प्रधान व सचिव के बीच दुश्मनी बढ़ा रहे अपात्र

प्रधान व सचिव के बीच दुश्मनी बढ़ा रहे 'अपात्र'
Publish Date:Fri, 25 Sep 2020 12:59 AM (IST) Author: Jagran

लोगो : जागरण एक्सक्लूसिव

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0 पंचायत चुनाव से पहले ह़जारों ग्रामीण आवास की लिस्ट से बाहर

0 प्रधान बना रहे दबाव, नहीं सुन रहे सचिव

झाँसी : शासन ने प्रधानमन्त्री ग्रामीण आवास योजना के सत्यापन में सचिवों की ़िजम्मेदारी क्या तय की, पंचायत चुनाव के लिए गाँव में बिछी सियासी बिसात का गणित ही गड़बड़ा गया। अब तक सत्यापन में 15 ह़जार से अधिक अपात्र बाहर हो गए हैं, जिनके नाम शामिल कराने के लिए प्रधानजी दबाव बना रहे हैं। पर, सचिव अब सुनने को तैयार नहीं हैं, जिससे दोनों के बीच तकरार बढ़ने लगी है।

शासन ने वर्ष 2011 में आर्थिक, सामाजिक व जातिगत जनगणना (सेक-2011) कराई थी, जिसमें जनपद के लगभग 40 ह़जार परिवार ़गरीबी रेखा के नीचे पाए गए थे। इसके बाद से सरकार की अधिकांश योजना का मुँह इन परिवारों की तरफ मोड़ दिया गया। सत्ता में मोदी सरकार आई तो सभी ़गरीबों को आवास देने की घोषणा की गई। वर्ष 2016 में मोदी सरकार ने प्रधानमन्त्री ग्रामीण आवास योजना की शुरूआत की, जिसके लिए सेक की सूची में शामिल लगभग 40 ह़जार गरीब परिवारों को पहले सन्तृप्त करने का निर्णय लिया गया। आवास देने से पहले जब सत्यापन कराया गया तो अपात्रों की संख्या बढ़ती गई और वर्ष 2019-20 तक 40 ह़जार में से महज 13 ह़जार परिवार ही पात्र पाए गए, जिन्हें आवास दे दिए गए। शासन को जानकारी मिली कि सूची में बड़ी संख्या में अपात्रों को शामिल किया गया था, जबकि वास्तविक ़गरीबों तक अब भी योजना का लाभ नहीं पहुँचा। इसके बाद सरकार ने इस साल दोबारा सर्वे कराने के निर्देश दिए, लेकिन अब ़िजम्मेदारी तय कर दी। दोबारा सर्वे में फिर 40 ह़जार पात्रों की नई सूची सामने आ गई। इस पर शक गहराने पर शासन ने क्रॉस सत्यापन कराने का निर्णय लिया। पर, अब हर स्तर पर ़िजम्मेदारी तय कर दी गई। ग्राम पंचायत स्तर पर सचिवों को पासवर्ड दिए गए, ताकि वह अपात्रों को सूची से अलग कर दे। सेक्टर अधिकारी नियुक्त किए गए, जिन्हें रेण्डमली जाँच करने को कहा गया। इसके बाद बीडीओ जाँच करेंगे, जबकि ़िजला स्तरीय अधिकारियों को भी सत्यापन में लगाया गया। तय हुआ कि फाइनल सूची में ग्राम पंचायत सचिव, सेक्टर अधिकारी, बीडीओ के हस्ताक्षर होंगे, ताकि अब अगर कोई ़फ़र्जी नाम पाया जाता है तो सीधे कार्यवाही की जाएगी। शासन की नई व्यवस्था ने प्रधानों के चुनावी खेल को बिगाड़ दिया। दरअसल, शासन की सख़्ती को देखते हुए ग्राम पंचायत सचिवों ने बारीकी से जाँच कर अपात्रों को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है। सूची से बाहर होने वाले अपात्र ग्राम प्रधानों की शरण में हैं, लेकिन नौकरी पर ख़्ातरा मँडराता देख सचिव अब प्रधानजी की भी नहीं सुन रहे हैं। इससे प्रधानों व सचिवों के बीच विवाद बढ़ने लगा है।

गाँवों में चलता है अपात्र को पात्र बनाने का गोरखधन्धा

गाँवों में अपात्रों को पात्र बनाने का गोरखधन्धा किस स्तर पर चल रहा है, इसका खुलासा भी सत्यापन रिपोर्ट में हो गया है। वर्ष 2011 की जनगणना में लगभग 40 ह़जार परिवारों को ़गरीब की श्रेणी में रखा गया, जिसके बाद अधिकांश योजनाओं का लाभ उन्हें दिया गया, लेकिन प्रधानमन्त्री ग्रामीण आवास योजना के लिए समय-समय पर हुए सत्यापन में 27 ह़जार परिवार अपात्र पाए गए। इस साल सर्वे किया गया तो फिर 40,120 ़गरीब परिवारों की सूची सामने आ गई। शक होने पर जब शासन ने त्रिस्तरीय क्रॉस जाँच कराई तो अब तक 15,603 परिवार अपात्र घोषित किए गए। सर्वे की आखिरी तारीख 25 सितम्बर है, जिसके बाद अपात्रों की सही संख्या सामने आएगी।

कुछ गाँवों में तो सूची के सभी नाम गायब

शासन की सख़्ती का हैरान कर देने वाला कमाल कुछ ग्राम पंचायतों में ऩजर आया है। मऊरानीपुर के ग्राम खकौरा में 390 परिवार के नाम आवास की नई सूची में शामिल थे। सचिव को पता था कि अब ़फ़र्जीबाड़ा पकड़ा गया तो नौकरी दाँव पर लग जाएगी, इसलिए सूची के सभी नाम अपात्र घोषित कर दिए गए। खजराहा खुर्द में 186 में से 104 अपात्र किए गए, जबकि सिमरावारी में 100 में से 67, बंगराधवा में 125 में से 95, चिरगाँव देहात में 261 में से 164, बख्तर में 108 में से 104, बड़ागाँव में 190 में से 114, बेरवई 148 में से 124 परिवार अपात्र घोषित किए गए।

बीच में बॉक्स

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विकास खण्ड स्तर पर अपात्र

ब्लॉक : कुल पंजीकृत : अपात्र

बबीना : 2,643 : 990

बड़ागाँव : 1,959 : 483

बामौर : 3,676 : 1,317

बंगरा : 2,900 : 972

चिरगाँव : 5,963 : 2,351

गुरसराय : 8,480 : 2,364

मऊरानीपुर : 8,376 : 5,308

मोंठ : 6,123 : 1,818

कुल : 40,120 : 15,603

फाइल : राजेश शर्मा

24 सितम्बर 2020

समय : 5.35 बजे

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