कानपुर में Crime Branch ने पकड़ा International Call Center, आरोपित होम लोन के नाम पर दो लाख अमेरिकन को ठग चुके

सटीक जानकारी पर क्राइम ब्रांच ने छापेमारी कर मकान के ग्राउंड फ्लोर में चले इस इंटरनेशनल काल सेंटर को पकड़ा। मौके से दो आरोपित टीम के हत्थे चढ़े। जिनके नाम नौबस्ता हंसपुरम निवासी रवि शुक्ला और आवास विकास हंसपुरम नौबस्ता निवासी विशाल सिंह हैं।

Akash DwivediFri, 30 Jul 2021 01:32 PM (IST)
पिछले छह माह से यहां संचालित हो रहे थे International Call Center

कानपुर, जेएनएन। क्राइम ब्रांच ने गुरूवार देर रात कानपुर के नौबस्ता स्थित हंसपुरम में छापेमारी कर इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। ये लोग पर्सनल लोन, होम लोन दिलाने के नाम पर अमेरिका के लोगों से ठगी करते थे। घटनास्थल से लेपटॉप व हार्ड डिस्क और कई गैजेट बरामद हुए है, जिसने लाखों अमेरिकियों का डाटा मिला है। बताया जा रहा है से पिछले छह माह से यहां संचालित हो रहे थे।

सटीक जानकारी पर क्राइम ब्रांच ने छापेमारी कर मकान के ग्राउंड फ्लोर में चले इस इंटरनेशनल काल सेंटर को पकड़ा। मौके से दो आरोपित टीम के हत्थे चढ़े। जिनके नाम नौबस्ता हंसपुरम निवासी रवि शुक्ला और आवास विकास हंसपुरम नौबस्ता निवासी विशाल सिंह हैं।

ठगी के लिए कर रहे वीओआइपी का इस्तेमाल : आवास विकास हंसपुरम नौबस्ता में जिस मकान में यह इंटरनेशनल काल सेंटर संचालित हो रहा था वह विकास के मामा का है। यहां से वीओआइपी (वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल) के जरिए अमेरिकी नागरिकों को अमेरिकी कंपनी बनकर होम लोन व पर्सनल लोन कम ब्याज दर में देने का झांसा दिया जा रहा था, जिनके झांसे में कई दर्जन अमेरिकी आ भी गए।

अमेरिकी अंग्रेजी में बात करने में थे माहिर : अमेरिकी अंग्रेजी में बात करने में माहिर अभियुक्तों को चेजर कहा जाता है। यह चेजर लोगों से अमेरिकन लैंग्वेज में बात करते थे। जो इनके झांसे में आ गया उसे 200 डालर प्रोसेस फीस के रूप में ले लेते थे। इसके बाद उन्हेंं अमेरिकन कंपनियों के नाम पर तैयार फार्म भेज देते थे। जब लोग विश्वास में आ जाते तब इनसे लोन की चार पांच किस्ते एक साथ जमा करने पर ईएमआई पर जीरो ब्याज का झांसा देकर 500-600 डालर एक साथ जमा करा लेते।

बिटक्वाइन के रूप से लेते रुपये : यह सारी पेमेंट बिटक्वाइन के रूप में आती थी और इसे इंवेस्टमेंट एप के द्वारा खातों में सेव कर लिया जाता था। कई बार पेमेंट शापिंग कंपनियों के गिफ्ट कार्ड के रूप में भी खरीद कर ली जाती थी। गिफ्ट कार्ड इन कैश करने के लिए इन कंपनियों में कुछ पैसे देकर लोगों को भी सेट किया गया था। जब अमेरिकन लोगों को अपने साथ हुए फ्राड की जानकारी मिलती थी तो वह पलट कर फोन करते थे, लेकिन तब उनका नंबर ब्लाक आरोपित ब्लाक कर देते थे।

इन मदों में लेते थे पैसा : ठगी गैंग अमेरिकी लोगों से लोन प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 300 से 500 डालर, क्लोजिंग कास्ट के नाम पर लोन राशि का दो प्रतिशत, एडवांस रीपेमेंट के नाम पर 800 से 900 डालर, लोन के इंश्योरेंस के नाम पर फीस लेते थे। कई लोग जो सही रिस्पांस न देने पर काल करके लोन कैंसिल करवाते थे उनसे कैंसिलेशन के नाम पर फीस लेते थे।

ऐसे होता था पेमेंट : पेमेंट के लिए ठगी गैंग क्रिप्टोकरेंसी के कई एप का इस्तेमाल करके बिटक्वाइन के जरिये पैसे लेता था। इसके लिए क्रिप्टोकरेंसी के एप जिनमें क्वाइन स्विच एप, वजीर एक्स एप का इस्तेमाल हो रहा था। कई पेमेंट गिफ्ट कार्ड के रूप में भी लिए जाते थे। कुछ पेमेंट एकाउंट से वाया ट्रांसफर से भी लिया जाता था। नोएडा में बैठा एक और व्यक्ति इन सारे एप से आया पैसा इनके खाते में इन कैश करता था।

यह था काल करने का तरीका : अमेरिकी नागरिकों को काल करने के लिए वीओआइपी(वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल) का प्रयोग किया जाता था। इसके लिए टेक्स्ट नाऊ सोनोटेल का प्रयोग किया जाता था। साथ ही साफ्ट फोन डायलर का भी प्रयोग करते थे इसके दो एप थे जिसका इस्तेमाल किया करते थे पहला था एक्सटेन और दूसरा एक्सलाइफ एप था। इसके माध्यम से फोन करके बात की जाती थी।

काकादेव वाले काल सेंटर की जांच में सामने आया : नौबस्ता में चल रहा अंतरराष्ट्रीय काल सेंटर काकादेव में पकड़े गये काल सेंटर की जांच के दौरान सामने आया। जानकारी होते ही क्राइम ब्रांच ने त्वरित कारवाई करते हुए नौबस्ता क्षेत्र में कारवाई कर दी। पकड़े गये अभियुक्तों के पास से पांच हार्ड डिस्क, एक लैपटाप, 2 मोबाइल बरामद हुए। लैपटाप में दो लाख विदेशी लोगों का डाटा मिला है। साथ ही कई अमेरिकी लोन देने वाली कंपनियों के फार्म फारमेट भी सेव मिले हैं। 

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