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दूसरी लहर से बचाव के लिए तीन ही सूत्र हैं- टीकाकरण, मास्क और भीड़-भाड़ से दूरी बनाए रखना

हम कोरोना संक्रमण से बेहतर ढंग से लड़ पाएंगे।

दूसरी लहर से सबक लेकर इस बार हमें संपर्क दर कम रखनी होगी। यानी जब कोरोना के मरीजों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगेगी तो भी मिलने-जुलने सामाजिक कार्यक्रमों और भीड़-भाड़ से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।

Sanjay PokhriyalMon, 10 May 2021 04:55 PM (IST)

प्रो. मणींद्र अग्रवाल। महामारी के आकलन के लिए दुनियाभर में जो मॉडल (मैथड) अधिकृत हैं, उसके आधार पर हम एक सप्ताह की स्थिति का सटीक आकलन कर सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि का अनुमान लगाना थोड़ा मुश्किल है। फिर भी ग्राफ का जो ट्रेंड चल रहा है, उसके आधार पर यह माना जा रहा है कि दूसरी लहर जून-जुलाई तक चलेगी। इसके एक या दो महीने के अंतर पर तीसरी लहर आ सकती है। यानी अगस्त- सितंबर 2021। अभी से लगभग तीन से चार महीने बाद।

वैक्सीन की उपलब्धता की वजह से अगले तीन-चार महीने में 18 साल से ऊपर के लोग टीकाकरण करवा चुके होंगे। ऐसे में 18 साल से कम उम्र के बच्चे ही बचेंगे, जिन पर वायरस हमला कर सकता है। अब जब आंकड़े और आकलन हमारे सामने हैं, तो उस आधार पर हमारी तैयारी होनी चाहिए। हमने दूसरी लहर आने की सूचना सार्वजनिक की थी, लेकिन उसका आकलन सटीक नहीं रहा। हमने अप्रैल माह में एक लाख मरीजों का आकलन किया था, मगर यह पीक मई माह में आया और मरीजों की संख्या पांच लाख तक पहुंच गई। इससे सबक लेते हुए हमें तैयारियां करनी चाहिए। दरअसल, हम वायरस के प्रसार की भविष्यवाणी करने के लिए एक गणितीय मॉडल पर काम कर रहे हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक गणितीय मॉडल केवल कुछ निश्चितता के साथ भविष्यवाणी कर सकता है जब तक कि वायरस की गतिशीलता और इसकी संप्रेषणीयता समय के साथ पर्याप्त रूप से न बदल जाए। गणितीय मॉडल गैर-दवा हस्तक्षेप जैसे विभिन्न नीतिगत निर्णयों के अनुरूप वैकल्पिक परिदृश्यों की भविष्यवाणी करने के लिए एक तंत्र भी प्रदान कर सकते हैं।

कोविड-19 के मामले में, यह स्पष्ट है कि वायरस की प्रकृति बहुत तेजी से बदल रही है। ऐसे संदर्भ में, किसी भी भविष्यवाणी को लगातार पढ़ा जाना चाहिए। कभी-कभी तो यह रोज ही अपना ट्रेंड (चाल) बदल देता है, ऐसे में हर दिन इन डाटा का विश्लेषण किया जाना चाहिए और आगे की रणनीति तय करना चाहिए। जैसे मुंबई ने अभी भी खास तौर पर बच्चों के लिए आईसीयू बेड तैयार करना शुरू कर दिया है। मैं इससे आगे की बात कहना चाहूंगा। बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे वैक्सीन का ट्रायल अंतिम दौर में है। हमें यह कोशिश करना चाहिए कि जल्द से जल्द इसे भारत में लाया जाए और बच्चों का भी टीकाकरण शुरू किया जाए। भारत में 46.9 फीसद आबादी यदि 25 साल से कम उम्र की है, तो इसका बड़ा हिस्सा 18 साल से कम उम्र का है। जब यह आबादी सुरक्षित हो जाएगी तो हम कोरोना संक्रमण से बेहतर ढंग से लड़ पाएंगे।

तीसरी लहर की गति को मात देने के लिए दूसरी लहर को बारीकी से समझना होगा। कांटैक्ट रेट का पैमाना यह नापता है कि एक संक्रमित व्यक्ति एक दिन में कितने और लोगो को संक्रमित कर रहा है। जनवरी 2021 के बाद जब कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम हुआ तो लोग एक दूसरे से तेजी से मिलने लगे। यह पैरामीटर बताता है कि देश में जब पहली पीक आई थी तब इसकी वैल्यू काफी कम थी, तब एक संक्रमित व्यक्ति सात दिन में एक व्यक्ति को संक्रमित कर रहा था, लेकिन दूसरी लहर में एक संक्रमित व्यक्ति 3 दिन से कम में एक और व्यक्ति को संक्रमित कर रहा है।

हमारे पास अभी संक्रमण रोकने का कोई तरीका नहीं है। हम आंकड़ों से एक मॉडल तैयार कर रहे हैं और इसके आधार पर ही तेजी से रूप बदलते कोरोना वायरस की चाल को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में टीकाकरण में तेजी लाकर ही इसकी गंभीरता और इससे होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। फिलहाल इसके बचाव के लिए तीन ही सूत्र हैं- टीकाकरण, मास्क और सभी तरह के भीड़ वाले आयोजनों से बचें।

आइआइटी, कानपुर (कोरोना की लहर का आकलन कर रहे दल के सदस्य)

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