पेट नहीं भर पा रहे फूल, कैसे महके इत्र

जागरण संवाददाता, कन्नौज : फूलों की कमी से डेढ़ हजार साल पुराना इत्र कारोबार संकट में है। बिन फूलों के चंपा, चमेली, मौलश्री, जूही, कदम व रातरानी इत्र की सुगंध खोने लगी है। सुगंध कारोबारी इत्र निर्माण प्रभावित होने से परेशान हैं तो वहीं किसानों का कहना है कि जब फूलों के उत्पादन से पेट नहीं भर रहा है तो कब तक फूलों की खेती कर पाएंगे।

यहां की पहचान थे प्राचीन इत्र

किसी समय चंपा, चमेली, मौलश्री, कदम, जूही व रातरानी इत्र यहां की पहचान थे। गंगा व काली नदी किनारे कटरी में फूलों की खेती होती थी लेकिन अब इनकी खुशबू तक नहीं बची है। अक्सर बाढ़ व अन्य कारणों से फूलों की खेती में नुकसान होता आया है। इस कारण किसान फूलों के बजाय सब्जियों की खेती करने लगे हैं।

फूलों संग लौटेगी गुलाब व बेला की खुशबू

यहां के बने बेला इत्र की देश-विदेश तक सुगंध फैली है लेकिन अब बेला के पौधे जिले तो छोड़िए, बाहर भी नहीं मिल रहे हैं। बेला का उत्पादन पूरी तरह से बंद हो चुका है वहीं, गुलाब की खेती में भी गिरावट आई थी। कृषि विज्ञान केंद्र ने गुलाब व बेला की खेती पर जोर दिया है। सदर ब्लॉक के कटरी अमीनाबाद, जलालापुर, पनवारा, चौधरियापुर, जलालपुर, अलियापुर, चौराचांदपुर, सलेमपुर समेत दो दर्जन गांव में फूलों की खेती नई तकनीक से कराने की दिशा में काम हो रहा है ताकि इत्र तैयार करने के लिए फूल मिल सकें।

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''फूलों की खेती पुश्तैनी कारोबार है। पांच बीघा खेत में फूलों की खेती करते आए हैं लेकिन अब कमाई नहीं होती है। अक्सर बाढ़ के कारण नुकसान होता है। बाजार में फूलों के दाम भी घटे हैं। इससे कई बार तो लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। पेट नहीं भरेगा तो काम कैसे होगा, इसलिए गेहूं, धान व मक्का की खेती करने लगे हैं।-मेवाराम, लुधपरी।

''13 बीघा खेत में फूलों की खेती करते आ रहे हैं। गुलाब छोड़ बाकी फूलों के दाम नहीं मिलते हैं इसलिए चंपा, चमेली, मौलश्री, जूही, कदम व रातरानी के पौधे लगाना बंद कर दिया है। फूलों की जगह अब सब्जियों की बोआई करते हैं। सब्जियों में फूलों से ज्यादा फायदा है। -जोरावर, पैंदाबाद।

''नुकसान के कारण तकरीबन फूलों की खेती बंद हो गई है। इससे इत्र कारोबार संकट में है। वन विभाग के सामने फूलों की खेती कराने का प्रस्ताव था। -पवन त्रिवेदी, इत्र कारोबारी।

''नई तकनीकी से गुलाब व बेला समेत अन्य फूलों की खेती कराएंगे। बेहतर खेती के तौर-तरीके बताकर किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे कमाई के साथ कारोबार बढ़ेगा। -डा. अमर ¨सह, कृषि वैज्ञानिक उद्यान।

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