएआइ के छल से जनप्रतिनिधि भी खफा : सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कहा कि यह अधिकारियों की लापरवाही है और बारा टोल प्लाजा कंपनी से मिलीभगत के चलते जनउपयोगी प्रोजेक्ट टल रहे हैं। अंडरपास होता तो इतना बड़ा हादसा न होता। इस लापरवाही की शिकायत केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री से की जाएगी।

इनका ये है कहना

एनएचएआइ के अधिकारियों के द्वारा शिलान्यास के नाम पर किए गए छल की सजा 18 परिवारों को जिंदगी भर भुगतनी पड़ेगी। शिलान्यास कार्यक्रम में गया जरूर नहीं था पर जनहित की अनदेखी करने वाले अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।  

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