देश काे समर्पित हुईं सात रक्षा कंपनियां, पीएम मोदी ने इस शुरुआत को बताया संकल्प यात्रा का आगाज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आजादी के बाद ही आयुध निर्मा‌णियों का अपग्रेडेशन करने की जरूरत थी लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। विश्व युद्ध के दौरान देश की आयुध निर्माणियों ने अपनी उपयोगिता साबित की थी लेकिन बाद में देश विदेशों पर निर्भर होता गया।

Shaswat GuptaFri, 15 Oct 2021 06:44 PM (IST)
रक्षा कंपनियों का उद्घाटन में मौजूद लोग।

कानपुर, जेएनएन। सातों रक्षा कंपनियों को खुला आसमान दिया गया है। इनोवेशन और अनुसंधान के बल पर अब उन्हें वैश्विक ब्रांड बनना होगा। इसके लिए नई सोच और नए लोगों को अवसर देने की जरूरत है। शुक्रवार को सात रक्षा कंपनियों के उद्घाटन अवसर पर कार्यक्रम से वर्चुअल रूप से जुड़े प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि वैश्विक सैन्य ताकत बनने में इन कंपनियों की महत्पूर्ण भूमिका है। रक्षा कंपनियों की शुरुआत संकल्प यात्रा का आगाज है। आजादी के बाद ही आयुध निर्मा‌णियों का अपग्रेडेशन करने की जरूरत थी लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। विश्व युद्घ के दौरान देश की आयुध निर्माणियों ने अपनी उपयोगिता साबित की थी लेकिन बाद में देश विदेशों पर निर्भर होता गया। उन्होंने कहा आत्मनिर्भर भारत के लिए दस पंद्रह साल पहले यह निर्णय हो जाना चाहिए था। सरकार ने मेक इन इंडिया के तहत रक्षा क्षेत्र में बदलाव शुरू किया है। सरकार और निजी सेक्टर मिलकर काम करेंगे।यूपी और तमिलनाडु डिफेंस कारिडोर इसके उदाहरण हैं। पांच साल में डिफेंस एक्सपो सवा तीन सौ फीसद बढ़ा है। सौ से ज्यादा उत्पादों के आयात बंद हो गए हैं। निर्माणी के कर्मचारी-अफसर मिलकर कंपनियों को नई दिशा देंगे। सभी कंपनियों को सौ फीसदी आजादी दी गई है। स्टार्टअप, इनोवेशन से आगे बढेंगे।

एसएएफ में बनी जेवीपीसी का रक्षामंत्री ने किया पूजन देश भर की 41 आयुध निर्माणियों का विलय करके बनाई गई सात रक्षा कंपनियों का आधिकारिक उद्घाटन शुक्रवार को विजयदशमी के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शस्त्र पूजन किया। इसमें कानपुर के लघु शस्त्र निर्माणी (एसएएफ) में बनी ज्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कारबाइन (जेवीपीसी) समेत अन्य रक्षा उत्पादों का पूजन रक्षामंत्री ने किया।जेवीपीसी पर जैसे ही रक्षामंत्री ने पुष्प अर्पित किए, एसएएफ का कार्यक्रम स्थल करतल ध्वनि से गूंज उठा। ओपीएफ में आयोजित समारोह में ग्लाइडर्स ‌इ‌ंडिया लिमिटेड की वेबसाइट भी लांच की गई। जीटी रोड स्थित ट्रूप कंफर्ट के मुख्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि देश की सात रक्षा कंपनियों में तीन के मुख्यालय कानपुर में हैं यह गर्व की बात है। ट्रूफ कंफर्टस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एसके सिन्हा ने कंपनी की वेबसाइट और अंजू सिन्हा ने लोगो का अनावरण किया।फील्ड गन फैक्ट्री में आयोजित कार्यक्रम में मंडलायुक्त डा. राज शेखर, आयकर आयुक्त विजय चड्ढा, फील्ड गन के प्रभारी अधिकारी आरके सागर उपस्थित रहे। ओईएफ में आयोजित कार्यक्रम में महाप्रबंधक बी उदय कुमार ने कहा कि हम स्वायत्ता और गुणवत्ता पूर्ण दक्षता के साथ रक्षा उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।अपर महाप्रबंधक वीके चौधरी, एमसी बालासुब्रमण्यम, आयशा खान उपस्थित रहीं।ओपीएफ में ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वीके तिवारी ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश में उन्नत उत्पादन प्रणाली अपनाना बेहद जरूरी है।इस दिशा में प्रभावी कार्य योजना के साथ निर्बाध गति से कार्य किया जाएगा।इस अवसर पर सुशील सिन्हा, निदेशक एचआर एवं आपेरशन सुनील दाते, सुरेंद्र धापोड़कर, एनए मेश्राम, ग्रुप कैप्टन विवेक दुबे उपस्थित रहे। 

2024 तक एक लाख 75 हजार करोड़ का उत्पादन लक्ष्य: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कर्मचारियों के सभी हित सुरक्षित रहेंगे। कर्मचारी दो साल तक प्रतिनियुक्ति पर रहेंगे।पहली बार रक्षा एक्सपोर्ट में नया कीर्तिमान बनाया।वर्ष 2024 तक 1.75 लाख करोड़ उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।इसमें 35 हज़ार करोड़ का निर्यात भी शामिल होगा।आयुध निर्माणी बोर्ड का स्वरूप बदल चुका है।इनका दो सौ साल का इतिहास है।आयुध निर्माणियां उत्पादन से अब मुनाफा कमाने वाली इकाई बनाई जाएंगी।इन्हें कंपनी बनाने का निर्णय हर पहलू को ध्यान में रखकर और तमाम रिपोर्टों के बाद किया गया है।सेना ने गुणवत्ता और आपूर्ति में देरी पर चिंता जतायी थी।यही कारण है कि इनोवेशन, नई विकास क्षमता के लिए इन्हें  बदलने का निर्णय लिया गया।उत्पाद आधुनिक और गुणवत्ता पूर्ण होंगे तो निर्यात बढ़ेगा और नए बाजार मिलेंगे।उन्होंने रक्षा कंपनियों को सेना पर निर्भरता कम करने की बात भी कही।कर्मचारियों के हित पर रक्षामंत्री बोले, कर्मचारी फेडरेशन ने नौकरी को लेकर चिंता जाहिर की थी।उनके हितों की रक्षा के लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।कंपनियों को 65 हजार करोड़ का उत्पादन लक्ष्य दिया गया है।

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