संजीत हत्याकांड : सीबीआइ ने जुटाया सात टीमों का ब्योरा, रडार पर आए 35 पुलिस कर्मी

कानपुर में बर्रा के संजीत का अपहरण के बाद हत्या करने के मामले में सीबीआइ ने अपहर्ताओं को पकडऩे वाली पुलिस टीमों की लापरवाही पर बिंदुवार जांच के लिए ब्योरा खंगालना शुरू कर दिया है। इसमें टीमों में शामिल सभी 35 पुलिस कर्मी शामिल हैं।

Abhishek AgnihotriWed, 27 Oct 2021 08:58 AM (IST)
संजीत अपहरण और हत्याकांड में सीबीआई जांच कर रही है।

कानपुर, [आशीष पांडेय]। सीबीआइ ने संजीत अपहरण व हत्याकांड के राजफाश में लगाई गई सात टीमों का ब्योरा थाने से जुटाया है। वह अब सभी के मूवमेंट की बारीकी से जांच करेगी। सात टीमों में 35 पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया था, लेकिन कार्रवाई सिर्फ एक ही टीम पर होना यह भी सीबीआइ के गले नहीं उतर रहा है। 35 पुलिसकर्मियों की टीम होने के बाद भी अपहर्ता निकल गए और बैग भी नहीं मिला। इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई यह भी सीबीआइ की टीम तलाशेगी।

संजीत अपहरण और हत्याकांड में तत्कालीन डीआइजी दिनेश कुमार पी के निर्देश पर एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता ने सीओ गोविंद नगर रहे मनोज गुप्ता की अगुवाई में सात टीमें लगाई थीं। प्रत्येक टीम में पांच पुलिस कर्मी थे। पहली टीम को थाना प्रभारी रणजीत राय, दूसरी को चौकी प्रभारी जनता नगर राजेश कुमार, तीसरी टीम को अतिरिक्त चौकी प्रभारी जनता नगर योगेंद्र प्रताप, चौथी टीम को नौबस्ता में तैनात दारोगा अनिल तोमर, पांचवीं को नौबस्ता थाने की प्राइवेट टीम लीड कर रही थी। इतना पुलिस बल होने के बाद भी संजीत के पिता पिता ने फिरौती वाला बैग गिराया, जिसे अपहर्ता लेकर निकल गए और पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी रही। सीबीआइ की टीम ने राजफाश में लगी पुलिस टीमों का भी ब्योरा लिया है। माना जा रहा है कि टीम में शामिल सभी सदस्यों के मूवमेंट को चेक करने के बाद सभी के बयान दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई सिर्फ एक टीम पर : इतने बड़े मामले में दागी थाना प्रभारी पर कार्रवाई हुई यह सही है, पर अन्य टीमों के स्तर पर भी चूक हुई। फिर निलंबन की कार्रवाई सिर्फ एक टीम पर, यह बात सीबीआइ को भी खटक रही है। सीबीआइ अपने दर्ज मुकदमे में दोषी पुलिसकर्मियों की संख्या को बढ़ा सकती है।

अनुभवहीन सिपाही को भी किया था शामिल : राजफाश के लिए सात टीमों में एक में वर्ष 2019 बैच का एक सिपाही मनीष भी शामिल था, जिसे विभाग में आए अभी कुछ ही समय गुजरा था। उसे इतने बड़े मामले में लगाया जाना कहां से उचित था। जबकि अन्य टीमों में कई पुराने आरक्षी और मुख्य आरक्षी शामिल थे। जिन्होंने कई चर्चित मामलों के राजफाश भी किए थे।

बचाव की तैयारी में जुट गया दागी इंस्पेक्टर

संजीत अपहरण और हत्याकांड में निलंबित हुए दागी थाना प्रभारी रणजीत राय लंबे समय एसटीएफ में तैनात रहे हैं। अपहरण और हत्याकांड की कार्रवाई के बाद से वह खूब सुर्खियों में रहे। निलंबित होने के बाद उनके अपराधियों से कनेक्शन, जुआरियों और हिस्ट्रीशीटरों के साथ डीजे फ्लोर पर ठुमके लगाते हुए जैसे कई वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए थे।

सीबीआइ की दस्तक पर रणजीत राय फिर से सक्रिय हो गए हैं। वह निलंबित होने के बाद लंबे समय तक बहाली के लिए परेशान रहे। मौजूदा समय में वह कन्नौज में एसओजी प्रभारी हैं। मंगलवार शाम करीब साढ़े पांच बजे वह बर्रा थाने सादे कपड़ों में पहुंचे। थाना प्रभारी अजय कुमार सेठ से मिलकर उसने सीबीआइ के मूवमेंट की पूरी जानकारी जुटाई। काफी देर तक मुंशी से सीबीआइ के संबंध में जानकारी लेते रहे।

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