बुन्देलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति करेगी साहित्यकारों के सृजन-स्वप्न को साकार

0 मण्डलायुक्त के निर्देश पर समिति के पदाधिकारी तय झाँसी : हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत एवं बुन

JagranSat, 25 Sep 2021 08:55 PM (IST)
बुन्देलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति करेगी साहित्यकारों के सृजन-स्वप्न को साकार

0 मण्डलायुक्त के निर्देश पर समिति के पदाधिकारी तय

झाँसी : हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत एवं बुन्देलखण्डी भाषा में सृजित बुन्देली धरा के साहित्यकारों के सृजन को नये आयाम देने का जो बीड़ा मण्डलायुक्त डॉ. अजय शकर पाण्डेय ने उठाया है, उसे आज पंख प्रदान किये गये। इसके लिए बुन्देलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति का गठन कर उनके पदाधिकारियों का चयन किया गया। इस समिति के संरक्षक मण्डलयुक्त हैं।

मण्डलायुक्त डॉ. पाण्डेय ने बताया कि कई बार साहित्यकारों का सृजन श्रेष्ठतम् होने के बावजूद सि़र्फ इसलिये दीमकों की भेंट चढ़ जाता है कि वह उसके प्रकाशन के संसाधन नहीं जुटा पाते। समिति का प्रयास होगा कि धनाभाव में किसी का स्तरीय साहित्य प्रकाशित होने से छूटने न पाये। इसके लिये पूरे झाँसी मण्डल के जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के उन विस्मृत एवं जीवित साहित्यकारों की प्रकाशित पुस्तकें व पाण्डुलिपियाँ आमन्त्रित की गयी है, ताकि उनका आकलन कर साहित्यकारों को महिमा मण्डित किया जा सके। इन पाण्डुलिपियों को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यक्ष डॉ. पुनीत बिसारिया या समिति के किसी भी पदाधिकारी के सुपुर्द किया जा सकता है। विशेषज्ञ साहित्यकारों की एक टीम गठित होगी, जो इनके प्रकाशन पर अन्तिम निर्णय लेगी। इसके अलावा विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रमुख जन प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, व्यवसाइयों एवं लायन्स, रोटरी, इनरव्हील, भारत विकास परिषद, जेसी़ज जैसी संस्थाओं को समिति का अंग बनाया जायेगा। आवश्यकता पड़ने पर उ.प्र. हिन्दी संस्थान लखनऊ, उ.प्र. उर्दू अकादमी, ़फखरुद्दीन अली मेमोरियल कमिटि लखनऊ, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा आदि से भी आर्थिक सहयोग लिया जायेगा। बुन्देलखण्ड के साहित्यकारों के साहित्य पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध कार्य कराये जाने का भी प्रस्ताव रखा गया। ओरछा में महाकवि केशव शोध संस्थान एवं झाँसी में बुन्देलखण्ड शोध संस्थान को सक्रिय करने के लिये मण्डलायुक्त के स्तर से पत्राचार किया जायेगा। सर्किट हाउस के निकट बनाये गये अटल पुस्तकालय में एक दीर्घा बुन्देलखण्ड के साहित्यकारों के नाम की जायेगी, जिसमें उनकी प्रकाशित पुस्तकों एवं पाण्डुलिपियों को प्रदर्शित व विक्रय हेतु उपलब्ध कराया जायेगा। इस दौरान डॉ. नीति शास्त्री एवं मण्डलीय परियोजना प्रबन्धक एनएचएम आनन्द चौबे ने भी सुझाव दिये। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत बिसारिया को इस समिति का अध्यक्ष व राजकुमार अंजुम को सचिव पद के लिये प्रस्तावित किया गया है। अन्य प्रमुख पदाधिकारियों में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के पौत्र डॉ. वैभव गुप्त, उपन्यास सम्राट डॉ. वृन्दावनलाल वर्मा के पौत्र मधुर वर्मा, लोकभूषण पन्नालाल 'असर', निहाल चन्द्र शिवहरे, डॉ. रामशकर भारती, देवेन्द्र भारद्वाज, डॉ. कौशल त्रिपाठी, उस्मान 'अश्क', संजय राष्ट्रवादी, श्रीमती सुमन मिश्रा, डॉ. निधि अग्रवाल, अनिल दुबे, उरई से डॉ. संजय सिंघल एवं डॉ. पारसमणि अग्रवाल और ललितपुर से डॉ. सुधाकर उपाध्याय आदि के नाम शामिल है।

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