Dussehra Special: चंद लोगों के प्रयत्न से शुरू हुई कानपुर की इस रामलीला ने लिया भव्य रूप, बड़ी दिलचस्प है कहानी

Dussehra Special Story कानपुर दक्षिण क्षेत्र की सबसे पुराने रामलीला मंचन की अगर बात हो तो बारादेवी में जूही थाने के सामने जंगलेश्वर रामलीला कमेटी का नाम सबसे पहले आता है। लंबे समय से यहां रामलीला का मंचन हो रहा है।

Shaswat GuptaFri, 15 Oct 2021 02:31 PM (IST)
साकेत नगर नव युवक मंडल के द्वारा आयोजित रामलीला में मंचन करते कलाकार।

कानपुर, [जागरण स्पेशल]। Dussehra Special Story साकेत नगर के मनकामनेश्वर मंदिर पार्क में इस बार रामलीला का 44वां आयोजन हो रहा है। इस रामलीला के मंचन की शुरूआत जंगलेश्वर रामलीला कमेटी के भरत मिलाप के आयोजन से हुई थी। इस आयोजन से प्रेरणा लेकर यहां रहने वाले तीन लोगों ने साकेत नवयुवक मंडल बनाया और लीला का मंचन शुरू कराया था। संस्थापक सदस्यों की मेहनत रंग लायी। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया। इलाकाई लोगों ने छोटे स्तर पर शुरू हुई इस लीला को आज भव्य रूप तक पहुंचाया है।

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कानपुर दक्षिण क्षेत्र की सबसे पुराने रामलीला मंचन की अगर बात हो तो बारादेवी में जूही थाने के सामने जंगलेश्वर रामलीला कमेटी का नाम सबसे पहले आता है। लंबे समय से यहां रामलीला का मंचन हो रहा है। साकेत नगर के मनकामनेश्वर मंदिर पार्क में जंगलेश्वर रामलीला कमेटी के भरत मिलाप का आयोजन होता था। जिसे देखने के लिए साकेत नगर व आसपास के लोगों की भीड़ जुटती थी। इससे प्रेरित होकर स्व. अतुल शुक्ला, स्व. गिरीश चंद्र शुक्ला और वेदरत्न त्रिपाठी ने यहां रामलीला मंचन कराने का निर्णय किया था। वर्ष 1977 में साकेत नवयुवक मंडल बनाया गया और रामलीला का आयोजन शुरू हुआ। यहां की रामलीला का भरत मिलाप जूही गौशाला साईं मंदिर के पास पार्क में होता है। शुरूआत से अभी तक जूही लाल कालोनी निवासी तेज नारायण शुक्ला मंडलाधीश का कार्य देख रहे हैं। उनके निर्देशन में लीला का मंचन होता है। कलाकार बदल जाते हैं, लेकिन मंडलाधीश आज भी वही हैं।

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ब्राह्मण स्वरूप में तैयार किया जाता रावण का पुतला: दिल्ली आनंद विहार निवासी प्रकाश बोरवणकर वर्ष 1989 से यहां रावण, मेघनाद का पुतला बना रहे हैं। वह दिल्ली के आनंद विहार रेलवे आफीसर्स क्लब के मैनेजर हैं। प्रकाश बोरवणकर बताते हैं। कई जगहों पर उन्होंने देखा था कि रावण के सिर पर गधे का सिर लगाया जाता है। पुतला दहन होते ही लोग पुतले पर पत्थर मारते थे। उनका कहना था कि रावण विद्वान था। इस लिए वह हमेशा रावण का पुतला ब्राह्मण स्वरूप का ही तैयार करते हैं। अन्य रामलीला के आयोजनों से अलग पुतला रहता है।

कोरोना से बचाव का संदेश देगा रावण का पुतला: प्रकाश बोरवणकर ने बताया कि वह इस बार कोरोना के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए रावण के मुख्य मुंख को छोड़ कर अन्य में मास्क भी पहनाएंगे। इस बार 65 फीट का रावण और 40 फीट का मेघनाद का पुतला तैयार कर रहे हैं। मास्क में रावण का पुतला इस बार आकर्षण का केंद्र रहेगा।

इनकी भी सुनिए: 

रामलीला मंचन एक धार्मिक आयोजन है। साकेत नवयुवक मंडल की ओर से आज तक कभी भी मंच पर फिल्मी गीतों पर डांस और फूहड़ता कभी नहीं हुई है। शहर की सबसे पुरानी परेड की रामलीला को आदर्श मानकर लीला के मंचन को आगे बढ़ाने के प्रयास कमेटी सदस्यों की मदद से लगातार किए जा रहे हैं। - वेद रत्न त्रिपाठी, संजोयक संयोजक के दिशा निर्देश पर ही परंपरानुसार लीला के मंचन का आयोजन कराया जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष वेद रत्न त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल में छह भागवत कथाएं, 11 लीलाओं का यहां सफल मंचन कराया है। लीला के नवीनीकरण करके उसे आगे बढ़ाने में उनका योगदान सराहनीय है। - आलोक मिश्रा, अध्यक्ष रामलीला के मंचन के साथ ही यहां आतिशबाजी का भी आयोजन किया जाता है। हर बार उन्नाव के आतिशबाज यहां आकर आकाशीय आतिबाजी करके करतब दिखाते हैं। इस बार के आयोजन में आतिशबाजी में आकाशीय गोला धमाके के साथ फटेगा और लोगों को जय श्री राम लिखा नजर आयेगा - हिमांशु मिश्रा, महामंत्री रामलीला मंचन के साथ यहां पार्क में मेला भी लगता है। पार्क के बाहर बच्चों के खिलौनों की दुकानें और खाने पीने के सामान की दुकानें लगती हैं। इस बार रामलीला मैदान में ही झूले भी लगाये गये हैं। यहां लगाये गये पांच झूलों में ड्रैगन ट्रेन मुख्य आकर्षण हैं। - शुभम मिश्रा, मंत्री

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