Religion Conversion in UP: उमर गौतम की गिरफ्तारी पर रिश्तेदारों ने दी प्रतिक्रिया, कहा- पापी से कोई रिश्ता नहीं

Religion Conversion in UP उत्तर प्रदेश में मतांतरण का बड़ा मामला सामने आने के बाद एटीएस टीम पूरी तरह से सतर्क है। हजार से अधिक लोगों को मुस्लिम बनाने के घिनौने कृत्य में शामिल दो लोगों को टीम ने गिरफ्तार कर केस दर्ज किया है।

Shaswat GuptaTue, 22 Jun 2021 02:10 PM (IST)
मतांतरण के मामले में गिरफ्तार मोहम्मद उमर गौतम की फोटो।

फतेहपुर, जेएनएन। मतांतरण के मामले में एटीएस द्वारा गिरफ्तार मोहम्मद उमर गौतम के बारे में फतेहपुर स्थित उसके गांव में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। ग्रामीणजनों का कहना है कि श्याम के इस्लाम कुबूल करने का आभास तो हमें था, लेकिन वह इतने खतरनाक काम में लगा होगा इसका अंदाजा नहीं था। गांव के एक पड़ोसी ने बताया कि डेढ़ साल पहले वह फतेहपुर शहर के एक स्कूल संचालक मौलाना के साथ गांव दस मिनट के लिए आया था। यह भी पता चला कि वह तकरीर आदि के कार्यक्रमों में फतेहपुर, खागा, बांदा आदि जनपदों में जाता था। वहीं गांव में दो दिन से लगातार पुलिस टीम की आवाजाही और तहकीकात भी जारी है। इस बीच जागरण डॉट कॉम की टीम ने उमर (मतांतरण से पहले श्याम प्रताप सिंह) के स्वजन से बातचीत की। जानिए मामले पर उमर के स्वजन ने क्या प्रतिक्रिया दी:  

भाई कहने में आती है शर्म: श्याम उर्फ उमर के बड़े भाई उदयभान सिंह जो शहर के गाजीपुर बस स्टाप के पास रहते हैं, श्याम का नाम सुनते ही बिफर पड़ते हैं। उनका कहना था कि ऐसे पापी से हमारा रिश्ता बीस साल पहले ही खत्म हो गया था। मैं वर्ष 1980 से गांव छोड़कर शहर में रह रहा हूं। कहा कि एक मां की कोख से पैदा हुए हैं तो यह सब सुनकर दर्द तो होता है, लेकिन उसने ऐसा घृणित कार्य किया है कि भाई कहने में शर्म आती है।

पैतृक रिश्तों से बन गईं दूरियां: वर्ष 1984 में मो. उमर बन जाने के बाद श्याम प्रताप के रिश्तों की डोर कमजोर होने लगी थी। स्वजन की मानें तो मतांतरण की जानकारी होने के बाद रिश्तेदारों ने दूरियां बना ली थीं। जहां तमाम मांगलिक कार्यों मे उसे न्योता तक नहीं दिया जाता रहा था जबकि अन्य हिस्सा बनते थे। एटीएस के खुलासे के बाद रिश्तेदार चुप्पी साधे हुए हैं।

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रिश्तेदारों के मोबाइल फोन स्विच आफ हुए: मामला उजागर होने के बाद इस बड़े परिवार के रिश्तेदार और नातेदार कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं दिखे। बार-बार फोन आने से कुछ ने कहा कि उस पापी से हमारा कोई रिश्ता नहीं। वहीं तमाम करीबियों ने अपने मोबाइल स्विच आफ कर लिए। जिससे बात हुई वह भी कुछ बताने से कतराता रहा। हालांकि जिनसे भी बात उनमें एक सामान्य रही कि सभी नाता तोड़ लेने की दुहाई देते रहे।

उमर का किससे था संपर्क, ब्योरा जुटा रही पुलिस: थरियांव थाने के रमवां पंथुआ गांव में श्याम प्रताप उर्फ मो. उमर के एटीएस की ओर से मतांतरण के आरोप में पकड़े जाने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासनिक अफसरों में खलबली मची रही। एटीएस टीम आने की आशंका पर पुलिस टीम की गाड़ियां गांव में दौड़ती रहीं। देर रात तक पुलिस उमर के चचेरे भाई से ब्योरा संकलित करने में जुटी रही। सीओ थरियांव अनिल कुमार व इंस्पेक्टर एसओ नंदलाल सिंह पीआरवी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। 

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इनका ये है कहना: 

वर्ष 1980 से श्याम प्रताप उर्फ मो. उमर का स्वजन से कोई मतलब नहीं था। पिता की मौत पर ये गांव आया था, लेकिन कुछ देर बाद चला गया था। शहर में वह कहां कहां आता-जाता था और इसके किससे -किससे संपर्क थे, इसकी जांच कराई जा रही है। -  सतपाल अंतिल, पुलिस अधीक्षक मतांतरण करने वाला श्यामप्रताप उर्फ मो. उमर का स्वजन के बीच मेलजोल है कि नहीं। वह गांव आता है कि नहीं, इसी बारे में जांच की जा रही है। - नंदलाल सिंह, इंस्पेक्टर 

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