Dengue in UP: कानपुर में बेकाबू होते जा रहे हालात, एक ही थाने के पांच पुलिसकर्मियाें को हुआ डेंगू

Dengue in Kanpur वायरल बुखार के बाद अब कानपुर शहर में डेंगू से हालात और भी भयावह होते जा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से अलर्ट है। वहीं कानपुर के बिधनू में पांच पुलिसकर्मियों के संक्रमित होने की खबरें हैं।

Shaswat GuptaThu, 09 Sep 2021 04:42 PM (IST)
कानपुर में डेंगू की खबर से संबंधित प्रतीकात्मक फोटो।

कानपुर, जेएनएन। Dengue in Kanpur वायरल बुखार, डेंगू जैसे लक्षण, उल्टी-दस्त और वायरल निमोनिया की चपेट में आकर 24 घंटे में छह मरीजों ने दम तोड़ दिया। नारामऊ के नर्सिंगहोम में कुरसौली गांव की 19 वर्षीय युवती की मंगलवार सुबह मौत हो गई। सोमवार दोपहर से मंगलवार दोपहर एक बजे सुबह तक एलएलआर अस्पताल (हैलट) में पांच मरीजों की मौत हुई है। इनमें जिले के चार और बांदा का एक पीडि़त है। उधर, स्वास्थ्य विभाग ने अब तक डेंगू से शहर में 16 की मौत और 61 सक्रिय केसों की पुष्टि की है।   

पहली मौत: कल्याणुपर के कुरसौली गांव निवासी राकेश गौतम की पुत्री सोनाली कई दिनों से बुखार से पीडि़त थे। वह चार दिन से नारामऊ के रक्षा हास्पिटल में भर्ती थी। मंगलवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। सोनाली के चाचा बब्बन ने बताया कि हास्पिटल के डाक्टर ने जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि हुई थी। गांव में डेंगू से यह दूसरे मरीज की मौत है। पहले मरीज की कानपुर सिटी हास्पिटल में मौत हुई थी। फिर भी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े में डेंगू से एक भी मौत दर्ज नहीं है। 

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दूसरी मौत: एलएलआर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भीतरगांव निवासी 70 वर्षीय श्याम करण वायरल संक्रमण होने पर भर्ती किए गए। उन्हें तेज बुखार, उल्टी-दस्त और सांस लेने में तकलीफ थी। इलाज के दौरान सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। 

तीसरी मौत: शक्कर मिल खलवा निवासी 45 वर्षीय सोमवती को वायरल बुखार एवं सांस लेने में दिक्कत पर स्वजन लेकर आए थे। एलएलआर की इमरजेंसी में इलाज के दौरान उन्होंने सोमवार को दम तोड़ दिया। 

चौथी मौत: योगेंद्र विहार, नौबस्ता के 52 वर्षीय रामलाल को कई दिनों से बुखार था। पहले घर के पास डाक्टर को दिखाते रहे। जांच में प्लेटलेट्स कम आने और कमजोरी अधिक होने पर स्वजन उन्हें एलएलआर इमरजेंसी लेकर आए। उनमें डेंगू जैसे लक्षण थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 

पांचवा मामला: गंगापुर पनकी निवासी 35 वर्षीय कमलेश सोनी को कई दिनों से बुखार था। संक्रमण बढऩे से सेप्टीसीमिया हो गया था। सोमवार देर रात उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। 

छठी मौत: बांदा निवासी 55 वर्षीय प्रताप को उल्टी-दस्त के साथ कई दिनों से बुखार आ रहा था। पहले बांदा के निजी अस्पताल में भर्ती रहे। हालत बिगडऩे पर एलएलआर इमरजेंसी लाए गए। मल्टी आर्गेन फेल होने से उनकी जान चली गई। 

तीन दर्जन क्षेत्रों में की गई फागिंग: डेगू,मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए दूसरे दिन भी तीन दर्जन मोहल्लों में फागिंग की गई। सरसैया घाट , नयागंज, मिश्री बाजार, काली बाडी हरजेंद्रनगर, गुलियाना सब्जीमंडी, राखी मंडी, अफीम कोठी, साकेतनगर, सहदुल्लापुर, शिव नगर मसवानपुर, पनकी कला, रेलवे पटरी सर्वोदयनगर, नयापुरवा, आर्यनगर, तिलकनगर, कृष्णा कंपाउंड भन्नानापुरवा, फजलगंज रेलवे लाइन मलिन बस्ती, जरौली गांव मलिन बस्ती एवं मनोहर बिहार मलिन बस्ती के पास के आस-पास के क्षेत्रों में सफाई के साथ ही फाबिंग कराई गई। 19 बड़ी फागिंग मशीन और 61 छोटी फागिंग मशीन के माध्यम से दवा का छिड़काव किया गया। 

डेंगू की चपेट में पांच पुलिसकर्मी : बिधनू क्षेत्र की बात करें तो यहां सात लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें बिधनू थाने की दो महिला सिपाही समेत पांच पुलिसकर्मी हैं व दो अन्य हैं। उनकी एंटीजन किट से जांच कराई गई थी। डेंगू के कहर को देखते हुए पुलिसकर्मियों से लेकर आमजन दहशत में हैं। 

महिला सिपाही रंजना, दीपा के साथ सिपाही अजय कुमार, नरेंद्र सिंह एवं दीपेंद्र सिंह को एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। सभी ने निजी लैब में एंटीजन जांच कराई, जिसमे डेंगू की पुष्टि हुई है। डेंगू की पुष्टि होने पर पांचों लोगों को नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया। वहीं, थाने के सिपाही सचिन, सुमित सिंह, नीलेश सिंह को भी बुखार आ रहा है। इसके अलावा बिधनू कस्बे के ब्रजेन्द्र व हितेंद्र की भी रिपोर्ट पाजिटिव आई है। स्वजन ने दोनों को नौबस्ता स्थित नर्सिंगहोम में भर्ती कराया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा. एसपी यादव ने बताया कि थाने एवं कस्बे के डेंगू के मरीज मिलने की जानकारी नहीं है। मेडिकल टीम भेजकर जांच कराएंगे, उनकी मलेरिया की भी स्लाइड बनवाई जाएगी। 

इनका ये है कहना: 

वायरल संक्रमण के मरीज गंभीर स्थिति में आ रहे हैं। उनमें डेंगू जैसे लक्षण व प्लेटलेट्स काउंट भी कम मिल रहे हैं। निजी अस्पतालों से रेफर होकर विलंब से आने वाले मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो रहा है।  - प्रो. रिचा गिरि, उप प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष, मेडिसिन, जीएसवीएम मेडिकल कालेज 

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