अन्त्योदय कार्डधारकों के गोल्डन कार्ड बनवाने को चलेगा विशेष अभियान

- 9 से 15 दिसम्बर तक लगेंगे कैम्प झाँसी : अन्त्योदय कार्डधारकों के गोल्डन बनाने के लिए अब विशेष अ

JagranTue, 07 Dec 2021 11:26 PM (IST)
अन्त्योदय कार्डधारकों के गोल्डन कार्ड बनवाने को चलेगा विशेष अभियान

- 9 से 15 दिसम्बर तक लगेंगे कैम्प

झाँसी : अन्त्योदय कार्डधारकों के गोल्डन बनाने के लिए अब विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस सम्बन्ध में मंगलवार को विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी शैलेश कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुयी। इसमें 9 से 15 दिसम्बर तक राशन की दुकानों पर कैम्प लगाने तथा राशन वितरक को अपनी दुकान पर पंजीकृत सभी लाल कार्ड धारकों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाने के निर्देश दिये गये।

मुख्य विकास अधिकारी ने अब तक सबसे कम गोल्डन कार्ड बनाने वाली इकाइयों को लक्षित लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनवाने की चेतावनी दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि जनपद में डेढ़ लाख अन्त्योदय कार्ड धारक हैं, जिनके गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं। बैठक में जॉइण्ट मैजिस्ट्रेट सान्या छाबड़ा, आयुष्मान नोडल अधिकारी डॉ. सुमित मिसुरिया आदि उपस्थित रहे।

फोटो 7 जेएचएस 2

डॉ. विमल आर्य

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पूरी वैक्सीन न लगवाने वालों को ओमिक्रॉन का ख़्ातरा अधिक

- 2 लाख से अधिक लोगों ने नहीं कराया सम्पूर्ण वैक्सिनेशन

झाँसी : कोरोना के तीसरे स्ट्रेन ओमिक्रॉन ने दस्तक दे दी है। इसकी रफ्तार अभी बेहद धीमी है, लेकिन जिस तरह से यह पैर पसार रहा है उससे कभी भी स्थिति खतरनाक हो सकती है। इस वैरिएण्ट को पहले 2 वैरिएण्ट के मुकाबले अधिक घातक माना जा रहा है और वैक्सिनेशन का पूरा कोर्स न लेने वालों के लिये स्थिति गम्भीर हो सकती है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ओमिक्रॉन ने भारत में दस्तक दे दी है, लेकिन बुन्देलखण्ड अभी इससे अछूता है। इसके बावजूद लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ़िजले में अब तक 11.50 लाख से अधिक लोगों ने कोरोना से बचाव के लिये पहली डो़ज ली है, जबकि 4.45 लाख से अधिक लोग दूसरी डो़ज भी ले चुके हैं। इससे इतर 2.84 लाख से अधिक लोग ऐसे हैं, जिन्होंने दूसरी डो़ज नहीं ली है। ऐसे लोगों पर ओमिक्रॉन अधिक असर कर सकता है।

यह है ओमिक्रॉन

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलिज के कम्युनिटि मेडिसिन विभागाध्यक्ष एवं कोविड-19 टीकाकरण के नोडल अधिकारी डॉ. विमल आर्य के अनुसार कोविड के नये स्ट्रेन बी.11.529 को ओमिक्रॉन नाम दिया गया है। इसकी पहचान सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में हुयी। भारत में पहला केस 2 दिसम्बर को कर्नाटक में मिला और 7 दिसम्बर तक कुल 24 मामले सामने आ चुके हैं।

अभी नहीं मिले गम्भीर मामले

डॉ. आर्य ने बताया कि ओमिक्रॉन में 50 से अधिक म्यूटेशन हो चुके हैं। इतने अधिक म्यूटेशन ही ओमिक्रॉन को पहले की तुलना में अधिक ते़जी से फैलने वाला वैरिएण्ट बनाता है। इससे संक्रमित अधिक मरी़जों में हल्के लक्षण ही हैं और किसी को भी गम्भीर संक्रमण या आइसीयू में भर्ती नहीं करवाना पड़ा। इससे किसी की मौत भी नहीं हुयी है।

हर उम्र पर असर

चिकित्सकों के अनुसार भारत में ओमिक्रॉन के अधिकतर संक्रमित सभी उम्र के लोग हैं। जिन लोगों ने कोविड की एक भी डो़ज नहीं लगवायी या समय पूरा होने के बावजूद दूसरी डो़ज नहीं लगवायी, उन्हें इससे अधिक खतरा है। हालाँकि दोनों डो़ज लगवा चुके लोग भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहे जा सकते और उन्हें भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

बोस्टर डो़ज लेना जरुरी

डॉ. विमल आर्य ने बताया कि वैक्सीन लेने के 5 से 6 महीने तक शरीर में ऐण्टि बॉडी रहती है। उसके बाद यह कम होने लगती है। शरीर में ऐण्टि बॉडी लेविल बनाये रखने के लिये बूस्टर डो़ज लेना जरुरी है। ओमिक्रॉन पर वैक्सीन कितनी असरकारक है इसकी कोई स्टडी नहीं है, लेकिन वैक्सीन का असर कम होता है तो बूस्टर डो़ज देना ़जरूरी हो जाता है।

फाइल : मुकेश त्रिपाठी

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