कानपुर के संजीत अपहरण और हत्याकांड की जांच के लिए सीबीआइ टीम पहुंची बर्रा थाने

संजीत अपहरण और हत्याकांड को 16 माह बीत चुके हैं। शुक्रवार को सीबीआइ की दो सदस्यीय टीम शहर पहुंची यहां से टीम पहले पुलिस आयुक्त असीम अरुण से मिलने पहुंची। पुलिस आयुक्त ने सीबीआइ टीम को वाहन और फोर्स मुहैया कराई।

Abhishek AgnihotriFri, 22 Oct 2021 03:38 PM (IST)
कानपुर के बर्रा थाने पहुंची सीबीआइ की टीम।

कानपुर, जेएनएन। बर्रा के चर्चित लैब टेक्नीशियन संजीत यादव के अपहरण और हत्याकांड के मामले में सीबीआइ की टीम ने शहर पहुंचकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

संजीत का बीते 22 जून 2020 को नर्सिंगहोम से लौटने के दौरान बर्थडे पार्टी के बहाने साथियों ने अपहरण कर लिया था। रतनलाल नगर के किराए के मकान में बंधक बनाकर रखा था। जहां 26 जून की रात को हत्या करने के बाद शव बोरी में भरकर फत्तेपुर गोही स्थित लोहे वाले पुल से पांडु नदी में फेंक दिया था। मामले में पुलिस ने आठ आरोपितों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। सभी आरोपित जेल से छूट चुके हैं। बर्रा के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की गोरखपुर के होटल में हत्या के बाद अचानक संजीत हत्याकांड में सीबीआइ जांच शुरू हो गई।

संजीत अपहरण और हत्याकांड को 16 माह बीत चुके हैं। शुक्रवार को सीबीआइ की दो सदस्यीय टीम शहर पहुंची यहां से टीम पहले पुलिस आयुक्त असीम अरुण से मिलने पहुंची। पुलिस आयुक्त ने सीबीआइ टीम को वाहन और फोर्स मुहैया कराई। जिसके बाद दोपहर में टीम बर्रा थाने पहुंची। यहां थाना प्रभारी के कक्ष में बैठकर कार्रवाई शुरू की। इस दौरान थाना प्रभारी बाहरी बरामदे में थाने में आने वाले फरियादियों को सुनते रहे। पौन घंटे तक लैपटाप पर काम करने के बाद सीबीआइ टीम के डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी मुंशियाने पहुंचे। जहां उन्होंने ने मुंशियाने में बैठ कर संजीत अपहरण कांड के समय की जनरल डायरी (जीडी) खंगालनी शुरू की।

इन सवालों के ढूंढेगी जवाब:

- 16 माह बाद भी कहां है संजीत का शव और उसका बैग

- फिरौती वाले बैग में डाली गई रकम और मोबाइल कहां गया

- वारदात वाली रात संजीत के साथ आखिर क्या हुआ तो वह किसी से संपर्क नहीं कर सका

- आरोपितों ने शराब पिलाने की जानकारी दी थी, जबकि संजीत शराब नहीं पीता था

- वारदात वाली रात से 26 जून तक पुलिस ने संजीत को तलाशने के लिए क्या किया

- पुलिस से कहां चूक हुई कि आज तक बैग, शव और सिपाही का मोबाइल नहीं मिला

- जेल भेजे गये आरोपितों ने जो कहानी बताई उसमें कितनी सच्चाई है

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