आयकर विभाग का बदल गया चेहरा

0 फेसलेस स्कीम से पारदर्शी हुई व्यवस्था 0 करदाता व कर निर्धारण अधिकारी नहीं रहते आमने-सामने 0 क

JagranMon, 02 Aug 2021 01:02 AM (IST)
आयकर विभाग का बदल गया 'चेहरा'

0 फेसलेस स्कीम से पारदर्शी हुई व्यवस्था

0 करदाता व कर निर्धारण अधिकारी नहीं रहते आमने-सामने

0 कर निर्धारण की पूरी व्यवस्था हुई ऑनलाइन, देश में कोई भी आयकर अधिकारी कर सकता है असेस्मेण्ट

झाँसी : आयकर विभाग का चेहरा कुछ इस तरह बदल गया है कि यहाँ अब चेहरे नहीं दिखते, बस फाइलें दिखती हैं। विभाग में पारदर्शिता लाने तथा ऑनलाइन कार्य को आगे बढ़ाने के लिए चलायी गयी योजनाओं का असर धरातल पर दिखने लगा है। करदाता व कर निर्धारण अधिकारी का आमना-सामना न होने से व्यवस्था पारदर्शी और आसान हो गयी है।

आयकर विभाग की कार्यप्रणाली अब बदल गयी है। कार्यालयों में आयकर विभाग के अधिकारी तो हैं, लेकिन अब वे अलग-अलग क्षेत्र में बैठे अधिकारियों को रिपोर्ट करते हैं। आयकर की विंग असेसमेण्ट, रिव्यू, ज्यूरिडिक्शन तथा सर्च अलग-अलग कार्य करती हैं और इनके रिपोर्ट अधिकारी कानपुर, आगरा, मेरठ में बैठते हैं। कर निर्धारण में अब प्रादेशिक क्षेत्राधिकार समाप्त कर दिया गया है। अब किसी एक शहर का आयकर अधिकारी कर निर्धारण करता है तो दूसरे शहर का अधिकारी रिव्यू बनाता है। करदाता के ऑनलाइन आरटीआर (इनकम टैक्स रिटर्न) दाखिल करते ही यह फाइल नैशनल सर्विस सेण्टर में पहुँच जाती है। इसके बाद फेसलेस असेस्मेण्ट प्रक्रिया शुरू होती है। ऑनलाइन ही कर निर्धारण अधिकारी तय होता है। कर निर्धारण के लिए का़ग़जात की ़जरूरत होने पर ही करदाता को ऑनलाइन स्क्रूटिनी नोटिस भेजा जाता है और करदाता ऑनलाइन ही जवाब देते हैं। इसके बाद असेस्मेण्ट फिर रिव्यू बनाया जाता है और इसकी समीक्षा की जाती है। एक शहर में रिव्यू का ड्राफ्ट होता है तो यह दूसरे शहर में बनाया जाता है। दूसरे शहर में समीक्षा और तीसरे शहर में इसे फाइनल किया जाता है।

ऑनलाइन होती है फेसलेस अपील

ऑनलाइन कर निर्धारण के बाद करदाता ऑनलाइन अपील करते हैं। अपील की सुनवाई का निर्धारण भी फेसलेस होता है। अपील भी रेण्डम तरीके से आवण्टित की जाती है और अपील सुनने वाले अधिकारी की पहचान उजागर नहीं होती। अपील में कार्यालय जाने या अधिकारी के सामने उपस्थित होने की ़जरूरत नही है। अपील के बाद रिव्यू भी ऑनलाइन होता है।

ऑनलाइन व्यवस्था ने दिक्कतें भी बढ़ाई

ऑनलाइन व्यवस्था ने दिक्कतें भी बढ़ाई हैं। सबसे अधिक दिक्कत ऑनलाइन अपील में आती है। अपील करने पर करदाता को अपना जवाब ऑनलाइन देना पड़ता है। इसके लिए करदाता को 5 एमबी का ही जवाब देना होता है। कई बार करदाता अपने पक्ष में प्रपत्र देते हैं, ऑफलाइन जवाब देने पर वे सभी डॉक्युमेण्ट कर निर्धारण अधिकारी को दिखा कर अपना पक्ष रख सकते हैं। इससे कई बार वह पूरा पक्ष नहीं रख पाते। इससे कर निर्धारण उनके ख़्िाला़फ ही जाता है। साथ ही आम करदाता, विशेषकर व्यापारियों की ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद सीए व अधिवक्ताओं पर निर्भरता बढ़ी है। सीए भी इस प्रक्रिया से कई बार व्यापारियों को राहत उपलब्ध नहीं करा पाते हैं। उनके पास वीडियो कॉन्फरेन्स का विकल्प है, लेकिन वह बहुत बाद में उपलब्ध होता है। सर्वर की समस्या से दिक्कतें रहती हैं। कई व्यापारी इस ऑनलाइन प्रक्रिया में ही उलझ जा रहे हैं। झाँसी में कई व्यापारी व कम्पनि इस समस्या से जूझ रहे हैं।

यह कहते हैं सीए

'आयकर विभाग की नयी योजना से अब कर निर्धारण अधिकारी की पहचान नहीं होती है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन कर निर्धारण व अपील में जवाब देने में दिक्कत होती है। आयकर में का़ग़जात एक-दूसरे से लिंक होते हैं और सामने बैठकर अधिकारी को समझाया जा सकता है और उसके सवाल के जवाब में सम्बन्धित प्रपत्र भी दे सकते हैं। पर, ऑनलाइन व्यवस्था में आयकर अधिकारी दिए गए का़ग़जों के आधार पर अपना मन बना लेता है, जिसे बदलना मुश्किल ही होता है। जवाब देने के अवसर भी कम हुए हैं।'

- निमेष खन्ना

'आयकर की फेसलेस स्कीम से पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन कई व्यवहारिक दिक्कतें हैं। नया आयकर पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा। अभी व्यापारी टेक्नॉलजि को लेकर इतने जागरूक नहीं हैं।'

- शिवा लिखधारी

फाइल-रघुवीर शर्मा

समय-6.30

1 अगस्त 21

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