फीते जैसा दिखता है ब्लैक फंगस, नाक-आंख में सूजन पर हो जाएं सतर्क और कराएं टिश्यू बायोप्सी जांच

ब्लैक फंगस के इलाज में टिश्यू बयोप्सी जांच ज्यादा प्रभावी है।

ब्लैक फंगस को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि नाक और आंख में सूजन होने पर तत्काल सतर्क हो जाएं और चिकित्सकीय परामर्श के आधार जांच कराए। टिश्यू बयोप्सी की जांच रिपोर्ट एक दिन में आ जाने से जल्द इलाज करना आसान हो जाता है।

Abhishek AgnihotriTue, 18 May 2021 08:59 AM (IST)

कानपुर, [ऋषि दीक्षित]। कोरोना से उबरे लोगों में मुंह और नाक से पहुंचा म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) मांसपेशियों के टिश्यू को तोड़ते हुए शरीर में तेजी से संक्रमण बढ़ाता है। इसके संक्रमण की सटीक जानकारी के लिए टिश्यू बायोप्सी ही सबसे कारगर है। इसमें संक्रमित की नाक के अंदर की काली पपड़ी, साइनस या आंख की सर्जरी कर निकाले गए टिश्यू की माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। 24 घंटे में ही इसकी रिपोर्ट संक्रमण की सटीक स्थिति से रूबरू कराती है। इससे इलाज में आसानी में रहती है और संक्रमण बढ़ नहीं पाता है। इसमें नेजल स्वाब जांच से बचना चाहिए क्योंकि ये रिपोर्ट प्रभावी नहीं होती है।

नाक और आंख में सूजन पर हो जाएं सतर्क

चिकित्सक बताते हैैं कि कोरोना से उबरे अनियंत्रित मधुमेह पीडि़तों को अगर नाक और आंख में सूजन या नाक से काला पानी आने के साथ काली परत बनने लगे। इसे ब्लैक फंगस के लक्षण मानते हुए तत्काल पीडि़त को अस्पताल ले जाना चाहिए। चिकित्सक उसका अच्छी तरह से परीक्षण कर तत्काल एमआरआई जांच कराएं। अगर म्यूकर माइकोसिस के लक्षण दिखें तो डॉक्टरों की टीम की निगरानी में पीडि़त की नाक की काली पपड़ी की स्क्रेपिंग लेकर जांच बायोप्सी के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेजी जाए। संक्रमण काफी बढ़ा होने पर उसके साइनस एवं आंख की सर्जरी कर उसके अंग की टिश्यू बायोप्सी माइक्रोबायोलॉजी विभाग जांच के लिए भेजा जाए।

फीते की तरह दिखता है फंगस

सबसे पहले केओएच माउंट पर 20 डिग्री टिश्यू देखा जाए। उसके बाद टिश्यू की स्टेनिंग करके माइक्रोस्कोप पर उसे 90 डिग्री पर देखा जाए। फंगस होने पर माइक्रोस्कोप पर रिबन की तरह दिखते हैं। उसकी ब्रांचिंग 90 डिग्री के एंगल पर होती है। पुष्टि होने पर तत्काल प्रभावित अंग को सर्जरी कर हटा देना चाहिए। साथ ही एंटी फंगल दवाइयां चलाई जानी चाहिए।

ऊपर व नीचे तेजी से फैलता है फंगस

उनका कहना है कि फंगस ऊपर एवं नीचे की तरफ तेजी से फैलता है। ऊपर की तरफ जाने पर नाक, साइनस, आॢबटल से होते हुए आंख की मसल्स के टिश्यू को तोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ता है। आंख से होते हुए ब्रेन तक पहुंच जाता है। ब्लैक फंगस जब खून की धमनियों और शिराओं में पहुंच जाता है तो पीडि़त की मौत तय होती है। जब नीचे की तरफ फैलता है तो सांस नली से होते हुए फेफड़े (लंग्स) में पहुंच जाता है। ऐसे में यह घातक साबित होता है।

फंगस का संक्रमण होने पर नाक के अंदर काली पपड़ी जमने लगती है, इसलिए इसे ब्लैक फंगस कहते हैं। यह तेजी से फैलता है। इसकी जांच के लिए रेडियोडायग्नोस्टिकऔर पैथालॉजिकल जांचें तत्काल करानी जरूरी होती हैं। कल्चर जांच की रिपोर्ट पांच से छह दिन में आती है, जब तक फंगस तेजी से फैलते हुए कई अंगों को चपेट में ले लेता है। तत्काल और सटीक जांच के लिए टिश्यू बायोप्सी कर माइक्रोस्कोपिक जांच से पता लगाया जाता है। इसे स्टैंडर्ड जांच माना गया है। इसमें एक दिन में ही रिपोर्ट आ जाती है। नेजल स्वाब जांच नहीं करानी चाहिए क्योंकि इससे सटीक रिपोर्ट नहीं मिलती है। -डॉ. विकास मिश्र, एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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