मास्क हटाने के बाद आ रही कान व गले की नस में दर्द की शिकायत, डॉक्टर ने बताया पहनने का ये तरीका

महामारी की दस्तक के बाद इसके संक्रमण से बचाव का एकमात्र उपाए मास्क का इस्तेमाल बताया गया था। उसके बाद से मास्क की डिमांड दिनों दिन बढऩे लगी। जहां कई बड़ी-बड़ी कंपनियों ने मास्क बनाना शुरू कर दिया वहीं स्थानीय स्तर पर लोगों में मास्क बनाने की होड़ मच गई।

Akash DwivediFri, 25 Jun 2021 03:05 PM (IST)
मास्क में इलास्टिक की डोरी के इस्तेमाल में भी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा

कानपुर, जेएनएन। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क लगाना आदत में शामिल होने लगा है। हालांकि कोरोना से बचाव के लिए लगाए जाने वाला मास्क अब कान में दर्द देने लगा है। मास्क की इलास्टिक की डोरी का कान पर लगातार दबाव पडऩे से कान में दर्द, गले की नस में खिंचाव एवं सिर में दर्द की समस्या भी हो रही है। मास्क हटाने के बाद भी कान व गले की नस में दर्द बना रहता है। ऐसी शिकायतें लोग नाक कान गला (ईएनटी) विशेषज्ञों से करने लगे हैं। विशेषज्ञों की सलाह कि मास्क का इस्तेमाल करें तो गुणवत्ता का ध्यान जरूर रखें। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कुछ कंपनियां मास्क के फेब्रिक की ही डोरी बनाने लगी हैं।

कोरोना महामारी की दस्तक के बाद इसके संक्रमण से बचाव का एकमात्र उपाए मास्क का इस्तेमाल बताया गया था। उसके बाद से मास्क की डिमांड दिनों दिन बढऩे लगी। जहां कई बड़ी-बड़ी कंपनियों ने मास्क बनाना शुरू कर दिया, वहीं स्थानीय स्तर पर लोगों में मास्क बनाने की होड़ मच गई। इसमें गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। बेतरतीब साइज के मास्क बनाए जा रहे हैं। मास्क में इलास्टिक की डोरी के इस्तेमाल में भी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।

मेडिकल मास्क में बांधने की व्यवस्था : जीएसवीएम मेडिकल कालेज के ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. हरेंद्र कुमार बताते हैं कि मेडिकल मास्क में बांधने का प्रावधान है। इसमें चाहें सॢजकल मास्क हो या एन-95 मास्क। डाक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ डोरी से मास्क को बांध कर अपनी सुविधा अनुसार कसते हैं। ताकि संक्रमण अंदर न जाने पाए।

कान में डोरी लगाना नया फैशन : डा. हरेंद्र का मानना है कि कान में डोरी फंसाने वाले मास्क नए फैशन के हैं। कोरोना काल में तेजी से आए हैं। इसलिए मास्क लेते समय उसकी इलास्टिक जरूर चेक करें। अगर इलास्टिक डोरी टाइट और अच्छी क्वालिटी की नहीं है तो कतई न लें। ऐसी शिकायतें मिलने पर कई अच्छी कंपनियों ने मास्क के फैब्रिक की ही डोरी बनाना शुरू कर दिया है।

लालीपन एवं घाव की शिकायत : मेडिकल कालेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डा. डीपी शिवहरे का कहना है कि टाइट मास्क की वजह से कान के बगल में लालीपन हो रहा है। रगड़ से घाव और एलर्जी की समस्या हो रही है। मधुमेह पीडि़तों में यह समस्या धीरे-धीरे घाव में बदलने लगती है। इसलिए अच्छी क्वालिटी के मास्क का ही इस्तेमाल करें। इलास्टिक की डोरी से एलर्जी की समस्या के मरीज भी आ रहे हैं।

इसका रखें ख्याल

मास्क अच्छी क्वालिटी का इस्तेमाल करें। मास्क की डोरी अच्छी होनी चाहिए। रोज-रोज मास्क खरीदने से अच्छा घर पर बनाएं। सूती कपड़े के तीन परत के मास्क घर पर ही बनाएं। घर पर बने तीन मास्क इस्तेमाल में लाएं। इस्तेमाल के बाद नियमित गर्म पानी से धोएं। अच्छी तरह से सुखाने के बाद ही इस्तेमाल करें। गर्मी एवं उमस का समय है एक मास्क कई दिन न पहनें। फुटपाथ पर मिलने वाले मास्क के इस्तेमाल से परहेज करें। 

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