परिवार के अरमान भी हुए सुपुर्द-ए-ख़्ाक

परिवार के अरमान भी हुए सुपुर्द-ए-ख़्ाक
Publish Date:Fri, 25 Sep 2020 12:59 AM (IST) Author: Jagran

फोटो : 24 एसएचवाई 8

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कैप्शन

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झाँसी : नगर निगम बिल्डिंग में लिफ्ट के खुले हिस्से को बन्द कर दिया गया व आशिक के घर में बिलखते परिजन।

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0 युवक का शव घर पहुँचते ही परिवार में मचा कोहराम

0 परिवार में सबका लाड़ला था, माँ रो-रोकर हुई बेसुध

झाँसी : जीवनशाह कब्रिस्तान में आशिक उर्फ गुड्डन के शव के साथ ही उसके परिवार के अरमान भी सुपुर्द-ए-ख़्ाक हो गए।

जीवनशाह कब्रिस्तान के पास रहने वाले आशिक का शव जैसे ही घर पहुँचा, कोहराम मच गया। माँ रो-रोकर बेसुध हो गई तो पिता दिल पर पत्थर रखकर परिवार को सान्त्वना देते रहे। भाई-बहन भी इस हादसे से उबर नहीं पा रहे हैं। आस-पड़ोस में रहने वाले भी मुहल्ले से एक लाड़ले के जाने का ़गम बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। आशिक ने अपने सुनहरे भविष्य को लेकर अपने दिल में कई अरमान पाल रखे थे, लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। जीवनशाह में रहने वाले पुलिस के रिटायर्ड उप निरीक्षक सामिद हुसैन के 4 पुत्रों में आशिक तीसरे नम्बर का था। उसके यूँ अचानक चले जाने का ़गम किसी से बर्दाश्त नहीं हो रहा। आशिक टैक्सि ड्राइवर था और इस पेशे से वह जो भी कमाता था, उससे परिवार की आजीविका चलाने में सहयोग भी करता था। चारों भाई माँ-बाप के साथ हँसी-खुशी जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन इस हँसते-खेलते परिवार को आखिर किसी की ऩजर लग गई। आशिक के भाई साजिद ने बताया कि वह घर में सबका लाड़ला था। हर किसी की बात मानना उसकी फितरत में शामिल था। उन्होंने बताया कि हादसे वाली रात जब उनकी आशिक से आखिरी बात फोन पर बात हुई तो उसने कहा कि वह दोस्तों के साथ पार्टी में हैं और जल्द ही घर आ जाएगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आज की रात उसकी अपने छोटे भाई से आखिरी बार बात हो रही थी।

24 अक्टूबर को होनी थी शादी

लिफ्ट में गिरकर अपनी जान गँवाने वाले आशिक की 24 अक्टूबर को शादी होने वाली थी। परिवार के सदस्य उसकी शादी को लेकर तैयारियों में जुटे हुए थे, लेकिन बुधवार की रात आयी एक सूचना ने एक नहीं, दोनों परिवारों को गमगीन कर दिया।

ननि प्रशासन ने बन्द कराया लिफ्ट का खुला हिस्सा

नगर निगम बिल्डिंग की लिफ्ट में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने गुरुवार को बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में लिफ्ट के खुले हिस्से को पूरी तरह से बन्द करा दिया और बैरिकेडिंग लगाकर वहाँ लोगों के आवागमन पर रोक लगा दी। दरअसल घटना वाली रात आशिक दौड़कर बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में जा पहुँचा और लिफ्ट के खुले हिस्से में जाकर छिपने का प्रयास करने लगा, उसे पता नहीं था कि उसकी यह नासमझी उसके जीवन पर भारी पड़ जाएगी। इस हादसे के लिए कहीं न कहीं नगर निगम प्रशासन की लापरवाही को भी ़िजम्मेदार ठहराया जा रहा है। आखिर लिफ्ट का ऊपरी हिस्से को खुला क्यों छोड़ा गया, वो भी तब, जब नगर निगम कार्यालय में दिनभर सैकड़ों लोगों का आना-जाना लगा रहता है।

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