कानपुर में सीए के फोरेंसिक स्टैंडर्ड तैयार, राष्ट्रीय काउंसिल में लगेगी मुहर

फॉरेंसिक जांच करने वाले और कराने वाले दोनों को मालूम होगा

यह कमेटी 17 स्टैंडर्ड इस वर्ष के बीच पास करा चुका था और अब आखिरी आठ स्टैंडर्ड तैयार कर काउंसिल के सामने रखे जाएंगे। हर बार स्टैंडर्ड तैयार करने के बाद उन्हेंं जनता के सवालों के लिए पेश किया जाता है। इन्हेंं 32 विभागों को भी दिया जाता रहा है।

Akash DwivediFri, 07 May 2021 12:05 PM (IST)

कानपुर, जेएनएन। इंस्टीट््यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) की डिजिटल अकाउंटिंग एंड एश्योरेंस कमेटी ने आखिरकार एक वर्ष की मेहनत के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए फॉरेंसिक अकाउंटिंग एंड इनवेस्टिगेश्ंान स्टैंडर्ड तैयार कर लिए हैं। केंद्रीय परिषद की 17 व 18 मई को होने वाली बैठक में इन्हेंं रखा जाएगा। सेंट्रल काउंसिल की मुहर लगते ही चार्टर्ड अकाउंटेंट इसका इस्तेमाल फॉरेंसिक इनवेस्टिगेशन में करेंगे। अभी तक किसी भी वित्तीय अपराध में फॉरेंसिक जांच करने का कोई सेट मानक नहीं है।

इसकी वजह से जो संस्था जांच करवाती थी वह भी संतुष्ट नहीं हो पाती थी कि जांच सही हुई है या नहीं और जो सीए जांच करता था, उसे भी लगता था कि कहीं उसकी किसी गलती के लिए उसे दंडित ना कर दिया जाए। इन हालात को देखते हुए एक वर्ष पूर्व आइसीएआइ ने फॉरेंसिक अकाउंटिंग एंड इनवेस्टिगेशन स्टैंडर्ड तैयार करने की शुरुआत की। इसकी जिम्मेदारी संस्थान की डिजिटल अकाउंटिंग एंड एश्योरेंस कमेटी को दी गई थी। इन स्टैंडर्ड को तैयार करने के लिए देश के 60 चार्टर्ड अकाउंटेंट इस योजना से जुड़े। जो अपने स्तर से इस पर कार्य कर रहे थे। इसके अलावा एक कमेटी भी बनाई गई, जिसमें कानपुर, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु आदि जगहों से लोग शामिल थे। इनकी बैठक हर सप्ताह होती थी।

यह कमेटी 17 स्टैंडर्ड इस वर्ष के बीच पास करा चुका था और अब आखिरी आठ स्टैंडर्ड तैयार कर काउंसिल के सामने रखे जाएंगे। हर बार स्टैंडर्ड तैयार करने के बाद उन्हेंं जनता के सवालों के लिए पेश किया जाता है। इन्हेंं 32 विभागों को भी दिया जाता रहा है। इनके सुझावों को उनमें शामिल करने के बाद उन्हेंं फाइल किया गया।

डिजिटल अकाउंटिंग एंड एश्योरेंस बोर्ड के चेयरमैन मनु अग्रवाल ने बताया कि काउंसिल में पास होने के बाद शुरुआत में यह वैकल्पिक होगा लेकिन भविष्य में इसे अनिवार्य किया जाएगा। सभी सीए को इन्हीं मानकों पर चलते हुए कोई भी जांच करनी होगी। इससे फॉरेंसिक जांच करने वाले और कराने वाले दोनों को मालूम होगा। जिसने जांच करवाई है, उसे मालूम होगा कि जांच सही हुई है। इसके अलावा जिस सीए ने जांच की है, उसे भी मालूम होगा कि उसने नियमों के तहत जांच की है, इसलिए उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।

 

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