फर्जी टीसी मामले में बड़ा सवाल, कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर कैसे होती रही ट्रेनिंग

कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर फर्जी टीसी और पार्सल पोर्टर बनाने वाले गिरोह का सरगना बेहद मास्टर माइंड निकला। स्टेशन पर अफसरों की नाक के नीचे और सीसीटीवी की निगरानी के बावजूद फर्जी कर्मियों को ट्रेनिंग कराता रहा।

Abhishek AgnihotriSun, 13 Jun 2021 10:49 AM (IST)
कानपुर में सेंट्रल रेलवे स्टेशन के अफसर अंजान रहे।

कानपुर, जेएनएन। इसमें कोई दो राय नहीं कि रेलवे में फर्जी टीसी और पार्सल पोर्टल बनाने वाले गैंग का लीडर शातिर है, तभी तो उसने बेरोजगार युवकों पर विश्वास बढ़ाने के लिए सेंट्रल स्टेशन पर ही फर्जी ट्रेनिंग का ताना बाना बुना और एजेंट काम पर लग गए। नौ दिन की ट्रेनिंग इसी का नतीजा है कि शातिर के बनाए फर्जी रेलवे कर्मचारी सेंट्रल स्टेशन परिसर के अंदर और बाहर कोच के नंबर नोट करते रहे, आइडी पहन कर घूमते रहे लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। वह भी तब जब सेंट्रल स्टेशन का चप्पा चप्पा कैमरे की जद में है। बावजूद इसके चूक कैसे हुई इस सवाल को दरकिनार कर अधिकारी गैंग के पर्दाफाश पर अपनी ही पीठ थपथपा रहे हैं।

रेलवे स्टेशन पर दो जून से 13 युवकों के बैच की ट्रेनिंग शुरू की गई। दिनेश गौतम खुद इस टीम को लीड करता था और अक्सर स्टेशन परिसर सब ठीक चल रहा है या नहीं, यह देखने जाता था। इसके साथ ही गेट नंबर दो, तीन पर पवन गुप्ता और शिवनारायण त्रिपाठी ड्यूटी लगाते थे। बुधवार की देर रात टिकट निरीक्षक सुनील पासवान ने दिनेश को रोका तो उसने खुद को स्टाफ बता दिया। इसके बाद सेंट्रल स्टेशन पर चल रही इस ट्रेनिंग के खेल का खुलासा हुआ और ठगी करने वाले गैंग के तीन एजेंटों के साथ 13 युवक पकड़े गए। बता दें कुछ माह पहले ही सेंट्रल स्टेशन के सीसीटीवी बदलकर हाइटेक किए गए हैं।

113 सीसीटीवी की जद में सेंट्रल स्टेशन का चप्पा चप्पा है। बावजूद इसके सेंट्रल स्टेशन पर शातिर ठग युवकों को रेलवे की आइडी पहनाकर ट्रेनिंग का खेल खेलता रहा और किसी की नजर तक नहीं पहुंची। इस संबंध में जब अधिकारियों से बात की तो उन्होंने भीड़ का हवाला दे दिया। बोले, अक्सर लोग डायरी लेकर आते जाते हैं। सभी को पहचानना तो मुश्किल है ही, हर एक पर नजर नहीं रखी जा सकती है। वहीं नौ दिन ट्रेङ्क्षनग चलने के सवाल पर दूसरे अधिकारी का कहना था कि गैंग के सदस्य को हमारे ही टिकट निरीक्षक ने पकड़ा है। इसे महत्व देने की बजाय सवाल खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने विभाग की पीठ थपथपाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

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