कानपुर के सराफा कारोबारियाें के सामने पुराना स्टाक बेचने का खड़ा हुआ संकट, राज्यपाल से करेंगे मुलाकात

आल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय संयोजक पंकज अरोड़ा के मुताबिक बुधवार यानी 16 जून से हालमार्क को अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है लेकिन अभी तक कारोबारियों के सामने तस्वीर साफ नहीं है कि वे 16 तारीख को किस तरह का जेवर बेचेंगे।

Shaswat GuptaMon, 14 Jun 2021 04:20 PM (IST)
18 कैरेट से जरा सा भी शुद्धता कम होने पर उसे 14 कैरेट में माना जाएगा। प्रतीकात्मक फोटो।

कानपुर, जेएनएन। 16 जून से हालमार्क अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा, लेकिन कारोबारियों को अभी तक यह नहीं मालूम की उनके पास बिना हालमार्क का जो स्टाक बचा हुआ है, वे उसे कैसे बेचेंगे। यह समस्या उनके लिए भी है जिन्होंने हालमार्क का पंजीयन कराया हुआ है और उनके लिए भी जिन्होंने पंजीयन नहीं कराया है क्योंकि दोनों के पास ही बिना हालमार्क के जेवर हैं। संकट उन कारोबारियों के सामने भी है जिनके पास 14, 18 और 22 कैरेट से हटकर किसी कैरेट में बने जेवर हैं। 22 कैरेट से जरा सा भी कम जेवर होने पर उन्हें 18 कैरेट में मार्क कराना होगा और 18 कैरेट से जरा सा भी शुद्धता कम होने पर उसे 14 कैरेट में माना जाएगा। इससे कारोबारियों को लाखों का नुकसान होगा। खुद कारोबारियों का कहना है कि इससे बचने के लिए अगर सोने के जेवर गलाए तो भी आठ फीसद का नुकसान होना तय है। ऐसे में कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें।

आल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय संयोजक पंकज अरोड़ा के मुताबिक बुधवार यानी 16 जून से हालमार्क को अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है लेकिन अभी तक कारोबारियों के सामने तस्वीर साफ नहीं है कि वे 16 तारीख को किस तरह का जेवर बेचेंगे। उनके अनुसार अगर सबको तुरंत हालमार्क के लिए कहा गया तो शहर के चार सेंटर में दो हजार सराफा कारोबारी अपने जेवर लेकर पहुंच जाएंगे। इतना सोना रखने के लिए हालमार्क सेंटर में भी जगह नहीं होगी। इसके अलावा एक सेंटर एक दिन में 150 नग पर ही हालमार्क कर पाता है तो इस काम में ही महीनों लग जाएंगे।

16 जून से हालमार्क अनिवार्य हुआ तो किसी भी दुकान में एक भी जेवर बिना हालमार्क का नहीं होना चाहिए। ना बिना हालमार्क के जेवर बिकना चाहिए। इसके अलावा हर कारोबारी का भी बीआइएस में पंजीयन होना चाहिए। शहर में अभी बमुश्किल सवा सौ सराफा कारोबारियों के ही पंजीयन हैं, जबकि इनकी वास्तविक संख्या करीब दो हजार है। इस तरह यह संख्या मात्र छह-सात फीसद के करीब है। यूआइडी का क्या होगा, इस पर भी कारोबारियों को अभी तक कुछ नहीं बताया गया है।

सराफा कारोबारी राज्यपाल से मिलेंगे: अपनी इन्हीं समस्याओं को लेकर सराफा कारोबारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मिलेंगे। सराफा कारोबारियों उनसे इन नियम को लागू करने के लिए समय मांगेंगे। इसके अलावा अगर इसे लागू किया जाए तो कुछ दिनों के लिए इसका क्रियान्वयन निलंबित रखने की मांग करेंगे।

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