नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के आरोपी को आजीवन कारावास

झाँसी : न्यायालय अपर ़िजला व सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम सहित बलात्कार) न्यायालय संख्या 9 नितेन्

JagranThu, 16 Sep 2021 08:11 PM (IST)
नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के आरोपी को आजीवन कारावास

झाँसी : न्यायालय अपर ़िजला व सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम सहित बलात्कार) न्यायालय संख्या 9 नितेन्द्र कुमार ने नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप सिद्ध होने पर आशाराम ढीमर को सश्रम आजीवन कारावास तथा 20 ह़जार रुपए अर्थदण्ड की स़जा सुनायी है।

अभियोजन पक्ष की पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक विजय सिंह कुशवाहा ने बताया कि वादी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि 14 फरवरी 2019 की सुबह उसकी पत्नी जागी, तो नाबालिग पुत्री उसे घर पर नहीं मिली। खोजबीन करने पर पुत्री का पता नहीं चलने पर उसी दिन थाना कटेरा में अपनी पुत्री के लापता होने के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र देने पर पुलिस ने कानूनी कार्यवाही का आश्वासन दिया। प्रार्थी को शक हुआ कि गाँव का आशाराम गाँव में नहीं है। इस पर उसके भाई से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसकी बहन मालती का फोन आया था कि दोनों हरियाणा के महिन्दरगढ़ में हैं। इस पर वह आशाराम के भाई सन्तोष को पुलिस के पास ले गए। सन्तोष ने उससे मोबाइल फोन से बात की, लेकिन पुलिस ने प्रकरण दर्ज नहीं किया। एसपी (ग्रामीण) के आदेश पर पुलिस ने मु़कदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में भेजा। न्यायालय ने दोनों पक्षों की सुनवाई, गवाह व बहस के बाद आरोपी आशाराम को धारा 376 आइपीसी के तहत सश्रम आजीवन कारावास व 20 ह़जार रुपए अर्थदण्ड से दण्डित किया। अर्थदण्ड न देने पर छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 363 आइपीसी में 4 वर्ष तथा 5 ह़जार रुपए अर्थदण्ड, न देने पर एक माह अतिरिक्त, धारा 366 में 5 वर्ष कारावास व 5 ह़जार रुपए अर्थदण्ड, न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास, धारा 506 आइपीसी में एक वर्ष साधारण कारावास व एक ह़जार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है। अर्थदण्ड न देने पर एक माह अतिरिक्त कारावास की स़जा भुगतनी होगी। सभी स़जाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बितायी गयी अवधि उसकी स़जा में समायोजित की गयी। दोषसिद्ध द्वारा जमा किए गए अर्थदण्ड में से पीड़िता को 50 प्रतिशत धनराशि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के तहत प्रदान की जाएगी।

हत्या का आरोप सिद्ध होने पर पति समेत 4 को आजीवन कारावास

झाँसी : न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश (द्रुतगामी न्यायालय, महिलाओं के विरुद्ध अपराध) अविनाश कुमार सिंह ने हत्या का आरोप सिद्ध होने पर पति समेत 4 ससुरालियों को आजीवन कारावास की स़जा सुनायी। लड़की के पिता वादी मु़कदमा के पक्षद्रोह होने पर प्रकीर्ण वाद चलाने के आदेश दिए।

अभियोजन पक्ष की पैरवी करते हुए सहायक ़िजला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) संजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि वादी राजाराम पाल ने 7 अगस्त 2015 को मु़कदमा दर्ज कराया कि उसने अपनी पुत्री आरती का विवाह 2 वर्ष पहले सारौल झाँसी निवासी राहुल पाल से की थी और अपनी साम‌र्थ्य के अनुसार घर-गृहस्थी का सामान, जेवरात, ऩकद मिलकर लगभग 3 लाख रुपए दिए थे। शादी में दिए गए सामान व ऩकद रुपए से ससुराल वाले खुश नहीं थे। वह लोग ट्रैक्टर खरीदने के लिए 2 लाख रुपए और देने का दबाव बनाने लगे। मना करने पर मारपीट और धमकी देते रहते थे। उसकी पुत्री ने इसकी जानकारी कई बार उसे जानकारी दी। 2 अगस्त 2015 को शाम लगभग 4 बजे उसे आरती की तबीयत खराब होने की सूचना मिली, तो वह अपने भाई के साथ पुत्री की ससुराल पहुँचा, तो वह घर की गैलरी में मरी पड़ी थी। उसने पुत्री के चेहरे से कपड़ा हटाया, तो गले में सूजन व चोट के निशान थे। उसे पता लगा कि पति के साथ सास, जेठ, जेठानी ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। थाना बरुआसागर पुलिस ने पति राहुल के साथ सास रामदेवी, जेठ करन सिंह, जेठानी रामश्री के खिलाफ धारा 498ए, 304बी आइपीसी, तथा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। आरोप-पत्र को न्यायालय में पेश किया गया। बहस के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अन्य कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया। बचाव पक्ष की ओर से आरती के बीमार होने तथा बीमारी के समय कोई दवाई खाने से मृत्यु होना बताया। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने एकराय होकर विषैला पदार्थ देकर हत्या की है। न्यायालय ने माना कि आरती की विषैला पदार्थ खिलाकर हत्या की गयी। न्यायालय ने वादी के पक्षद्रोही होने पर भी परिस्थितियों व मेडिकल रिपोर्ट के आधा पर आरोप को सही मानते हुए राहुल, करन, रामदेवी व रामश्री को धारा 302 आइपीसी के अपराध में आजीवन करावास तथा प्रत्येक को 25-25 ह़जार रुपए अर्थदण्ड की स़जा सुनायी। अर्थदण्ड न देने पर 8-8 माह के अतिरिक्त कारावास की स़जा सुनायी। अर्थदण्ड न देने पर 8-8 माह कारावास की अतिरिक्त स़जा भुगतनी होगी। जेल में बितायी गयी अवधि सजा में समायोजित होगी। साथ ही वादी राजाराम पाल के ख़्िाला़फ धारा 344 सीआरपीसी के अधीन प्रकीर्ण वाद को चलाने के आदेश दिए।

फाइल-रघुवीर शर्मा

समय-7.40

16 सितम्बर 21

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