कन्नौज: लिपिक आत्महत्या मामले में ब्लाकों में तालाबंदी, बंद कराया विकास भवन, पीडी की गिरफ्तारी की मांग

सदर ब्लाक में तैनात लिपिक अशोक सविता ने तालग्राम स्थित सरकारी आवास में शुक्रवार को फंदा लगाकर जान दी थी। पास से सुसाइड नोट मिला था जिसमें जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक सुशील कुमार पर तीन माह से वेतन रोकना व प्रताडि़त करने का आरोप लगाया था।

Shaswat GuptaMon, 06 Dec 2021 03:40 PM (IST)
लिपिक आत्महत्या मामले में धरना देकर पीडी की गिरफ्तारी की मांग।

कन्नौज, जागरण संवाददाता। लिपिक आत्महत्या मामले में आरोपित जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक के खिलाफ कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। गिरफ्तारी की मांग को लेकर सभी ब्लाकों में तालाबंदी की गई। विकास भवन के सभी दफ्तर बंद कराकर मुख्य गेट पर धरना दिया गया। सभी विभागों के संघ ने समर्थन किया और नारेबाजी की।

सदर ब्लाक में तैनात रहे लिपिक अशोक सविता ने तालग्राम स्थित सरकारी आवास में शुक्रवार को फंदा लगाकर जान दे थी। पास से सुसाइड नोट मिला था, जिसमें जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक सुशील कुमार पर तीन माह से वेतन रोकना व प्रताडि़त करने का आरोप लगा जिम्मेदार ठहराते हुए आत्महत्या की बात लिखी थी। कर्मियों के धरना प्रदर्शन पर आरोपित सुशील पर मुकदमा दर्ज किया था। तब से सुशील फरार हैं। इधर, पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप है। इससे नाराज विकास विभाग के कर्मियों ने गिरफ्तारी की मांग को लेकर सोमवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल की। इसमें कई संघ ने समर्थन किया है। सभी विकास खंड पर तालाबंदी की गई। इसके बाद कर्मचारी अशोक की पत्नी सुमन देवी, बड़ा बेटा आशीष, छोटा बेटा रंजीत व बेटी निधि के साथ विकास भवन पहुंचे। वहां, सभी विभागों के दफ्तर बंद कराए और कर्मियों को एकजुट किया।

मुख्य गेट पर अशोक की पत्नी, बेटा व बेटी के साथ धरना दिया, जिसमें गई संघ शामिल हुए। पंचायत, विकास, कृषि, उद्यान, प्रोबेशन समेत अन्य विभाग के कर्मचारी रहे। पंचायत, विकास, मनरेगा के कर्मियों ने भी सुशील की कार्यशैली गलत बताई। सभी ने बेज्जत करना, अभद्रता करना व बेवजह निलंबित करना व वेतन रोकने की बात कही। कई कर्मचारी आज भी निलंबित हैं तो कई का वेतन रुका हुआ है। ग्राम विकास मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संजीव यादव ने बताया कि जब तक गिरफ्तरी नहीं होती धरना जारी रहेगा। काम भी ठप रहेंगे। गिरफ्तारी के साथ ही आश्रित को नौकरी व एक करोड़ रुपये सहायता राशि दी जाए। 

सीडीओ को किया वापस: विकास भवन में धरना करीब दोपहर एक बजे शुरू हुआ। इस दौरान विकास भवन में सीडीओ आरएन सिंह नहीं थे, जो करीब दो बजे डीएम की बैठक करने के बाद विकास भवन पहुंचे। इस बीच मुख्य गेट पर धरना दे रहे कर्मियों ने उनकी गाड़ी आते देखी तो कर्मियों ने घेर लिया और नारेबाजी करते हुए विकास भवन में घुसने नहीं दिया और वापस कर दिया।

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