प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे एक दूसरे को देंगे शह और मात, तीन अलग-अलग चरणों में तैयारी

एक दूसरे को शहर व मात देंगे। इसके लिए बीएसए ने पूरी कार्ययोजना खुद तैयार की है। प्राथमिक विद्यालय देव का पुरवा उच्च प्राथमिक विद्यालय ख्वाजीगीपुर समेत कई अन्य स्कूलों में शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने शतरंज का अभ्यास शुरू कर दिया

Akash DwivediWed, 08 Sep 2021 03:50 PM (IST)
मार्गदर्शन में बच्चों ने शतरंज का अभ्यास शुरू कर दिया

कानपुर, जेएनएन। कोरोना महामारी के चलते प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे पिछले करीब दो सालों से पढ़ाई से तो दूर हुए ही, संक्रमण के भय के चलते वह खेलकूद के मैदानों पर भी न जा सके। ऐसे में शासन के अफसरों ने माना, कि घर में बने रहने के चलते उनका उतना मानसिक विकास नहीं हो पाया, जितना स्कूलों में हो जाता था। ऐसे में जहां एक ओर स्कूल खुलने की उनकी पढ़ाई शुरू हो गई, वहीं अब वह इंडोर गेम में शतंरज खेलते नजर आएंगे और एक दूसरे को शहर व मात देंगे। इसके लिए बीएसए ने पूरी कार्ययोजना खुद तैयार की है। प्राथमिक विद्यालय देव का पुरवा, उच्च प्राथमिक विद्यालय ख्वाजीगीपुर समेत कई अन्य स्कूलों में शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने शतरंज का अभ्यास शुरू कर दिया है।

तीन अलग-अलग चरणों में कराने की तैयारी : बच्चों को शतरंज से पूरी तरह जोडऩे के लिए एक अहम चुनौती थी, कि यह खेल अन्य की अपेक्षा थोड़ा समझदारी भरा होता है। इसलिए बीएसए डा.पवन तिवारी ने इसके लिए तीन अलग-अलग चरण तैयार किए। पहले चरण में यह खेल खंडशिक्षाधिकारियों के बीच खेला जाएगा। इसके बाद स्कूलवार शिक्षकों का प्रतिभाग कराया जाएगा। फिर, खंड शिक्षाधिकारी व शिक्षक इस खेल को बच्चों को समझाएंगे। बीएसए ने कहा, जब तक बच्चे खेलकूद के मैदान से दूर हैं, तब तक वह शतरंज में हिस्सा लेंगे और उनका मानसिक विकास हो सकेगा। साथ ही, बच्चों की खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी। ऐसे में आगामी दिनों में उनके बीच शतरंज प्रतियोगिता भी कराई जा सकेगी।

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