मुंबई और दिल्ली के बाद कानपुर में भी सक्रिय हुआ ये गैंग, धार्मिक स्थल व बड़े मेले होते सबसे बड़े ठिकाने

रेलवे स्टेशन बस स्टेशन प्रमुख चौराहों पर सक्रिय गैंग रोजाना करता है लाखों की कमाई। अब कानपुर में क्राइम ब्रांच की जांच में बच्चों से भीख मंगवाने वाले गैंग का खुलासा हुआ है। अजमेर प्रयागराज लखनऊ व आसपास जिलों में भी बच्चों को ले जाकर भीख मंगवाता है।

Abhishek AgnihotriSat, 19 Jun 2021 09:47 AM (IST)
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया सनसनीखेज सच।

कानपुर, जेएनएन। मुंबई और दिल्ली के बाद अब शहर में भी बच्चों से भीख मंगवाने वाले गैंग सक्रिय हो गया है और रोजाना लाखों की कमाई कर रहा है। पिछले दिनों टाटमिल चौराहे के पास से क्राइम ब्रांच ने चार बच्चों को भीख मांगते पकड़ा था। पूछताछ में सामने आया है कि शहर में बच्चों से भीख मंगवाने वाले कई गिरोह सक्रिय हैं, जो बच्चों को शहर से बाहर भी ले जाते हैं। गिरोह के सदस्य धार्मिक आयोजन व बड़े मेले भीख मंगवाने के लिए सबसे मुफीद मानते हैं।

शहर में रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, प्रमुख चौराहों पर सात से 15 साल तक के बच्चे भीख मांगते नजर आते हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे ऐसे हैं जो गिरोह के चंगुल में फंसे हैं। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि पिछले दिनों पकड़े गए बच्चों से पूछताछ के बाद खुफिया तंत्र सक्रिय हुआ तो पता चला है कि शहर में दो से तीन गिरोह सक्रिय हैं। बच्चों को अजमेर या दूसरे शहरों में भी उस वक्त ले जाया जाता है, जब वहां कोई बड़ा धार्मिक आयोजन होता है। जहां बड़े मेले लगते हैं, वहां भी ये बच्चे ले जाए जाते हैं।

मजबूर होते हैं बच्चे : जांच में सामने आया है कि भीख मांगने वाले बच्चे मजबूर होते हैं। न तो कोई इनकी परवरिश करने वाला होता है और न ही सिर ढकने के लिए छत देने वाला। ऐसे में गिरोह का सरगना बच्चों को खाने-पीने और रात में सोने के लिए छत मुहैया कराता है।

हर बच्चे पर रहती गुर्गों की नजर : बच्चों की निगरानी के लिए गुर्गे तैनात किए जाते हैं। भीख के पैसे चुराने या इस धंधे के बारे में किसी को कुछ भी बताने का शक होने पर बच्चों को कड़ा दंड दिया जाता है।

रखें ख्याल, भीख में पैसे नहीं खाना दान दें : चाइल्ड लाइन के निदेशक कमलकांत तिवारी कहते हैं, लोग ख्याल रखें कि भीख मांगने वालों को पैसे के बजाय खाना दान दें। उन्हें पैसे देकर हम उनकी मदद कम इस कुप्रथा को बढ़ावा ज्यादा देते हैं। बेसहारा और मजबूर व्यक्ति भीख मांगे तो यह समझ आता है। कई ऐसे माता-पिता भी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को भीख मांगने के काम में ही लगा रखा है। पैसे देने से इनकी संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। कई ऐसे गिरोह हैं, जो मासूम बच्चों को अपाहिज कर इस काम में धकेल देते हैं। इसलिए हर शहरवासी संकल्प ले कि भीख में पैसे नहीं बल्कि खाना या फिर खाने का सामान देंगे। इससे कुछ दिन में ही बदलाव दिखने लगेगा।

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