महोबा प्रकरण : ईडी के अफसर बंद कमरे में 12 घंटे में तीन लोगों से कर रहे बात

महोबा प्रकरण उल्लेखनीय है कि दिवंगत क्रशर कारोबारी इंद्रकांत ने सात सितंबर को तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार और कबरई के तत्कालीन एसओ देवेंद्र शुक्ला पर वसूली का आरोप लगाते हुए अपनी जान को खतरा बताते हुए आडियो वीडियो वायरल किया था

Akash DwivediSat, 24 Jul 2021 09:05 PM (IST)
फरार आइपीएस पर एक लाख का इनाम घोषित है

महोबा, जेएनएन। कबरई के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत मौत प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मुख्य गवाह के साथ ही मामले जुड़े दिवंगत के करीबियों से लंबी पूछताछ कर रहा है। बयान देकर वापस लौटे लोगों के मुताबिक, बंद कमरे में एक व्यक्ति से चार-चार घंटे तक सवाल-जवाब हो रहे हैं। एक दिन में 12 घंटे तक लगातार पूछताछ में तीन से चार लोग बयान दर्ज कराते हैं। अधिकारी एक बयान को कई बार दोहरा कर पूछते हैं। साथ ही पूर्व में दर्ज कराए गए बयान से मिलान भी करा रहे हैं।

बयान दर्ज कराकर लौटे दिवंगत इंद्रकांत के भाई रविकांत त्रिपाठी व कारोबारी पार्टनर रहे बालकिशोर द्विवेदी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की जांच का उद्देश्य इंद्रकांत प्रकरण के मुख्य आरोपित आइपीएस मणिलाल पाटीदार की ओर से महोबा में तैनाती के दौरान व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों व उद्यमियों से अवैध तरीके से उगाही कर एकत्र की गई संपत्तियों की जांच करना है। सुबह 11 बजे से पूछताछ व कलम बंद बयान दर्ज कराने का सिलसिला रात तक चलता है। इस दौरान चाय आदि के लिए समय भी दिया गया। ईडी के सहायक निदेशक गुंजन कुमार झा के अनुसार, इंद्रकांत मामले में किसी भी प्रकार से जुड़े रहे लोगों व एसआइटी को बयान दर्ज कराने वालों से भी पूछताछ की जा रही है। मामले की जांच कर रहे प्रयागराज के एसपी क्राइम आशुतोष मिश्र ने बताया कि पूर्व में पकड़े जा चुके और जेल में बंद चारों आरोपितों बर्खास्त एसओ देवेंद्र शुक्ला, बर्खास्त सिपाही अरुण यादव, आरोपित कारोबारी सुरेश सोनी व ब्रह्मदत्त के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। फरार आइपीएस पर एक लाख का इनाम घोषित है।

उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। आरोपित के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई हो चुकी है। आरोपित मुख्य रूप से राजस्थान के जिला डूंगरपुर के थाना सरौंदा अंतर्गत गांव संगवारा का निवासी है। उल्लेखनीय है कि दिवंगत क्रशर कारोबारी इंद्रकांत ने सात सितंबर को तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार और कबरई के तत्कालीन एसओ देवेंद्र शुक्ला पर वसूली का आरोप लगाते हुए अपनी जान को खतरा बताते हुए आडियो, वीडियो वायरल किया था। दूसरे दिन आठ सितंबर को गोली लगने से वह अपनी गाड़ी में घायल मिले थे। 13 सितंबर को कानपुर स्थित अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। उनके भाई रविकांत त्रिपाठी ने मुकदमा दर्ज कराया था।

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