कानपुर में खुला बाजार दिला रहा किसानों को लाभ, लाही समेत मसूर और अरहर का एमएसपी से ऊपर मिल रहा भाव

कानपुर में खुले बाजार में बिक रही दालों का किसानों को अच्छा भाव मिल रहा है।

सिर्फ लाही ही नहीं जौ मसूर और अरहर के भाव भी न्यूनतम समर्थन मूल्य के ऊपर चल रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक म्यांमार में राष्ट्रपति शासन की वजह से अरहर की दाल की आवक घटी है वहीं मटर के आयात पर पहले से ही प्रतिबंध लगे हुए हैं।

Shaswat GuptaSun, 14 Feb 2021 03:49 PM (IST)

कानपुर, जेएनएन। मंडी के साथ खुला बाजार भी किसानों को लाभ दे रहा है। नई फसल के रूप में बाजार में आई लाही का किसानों को अच्छा भाव मिल रहा है। मंडी समिति और खुले बाजार में कारोबारी किसान से लाही 5,500 रुपये क्विंटल खरीद रहे हैं जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी 4,650 रुपये है। सिर्फ लाही ही नहीं जौ, मसूर और अरहर के भाव भी न्यूनतम समर्थन मूल्य के ऊपर चल रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक म्यांमार में राष्ट्रपति शासन की वजह से अरहर की दाल की आवक घटी है वहीं मटर के आयात पर पहले से ही प्रतिबंध लगे हुए हैं। इसलिए उसकी वजह से कीमतें बढ़ी हुई हैं।

प्रमुख जिंस की स्थिति (प्रति क्विंटल)

वस्तु                         मूल्य                         एमएसपी

लाही                         5,500                         4,650

जौ                            1,600                         1,525

मसूर                         5,200                         4,800

अरहर                       6,000                        5,800

इनका ये है कहना 

दलहन व तिलहन की कीमतें इनके आयात पर निर्भर होती हैं। केंद्र सरकार की आयात नीति व आयात शुल्क के घटने या बढ़ने पर इनकी कीमतें भी घटती-बढ़ती हैं। इस समय केंद्र सरकार की आयात पॉलिसी से दलहन व तेल का आयात कम हुआ है। यह किसानों के लिए फायदेमंद है।  - ज्ञानेश मिश्रा, अध्यक्ष,  उत्तर प्रदेश खाद्य पदार्थ उद्योग व्यापार मंडल। बाजार में मंडियों में कई बार खासकर दलहन व तिलहन में एमएसपी से अधिक कीमत होती है। देश में इनका उत्पादन कम होता है। इस समय म्यांमार में सेना के शासन की वजह से अरहर के भाव बढ़े हुए हैं।  - अजय बाजपेई, उपाध्यक्ष, कानपुर गल्ला आढ़तिया संघ लाही एमएसपी से अधिक महंगी है। दलहन भी महंगा है। इससे किसानों को लाभ मिल रहा है। कभी-कभी दलहन सस्ता भी होता है। तीन वर्ष पूर्व काली उड़द बहुत सस्ती थी लेकिन आयात पॉलिसी बदली जिससे किसानों को राहत मिली और दलहन महंगे हो गए।  - सत्यप्रकाश गुप्ता, गल्ला आढ़ती। गेहूं व धान की तुलना में दलहन, तिलहन का उत्पादन देश में कम होता है। लागत के अनुसार किसानों को इसकी कीमत मिलनी भी चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार समय-समय पर किसानों को दलहन तिलहन की उचित कीमत मिले इसके लिए आयात शुल्क बढ़ाती है। यह किसानों के हित में है।  - गोपाल शुक्ल, गल्ला आढ़ती।

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