नियमावली को फाइल में दबाकर कर दिया अड़जार तालाब का ठेका

0 ग्रामीणों के हंगामा करने के बाद पलटी पत्रावली 0 अब अधीक्षण अभियन्ता को लिखा पत्र, ठेका निरस्त कर

JagranSun, 26 Sep 2021 01:00 AM (IST)
नियमावली को फाइल में दबाकर कर दिया अड़जार तालाब का ठेका

0 ग्रामीणों के हंगामा करने के बाद पलटी पत्रावली

0 अब अधीक्षण अभियन्ता को लिखा पत्र, ठेका निरस्त करने की संस्तुति

झाँसी : अड़जार तालाब में मत्स्य आखेट का ठेका करने में सिंचाई विभाग सपरार प्रखण्ड की बड़ी चूक सामने आई है। विभाग ने शासन की नियमावली को फाइल में दबाए रखा और ठेका निकाल दिया। ग्रामीणों ने हंगामा किया तो फाइल पलटी गई। अब विभाग ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर ठेके को लेकर मशविरा माँगा है।

सपरार प्रखण्ड के अधीन आने वाले स्यावरी झील, शेखरा तालाब, पचवारा तालाब, मगरवारा तालाब, तैंदोल व अड़जार तालाब में मत्स्य पालन के ठेके किए गए। ठेकेदारों ने नीलामी में हिस्सा लिया और बढ़-चढ़कर बोली लगाई। विभाग ने सर्वाधिक बोली लगाने वाले के पक्ष में ठेका कर दिया। पर अड़जार तालाब के ठेके को लेकर दोहरा विवाद शुरू हो गया। सबसे पहले तो 279 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में फैले ठेके को महज 63 ह़जाररुपए में देने को लेकर सवाल उठे तो ग्रामीणों ने भी इस तालाब का ठेका देने पर हंगामा कर दिया। तालाब के आसपास रहने वाले आधा दर्जन से अधिक गाँव के लोगों ने कलेक्टरेट में प्रदर्शन किया। ़िजलाधिकारी के न होने पर ग्रामीणों की भीड़ ने सपरार प्रखण्ड का घेराव किया और ठेका निरस्त करने की माँग की। ग्रामीणों ने बताया कि मछुआ समाज के 500 परिवार की रो़जी-रोटी चलती है, जो ठेका होने से भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे। इस हंगामे के बाद सिंचाई विभाग सपरार प्रखण्ड ने अड़जार तालाब की पत्रावली का अध्ययन किया तो वर्ष 2009 की नियमावली सामने आ गई। तत्कालीन प्रमुख सचिव शासन हरविन्द राज सिंह द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि दो राज्यों के बीच बँटे तालाब का आवण्टन नहीं किया जा सकता है, इसके लिए अलग से मत्स्य नीति बनाई जाएगी। दरअसल, अड़जार तालाब का फैलाव उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश में भी है, जिससे यह नियमावली इस तालाब के ठेके पर प्रभावी होगी। विभाग ने अब इस नियमावली को आधार बनाते हुए अधीक्षण अभियन्ता से सलाह माँगी है।

शासन तक जा सकता है मामला

सिंचाई विभाग सपरार प्रखण्ड के अधिशासी अभियन्ता अजय भारती ने भले ही गेन्द अधीक्षण अभियन्ता के पाले में डाल दी हो, लेकिन मामला शासन तक जा सकता है। दरअसल, दो राज्यों के बीच बँटे तालाब में मत्स्य आखेट का ठेका नहीं दिया जा सकने वाली नियमावली वर्ष 2009 में आई थी। इसमें सिंचाई विभाग को नई मत्स्य नीति बनाने की सलाह भी दी गई थी। चूँकि विभाग में ऐसी कोई नीति का दस्तावेज अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अधिकारी शासन को मामला भेजकर निस्तारित कराने की तैयारी में हैं।

फोटो हाफ कॉलम

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इन्होंने कहा

'वर्ष 2009 में शासन ने दो राज्यों के बीच बँटे तालाब के ठेके को लेकर नियमावली जारी की थी। इस नियमावली के आधार पर अधीक्षण अभियन्ता को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। ठेके को लेकर उच्चाधिकारियों के निर्देशों का अनुपालन कराया जाएगा।'

0 अजय भारती

अधिशासी अभियन्ता, सपरार प्रखण्ड

फाइल : राजेश शर्मा

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