वाणिज्य कर ने पकड़ीं दो फर्जी कंपनियां, 1.18 करोड़ का आइटीसी क्लेम रोका

- कानपुर देहात के अकबरपुर और झींझक में अपने पते पर नहीं मिलीं कंपनियां - वाणिज्य क

JagranWed, 04 Aug 2021 02:02 AM (IST)
वाणिज्य कर ने पकड़ीं दो फर्जी कंपनियां, 1.18 करोड़ का आइटीसी क्लेम रोका

- कानपुर देहात के अकबरपुर और झींझक में अपने पते पर नहीं मिलीं कंपनियां

- वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड दो ने दोनों पर की कार्रवाई

जागरण संवाददाता, कानपुर : वाणिज्य कर विभाग ने कानपुर देहात के अकबरपुर और झींझक में दो फर्जी कंपनियां पकड़ी हैं। इनमें से एक का पंजीयन रद कर दिया गया है, जबकि केंद्रीय क्षेत्र में होने की वजह से दूसरी कंपनी का पंजीयन रद करने के लिए केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर (सीजीएसटी) विभाग से संस्तुति की गई है। इस बीच एक कंपनी ने 1.18 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) क्लेम किया था, जिसे ब्लाक कर दिया गया है।

वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड दो जोन वन बृजेश मिश्रा को डाटा एनालिसिस में कानपुर देहात की दो कंपनियां संदिग्ध मिलीं। इसमें एक अकबरपुर में थी और दूसरी झींझक में। अकबरपुर की कंपनी ने 25 फरवरी 2021 को ही अपना कार्य शुरू किया था। जून तक इस कंपनी ने 6.42 करोड़ रुपये के ई-वे बिल प्रदेश के अंदर व बाहर जेनरेट किए थे। यह कंपनी दिल्ली की चार फर्मों से माल मंगा रही थी और उप्र व उत्तराखंड में 19 जगह माल बेच रही थी। कंपनी के टैक्स की स्थिति देखी गई तो पाया गया कि उसने इतना कारोबार दिखाने के बाद भी कोई टैक्स जमा नहीं किया था, लेकिन 1.18 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट जरूर क्लेम किया था। इसे देखते हुए कंपनी के आफिस के लिए जांच टीम भेजी गई तो वहां कोई कंपनी नहीं मिली। जिसका मकान था उसने भी बताया कि किसी कंपनी को उसने जगह नहीं दी और कोई कारोबार भी कभी उनके मकान से नहीं हुआ। अधिकारियों ने पाया कि सिर्फ कागजों पर ही माल खरीदा व बेचा जा रहा था। एडीशनल कमिश्नर ग्रेड दो के मुताबिक कंपनी का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। उसकी क्लेम की गई आइटीसी भी ब्लाक कर दी गई है। इसके साथ ही जिन कंपनियों से माल खरीदने और बेचने की बात कही गई है, उनकी जांच हो रही है। जो कंपनियां दूसरे राज्य में हैं, उनके लिए वहां पत्र भेज दिया गया है। वहीं झींझक में एक अन्य कंपनी अभी जून में ही पंजीकृत हुई थी। इस कंपनी ने इतने कम समय में दो करोड़ के बिल जारी कर दिए थे। इसने इलेक्ट्रिक वस्तुओं का कारोबार पंजीयन में बताया था लेकिन वह और भी बहुत कुछ खरीद रही थी। इस कंपनी की जांच की गई तो मौके पर कुछ नहीं मिला। सिर्फ कागजों में खरीद बिक्री थी। कंपनी सीजीएसटी के अधीन आती है, इसलिए उन्हें पंजीयन निरस्त करने की संस्तुति कर दी गई है।

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