ऑक्सीजन लेकर जल्दी आओ, सांसें ऊपर नीचे हो रही हैं

ऑक्सीजन लेकर जल्दी आओ, सांसें ऊपर नीचे हो रही हैं

कोरोना संक्रमितों के तीमारदार आक्सीजन सिलिंडर के लिए लगा रहे हैं लाइन।

JagranFri, 23 Apr 2021 01:51 AM (IST)

जागरण संवाददाता, कानपुर : भाई साहब की हालत बिगड़ रही है। जल्दी से सिलिडर लेकर आओ। फोन पर इतनी बात सुनते ही सिलिडर के लिए लाइन में खड़े राजीव परेशान हो गए। पागलों जैसी स्थिति में वह प्लांट के अंदर गए। बोले, मरीज की जान चली जाएगी तब सिलिडर दोगे क्या? पीछे लाइन में लगे लोगों ने भी उनकी बात का समर्थन किया। इसके बाद अपने-अपने दर्द को लेकर सब फूट पड़े। ऑक्सीजन को लेकर मारामारी किस कदर है इसका अंदाजा ऑक्सीजन प्लांट के बाहर लगी भीड़ देखकर लगाया जा सकता है। लाइन में लगे लोग ऑक्सीजन की चिता के साथ मरीज की चिता में आधे हो रहे हैं। कहते हैं कि हम यहां लाइन में हैं और वहां मरीज की सांसे उपर नीचे हो रही है।

फजलगंज के बब्बर ऑक्सीजन प्लांट का यह वाकया अकेला नहीं है। शहर के दूसरे ऑक्सीजन प्लांट की भी यही स्थिति है। लाल बंगला के राजीव जायसवाल सुबह दस बजे घर से निकले थे। एक घंटे में फजलगंज स्थित प्लांट पहुंचे। प्लांट कर्मचारी ने ऑक्सीजन देने की बात तो कही लेकिन कब तक देंगे यह नहीं बताया। दोपहर करीब ढाई बजे राजीव को घर से फोन आया जिसके बाद वह परेशान हो गए। राजीव ने बताया बड़े भाई बीमार हैं। उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो गया है। घर पर आइसोलेट हैं। उन्हीं के लिए ऑक्सीजन लेने आएं है। शाम करीब पांच बजे उन्हें ऑक्सीजन सिलिडर मिला।

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जान बचाने की चिता है

लालबंगला के रामरतन भी सिलिडर के लिए सुबह आठ बजे से लाइन में लगे थे। उन्होंने बताया कि जाजमऊ में काम करते हैं। कंपनी मालिक के रिश्तेदार कोविड संक्रमित हैं और घर पर आइसोलेट हैं। उनका ऑक्सीजन लेवल काफी कम हो चुका है। जल्दी सिलिडर मिल जाए इसके लिए सुबह से ही आ गए। कंपनी से लगातार फोन आ रहे हैं। हमे भी चिता है कि जल्दी सिलिडर लेकर जाएं लेकिन यहां तो सिलिडर कब मिलेगा पता ही नहीं चल रहा है। कर्मचारी होने के नाते अपना काम तो कर ही रहा हूं इससे कहीं ज्यादा चिता इंसानियत के नाते किसी की जान बचाने की भी है।

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बूढ़े कंधे पर लादा सिलिडर और भरवाने चल पड़े

कोविड का इलाज, अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता के प्रशासन के दावों की हकीकत परखनी हो तो किसी अस्पताल के पास कुछ देर घूम लीजिए। मरियमपुर के पास दैनिक जागरण टीम ने एक बुजुर्ग को कंधे पर ऑक्सीजन सिलिडर ले जाते देखा तो उत्सुकतावश पूछ लिया। बाबा, कहां जा रहे हैं। झल्लाते हुए बुजुर्ग ने कहा दिख नहीं रहा है, सिलिडर भरवाने जा रहे हैं। बामुश्किल उन्होंने अपना नाम बताया। हमने फिर पूछा, कौन बीमार है? बोले, बेटा बीमार है। अस्पताल में भर्ती है, उसी के लिए सिलिडर लेने जा रहे है। कुछ और पूछते इससे पहले ही अनोखेलाल बोले, ज्यादा परेशान मत कीजिए। मैं पहले से ही बहुत परेशान हूं।

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