जिला अस्पताल में बनेगी आररटी-पीसीआर लैब

जिला अस्पताल में बनेगी आररटी-पीसीआर लैब

स्वास्थ्य मिशन के निदेशक को बजट के लिए पत्र भेजा गया है। जिले में यदि एक लैब बन जाती है तो कोरोना की जांच करने में आसानी होगी। इसके लिए जिला अस्पताल की पैथोलॉजी उपयुक्त रहेगी। मंजूरी मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा।

Publish Date:Fri, 27 Nov 2020 11:01 PM (IST) Author: Jagran

अभिषेक द्विवेदी, कन्नौज: कोरोना की दूसरी वेव को रोकने के लिए सैंपलिंग पर जोर दिया जा रहा है। अधिक से अधिक लोगों की जांच हो, इसके लिए जिले में आरटी-पीसीआर लैब खोलने का निर्णय लिया है। जिला अस्पताल में लैब के लिए बजट की मांग करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक को पत्र लिखा है।

संयुक्त जिला अस्पताल में कोरोना की जांच के लिए ट्रू-नाट मशीन लगी है। जिससे एक दिन में बमुश्किल दस या 11 जांचें हो पातीं हैं। जबकि जिले में प्रतिदिन करीब दो हजार सैंपल लिए जाते हैं। अधिकतर एंटीजन किट से जांच होती है। आरटी-पीसीआर से जांच विश्वसनीय मानी जाती है। इसीलिए सैंपलों को ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान विश्वविद्यालय सैफई भेजा जाता है। इससे पहले किग जार्ज मेडिकल यूनीवर्सिटी लखनऊ भेजे जाते थे। इससे जांच रिपोर्ट आने में तीन दिन का समय लग जाता है। सैंपलों की संख्या अधिक होने के कारण दिक्कत होती है। ऐसे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने संयुक्त जिला अस्पताल में आरटी-पीसीआर लैब खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक को बजट के लिए पत्र भेजा गया है। जिले में यदि एक लैब बन जाती है, तो कोरोना की जांच करने में आसानी होगी। इसके लिए जिला अस्पताल की पैथोलॉजी उपयुक्त रहेगी। मंजूरी मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा।

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आएगा एक करोड़ रुपये का खर्च:

स्वास्थ्य विभाग की निर्माण शाखा के इंजीनियर पीडी वर्मा ने बताया कि आरटी-पीसीआर लैब के निर्माण में करीब एक करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसके लिए अत्याधुनिक मशीनों के अलावा प्रशिक्षित टेक्नीशियनों को रखा जाता है। आरटी-पीसीआर में पूल सैंपलिंग कर एक बार में अधिक से अधिक लोगों की जांच एक साथ की जा सकती है।

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जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी वेव को रोकने के उपाय किए जा रहे हैं। सैंपलिग और टेस्टिग बढ़ाई गई है। जिला अस्पताल में आरटी-पीसीआर लैब बनने से जांच में आसानी होगी।

-डॉ. कृष्ण स्वरूप, सीएमओ

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