शातिर दिमाग ऐसा कि बैंक के वैल्युअर भी खा गए धोखा, परत वाले जेवरों से लगाया लाखों का चूना

आइसीआइसीआइ बैंक में गोल्ड लोन के नाम पर ठगी की।

कानपुर के बिरहाना रोड स्थित आइसीआइसीआइ बैंक शाखा में गोल्ड लोन के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले शातिरों का खेल सामने आया तो पुलिस भी दंग रह गई। उनकी तलाश में पुलिस अब हापुड़ भी जाएगी ।

Publish Date:Sun, 24 Jan 2021 08:52 AM (IST) Author: Abhishek Agnihotri

कानपुर, [चंद्रप्रकाश गुप्ता]। सोने की परत वाले आभूषण गिरवी रखकर बैंक से 8.14 लाख रुपये का लोन लेने वाले बदमाशों ने ये जेवर हापुड़ में बनवाए थे। इसके बाद वहीं इन पर फर्जी हॉलमार्क लगवा ली थी। इस जानकारी के बाद गिरोह में शामिल अन्य जालसाजों की तलाश में पुलिस टीम हापुड़ भेजने की तैयारी है। 

बैंक की ऑडिट में सामने आया सच

सुजातगंज निवासी मो. सिराजुद्दीन, अपने साथी साउथ दिल्ली के ओखला निवासी रहीसुद्दीन मलिक के साथ 22 दिसंबर को आइसीआइसीआइ बिरहाना रोड बैंक पहुंचा और गोल्ड लोन लेने के लिए आवेदन कर 54.94 ग्राम सोने के आभूषण दिए। जांच के बाद बैंक ने 2.02 लाख रुपये का लोन मो. सिराजुद्दीन के नाम जारी किया। 28 दिसंबर को दोनों फिर बैंक पहुंचे और नए गोल्ड लोन के लिए आवेदन कर 181.61 ग्राम वजन के आभूषण फिर दिए। इस बार बैंक ने सिराजुद्दीन के नाम से 6.12 लाख रुपये लोन दिया। चार जनवरी को जब बैंक ने गोल्ड लोन का ऑडिट कराया तो पता लगा कि उक्त सोने के आभूषण फर्जी थे। पीतल के जेवरों पर सोने की मोटी परत चढ़ाकर उन्हें तैयार किया गया था। इसके बाद चार जनवरी को आरोपित तीसरी बार बैंक पहुंचे तो कर्मचारियों ने उन्हें पुलिस के सिपुर्द कर दिया था।

दिल्ली और हरियाणा की बैंक को भी लगाया चूना

पुलिस ने बैंक प्रबंधक अनुराग तिवारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपितों को जेल भेजा। जांच में पता लगा कि आरोपितों ने दिल्ली की भी एक बैंक से तीन बार में करीब 16 लाख रुपये और हरियाणा से करीब 20 लाख रुपये गोल्ड लोन हड़पा था। पुलिस ने आरोपितों के फोन की कॉल डिटेल निकलवाई तो उनके संबंध हापुड़ के गैंग से होने की जानकारी मिली। ये गैैंग सोने की परत वाले जेवर बनाने के साथ ही उन पर फर्जी हॉलमार्क लगवाता है, जिससे बैंक के वैल्युअर भी धोखा खा जाते हैं।

सोने की मोटी परत होने से नहीं पकड़ में आए फर्जी जेवर

जालसाजों ने जो जेवर गिरवी रखे थे, उसमें सोने की मोटी परत चढ़ी थी। कुल वजन के जेवरों का करीब 25 फीसद सोना था। यह सोना 22 कैरट का था, लिहाजा बैंक के वैल्युअर ने जांच की तो उन्हें जेवर ठीक लगे। हॉलमार्क होने से उन्हें शक नहीं हुआ। आरोपित जब तीसरी बार पहुंचे तो बैंक अधिकारियों को संदेह हुआ। उन्होंने जेवरों की बारीकी से जांच कराई। जेवर काटे गए तो अंदर पीतल मिला।

हॉलमार्क से सेंटर का नाम-पता स्पष्ट नहीं

बैंक के वैल्युअर ने हॉलमार्क की भी जांच कराई तो सेंटर का नाम व पता स्पष्ट रूप से नहीं लिखा मिला। इससे पता ही नहीं लगा कि जेवरों पर हॉलमार्क कहां से लगवाया गया? थाना प्रभारी ने बताया कि जरूरत पड़ी तो इस रैकेट का पर्दाफाश करने को आरोपितों को रिमांड पर भी लिया जाएगा।

ऑर्डर पर तैयार किए जा रहे सोने की परत वाले जेवर

नाम न छापने की शर्त पर एक सराफा व्यापारी ने बताया कि हापुड़ में कम सोने के आभूषण आर्डर पर तैयार कराए जाते हैं। इस तरह के आभूषणों में 30 से 40 फीसद तक सोना होता है। आभूषण बनाते समय ऊपर की मोटी परत सोने की होती है, जबकि आभूषण के अंदर वाली परत पीतल या तांबे की होती है। कसौटी पर जांच करने पर भी असली व नकली होने का पता आसानी से नहीं चल पाता है।

चोरी का सोना खपाने में मशहूर है हापुड़

हापुड़ के सर्राफा बाजार में सर्वाधिक बंधेल के आभूषणों का निर्माण होता है। चोरी का सोना खरीदने के मामले में हापुड़ पूरे देश में विख्यात है। पिछले कई वर्षों में दूर-दराज के जनपदों व प्रदेशों की पुलिस चोरी का सोना खरीदने के मामले में हापुड़ सर्राफा बाजार में छापा मार चुकी है, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण सोने का काला धंधा फलफूल रहा है। सर्राफा बाजार की संकरी गलियों में सोने को गलाने के लिए भट्टियां लगी हैं, जहां चोरी का सोना कम कीमत पर खरीदा जाता है।

फर्जी हॉलमार्क वाले जेवर गिरवी रखकर लोन लेने वाले आरोपितों के बाकी साथियों का पता लगाया जा रहा है। सर्विलांस टीम की मदद ली जा रही है। आरोपितों से बरामद हापुड़ की कार के मालिक की भी तलाश की जा रही है। - शिवा जी, एसपी पूर्वी सराफा बाजार में 22 व 23 कैरेट सोना दिया जाता है। कुछ लोग बंधेल पर आभूषण बनाते हैं, जिसमें 20 से 30 फीसद तक सोना होता है। उसी के अनुसार ग्राहक से रुपये लिए जाते हैं। बाजार में पारदर्शिता का ध्यान रखा जाता है। -लोकेश कुमार, अध्यक्ष, हापुड़ सराफा एसोसिएशन

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