झाँसी की जनता ने उठाई थी 2 लाख कारसेवकों की जिम्मेदारी

झाँसी की जनता ने उठाई थी 2 लाख कारसेवकों की जिम्मेदारी

0 विश्व हिन्दू परिषद व संघ कार्यकर्ता इकट्ठा करते थे राशन 0 घर-घर से भेजा गया भोजन, जगह-जगह लगाए ग

Publish Date:Mon, 03 Aug 2020 08:35 PM (IST) Author: Jagran

0 विश्व हिन्दू परिषद व संघ कार्यकर्ता इकट्ठा करते थे राशन

0 घर-घर से भेजा गया भोजन, जगह-जगह लगाए गए थे लंगर

राजेश शर्मा (झाँसी) : अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण के लिए निकले लगभग 2 लाख कारसेवकों को झाँसी में रोककर अस्थाई जेलों में बन्द तो कर दिया गया पर सबसे बड़ी समस्या भोजन प्रबन्ध की आई, लेकिन झाँसी की जनता ने अपने कन्धों पर यह ़िजम्मेदारी उठा ली। लगभग 10-15 दिन तक घर-घर से खाना बनाकर भेजा जाता था तो जगह-जगह लंगर भी लगाए गए थे।

विश्व हिन्दू परिषद ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या चलो का आह्वान किया, जिसके लिए कार्यकर्ता एक माह पहले से ही निकल पड़े। दक्षिण का प्रवेश द्वार होने के कारण अधिकांश कार्यकर्ता झाँसी से होकर निकले। 20 अक्टूबर के बाद से कार्यकर्ताओं को रोका जाने लगा। प्रतिदिन ट्रेन से कार्यकर्ताओं को उतारकर अस्थाई जेलों में बन्द किया जाने लगा। सैकड़ों कारसेवक रो़ज जेल में पहुँचने लगे, जिसके बाद इनके लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया। प्रशासन पहले ही हाथ खड़े कर चुका था। इसके बाद झाँसी की जनता ने अलग-अलग जेलों में बन्द 2 लाख कारसेवकों की ़िजम्मेदारी उठा ली। सेवा में पूरा झाँसी जुट गया। महानगर के अधिकांश घरों में कारसेवकों के लिए सुबह-शाम पूड़ी-सब़्जी के पैकेट तैयार होने लगे। विश्व हिन्दू परिषद व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ठेले पर भोजन एकत्र करने के बाद कारसेवकों तक पहुँचाते। कई लोगों ने लंगर शुरू कर दिए, जहाँ कारसेवकों को भोजन कराने की होड़ मची रहती थी। भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष प्रदीप सरावगी ने बताया कि लंगर लगाने वाले कारसेवकों को अपनी ओर खींचते थे। तरह-तरह के पकवान बनाते थे, ताकि कारसेवक उनके लंगर से भोजन करें।

भोजन एकत्र करती थीं सास-बहू

शहर निवासी सावित्री श्रृंगीऋषि ने बताया कि 1990 में वह दुर्गा वाहिनी की कार्यकर्ता थीं। उन्हें पचकुइयाँ व झारखड़िया मोहल्ले से खाना एकत्र करने की ़िजम्मेदारी सौंपी गई थी। वह अपनी सास कुँअर श्रृंगीऋषि के साथ हर घर से पूड़ी-सब्जी के 5-5 पैकेट एकत्र करती थीं, जिसके बाद यह भोजन लक्ष्मी व्यायाम मन्दिर इण्टर कॉलिज में बन्द कारसेवकों तक पहुँचाया जाता था।

100 रामभक्तों को प्रतिदिन भोजन कराया

सीपरी बा़जार निवासी केदार नाथ तिवारी ने बताया कि झाँसी में कारसेवक गिरफ्तार किए जा रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश के पूर्व सरपंच नाथूराम यादव, कल्लू महन्त व मुन्ना पण्डा के साथ लगभग 100 रामभक्त झाँसी आए। आर्यकन्या कॉलिज में इन्हें रखा गया। प्रतिदिन इनके लिए भोजन की व्यवस्था कराई गई।

कारसेवकों को भोजन कराने पर मिली जेल

भाजपा के पूर्व ़िजलाध्यक्ष एवं बुन्देलखण्ड विकास निगम के सदस्य डॉ. जगदीश सिंह चौहान ने बताया कि 700 कार्यकर्ताओं का जत्था साबरमती एक्सप्रेस से अयोध्या जा रहा था, जिन्हें झाँसी में उतार लिया गया। जत्थे में 150 महिलाएँ भी शामिल थीं। बुन्देलखण्ड महाविद्यालय में इन्हें ठहराया गया, लेकिन पानी, बिजली ठप कर दी गई। कार्यकर्ताओं को भोजन देने के लिए वह गए तो रोक दिया गया। इसकी जानकारी लगने पर पूर्व मन्त्री रवीन्द्र शुक्ला के नेतृत्व में बीकेडी पर धरना देकर कार्यकर्ताओं की रिहाई की माँग को लेकर नारेबाजी होने लगी। पुलिस ने रवीन्द्र शुक्ल के साथ उन्हें व अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर महोबा जेल भेज दिया। यहाँ लगभग डेढ़ माह तक बन्द रहे।

रेलवे ने भी की मदद

तत्कालीन विभाग संगठन मन्त्री भगवत पोरवाल ने बताया कि दक्षिण की ओर से आने वाले कारसेवकों को झाँसी में भोजन कराने की ़िजम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए रेलवे स्टेशन पर ही लंगर शुरू किया गया। झाँसी की जनता यहाँ आटा, दाल, सब़्जी आदि दान करती थी। 2 से 3 कुन्तल आटे की पूड़ी रो़ज बनती थीं, जिसमें रेलवे कर्मचारी भी मदद करते थे। रेलवे में आटा गूँथने की मशीन लगी थी, जिससे आटा तैयार कर दिया जाता था।

बीकेडी से निकले, रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार हुए

पत्रकार मुकेश त्रिपाठी ने बताया कि बीकेडी में बन्द कारसेवकों को जब वह खाना वितरण कर रहे थे, तभी तत्कालीन एएसपी से झड़प होने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। यहाँ से किसी तरह निकलकर वो लोग रेलवे स्टेशन भागे, जहाँ अन्य कारसेवकों के साथ गिरफ्तार कर उरई के बंगरा में बनाई गई अस्थाई जेल भेज दिया।

गुजरात के कारसेवक बनाते थे खाना

एड. उदय सोनी ने बताया कि राम मन्दिर आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण मुरली मनोहर मन्दिर के पास से उनके साथ 13 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और समथर की जीआइसी में बनी अस्थाई जेल भेज दिया गया। यहाँ गुजरात व अन्य जगह से आए लगभग 250 से अधिक कारसेवक पहले से बन्द थे। राजा रंजीत सिंह जूदेव की बहन भोजन लेकर आई, लेकिन कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से व्यवस्था करने का दबाव बनाया। प्रशासन ने कच्चा राशन दे दिया, जिसके बाद गुजरात के कारसेवक सभी के लिए भोजन बनाने लगे।

फाइल : राजेश शर्मा

3 अगस्त 2020

समय : 5 बजे

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