EPFO Fraud Kanpur: कितना सुरक्षित है पीएफ, कर्मचारी संगठन ने आफलाइन व्यवस्था की रखी चाहत

कानपुर और लखनऊ में पीएफ घोटाले सामने आने के बाद कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई और कर्मचारी संगठन ने पीएफ की आफलाइन निकासी का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग रखी है। इससे साइबर ठगी से बचा जा सकेगा।

Abhishek AgnihotriWed, 22 Sep 2021 07:53 AM (IST)
कानपुर में पीएफ घोटाले के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कानपुर, जेएनएन। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में इस समय पीएफ की निकासी आनलाइन हो रही है। जिस तरह से पिछले दिनों पीएफ घोटाले सामने आए हैं, उसने कर्मचारियों को चिंता में डाल दिया है। कम पढ़े लिखे कर्मचारियों का मानना है कि आनलाइन व्यवस्था में उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि उन्हें ओटीपी समेत सारी जानकारियां किसी न किसी को बतानी पड़ेंगी और इस स्थिति में उनके साथ धोखाधड़ी की पूरी संभावना है। वहीं कर्मचारी संगठनों के नेताओं का मानना है कि अगर साइबर ठगी से पीएफ को बचाना है तो विभाग को कम पढ़े लिखे कर्मचारियों के लिए आफलाइन पीएफ निकासी का विकल्प देने पर भी विचार करना होगा।

-कुछ दिन पूर्व केस्को के संविदा कर्मियों के भविष्य निधि से पैसा निकल गया। भविष्य निधि का 90 फीसद अंशदाता कंप्यूटर चलाने में असमर्थ है। उसे आनलाइन पीएफ दावे के लिए दूसरे के सहारे की जरूरत पड़ती है। ईपीएफओ में कम पढ़े लिखे कर्मचारियों के लिए आफलाइन क्लेम जमा करने की सुविधा बहाल होनी चाहिए। -राजेश कुमार शुक्ल, संयोजक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच

-ईपीएफओ की व्यवस्था आनलाइन तो है, लेकिन सुरक्षा फीचर्स नदारद हैं। इसीलिए कर्मचारियों के साथ ठगी हो रही है। पूरे सिस्टम की साइबर एक्सपर्ट के साथ बैठक समीक्षा की जाए और जब तक कोई फुलप्रूफ व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक के लिए कम पढ़े लिखे कर्मचारियों को आफलाइन क्लेम की सुविधा दी जाए। -कुलदीप सिंह, नगर अध्यक्ष भारतीय मजदूर संघ

-कम पढ़े कर्मचारियों की पीएफ पर एक गिरोह की नजर है। ईपीएफओ में स्पेलिंग गलत होने पर दावा निरस्त कर दिया जाता है, जबकि साइबर ठग पूरी व्यवस्था को धता बताते हुए किसी दूसरे के अकाउंट से पैसा लूट ले जाते हैं। मौजूदा व्यवस्था में आफलाइन सुविधा समय की मांग है, नहीं तो कर्मचारी ठगे जाते रहेंगे। -रामप्रकाश राय, कार्यालय सचिव सेंट्रल आफ इंडियन ट्रेन यूनियन

-जब से ईपीएफओ को आनलाइन सिस्टम शुरू हुआ है, पीएफ घोटालों की बाढ़ आई हुई है। सरकार विभागों को मल्टीनेशनल कंपनियों की तरह देख रही है, जबकि यहां कम पढ़े लिखे कर्मचारी लाखों की संख्या में हैं। जब तक सरकार इसका इंतजाम नहीं कर लेती तब तक आफलाइन सुविधा को बहाल किया जाए। -असित कुमार सिंह, सचिव आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस  

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