थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है..

फ्लैग : सरकार से उम्मीद

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झाँसी : केन्द्र में मोदी सरकार बनने के बाद के शुरूआती साढ़े तीन साल तक सूबे में सपा की सरकार रही। दोनों दलों के बीच राजनैतिक टकराव की वजह से कई योजनाओं के क्रियान्वयन में हीलाहवाली बरती गई। 32 माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचण्ड बहुमत से प्रदेश की सत्ता पर भी ़कब़्जा कर लिया। तब माना गया कि डबल इंजन (केन्द्र व प्रदेश) की सरकार मिलकर विकास को गति देगी। यह धारणा कुछ हद तक सही भी साबित हुई। झाँसी की ही बात करें, तो इन ढाई सालों में सरकार ने कई बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी। डिफेंस कॉरिडोर के लिए ़जमीन मिल गई। उम्मीद है कि यह योजना बुन्देलखण्ड के लिए रो़जगार के बड़े अवसर खोलेगी। इसके अलावा महानगर पेयजल योजना, एक्सप्रेस-वे, लक्ष्मी तालाब समेत कई योजनाओं के परिणाम आना बाकी है। पर, कई योजनाएं ऐसी हैं, जो ़जमीन पर नहीं उतर पाई। कुछ लेटलतीफी का शिकार हो गई, तो कुछ अनदेखी का। अगर सार्थक प्रयास होते, तो इन योजनाओं को भी मुकाम तक पहुँचाया जा सकता था।

टूटने लगी हवाई अड्डे की उम्मीद

झाँसी में हवाई अड्डे की स्थापना को लेकर लम्बे समय से प्रयास चल रहे हैं, लेकिन अब तक यह प्रयास हवा से धरातल पर नहीं आ पाए हैं। 15 फरवरी 2018 को उम्मीद की किरण दिखाई दी। इस तारीख को झाँसी व ललितपुर की तमाम समस्याओं का निराकरण कराने के लिए तत्कालीन केन्द्रीय मन्त्री उमा भारती के नेतृत्व में झाँसी व ललितपुर के पाँचों विधायकों ने मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। विधायकों ने झाँसी को हवाई सेवा उपलब्ध कराने का मामला सीएम के समक्ष रखा। तब मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने बताया था कि प्रदेश सरकार ने रीजनल कनेक्टिविटि योजना में झाँसी को शामिल किया गया है। इसके तहत बड़े शहरों और राजधानी के बीच हवाई सुविधा प्रदान की जानी है। इसका ब्लू प्रिण्ट तैयार कर लिया गया है। पीपीपी मॉडल पर फिलहाल झाँसी से लखनऊ के बीच उड़ान सेवा शुरू करने की तैयारी है, जिसका काम अगले 3 माह में पूरा हो जाएगा और यहाँ से 25 से 30 सीटर विमान उड़ान भरने लगेगा। झाँसी से इलाहाबाद के बीच विमान सेवा भी प्रस्तावित है, जिस पर अनुबन्ध की प्रक्रिया चल रही है। उमा भारती ने सफा-चमरौआ में ़जमीन के उपलब्ध होने की जानकारी दी थी। पर, 3 माह में उड़ान सेवा प्रदान करने का वादा 22 माह बाद भी अधूरा है।

सता रहा सीपरी ओवर ब्रिज

सीपरी बा़जार की यातायात समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए वर्ष 6 साल से बन रहा ओवर ब्रिज लोगों की मुसीबत बन गया है। इस ब्रिज ने सीपरी बा़जार का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है, तो सर्विस रोड के गड्ढों ने मुसाफिरों की मुसीबत बढ़ा दी है। काम अब रेलवे के हिस्से का बाकी है, जिसे पूरा करने की बार-बार तारीख ही सामने आ रही है।

न बस स्टैण्ड मिला, न ट्रांस्पोर्ट नगर

रोडवे़ज का मुख्यालय होने के बावजूद यहाँ स्थायी बस स्टैण्ड नहीं है। नगर निगम के बस स्टैण्ड से बसों का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2015 में रोडवे़ज के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबन्धक प्रभाकर मिश्रा ने पहल की और कोछाभाँवर में ़जमीन चिह्नित कर ली गई। नगर निगम ने ़जमीन हस्तान्तरण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया, जबकि रोडवे़ज ने अत्याधुनिक बस स्टैण्ड के लिए 5 करोड़ रुपए की धनराशि जारी कर दी। ़जमीन न मिलने के कारण यह धनराशि खाते से ही वापस हो गई। इसके बाद से ही बस स्टैण्ड की फाइल अलमारी में बन्द हो गई है। इसी तरह से ट्रांस्पोर्ट नगर के प्रयास भी अधर में लटके हुए हैं।

निर्मल नहीं हो पाई पहूज नदी

तत्कालीन केन्द्रीय मन्त्री उमा भारती ने मन्त्रालय सँभालने के बाद शुरूआती दिनों में महानगर के किनारे से बहने वाली पहूज नदी को गोद लेकर इसे निर्मल करने का वादा किया। सपा सरकार में उमा भारती का सपना पूरा नहीं हो सका। प्रदेश में योगी की सरकार आने के बाद माना गया था कि नदी के दिन बदल जाएंगे, ऐसा नहीं हो पाया। नगर निगम ने इस नदी की स़फाई को स्मार्ट सिटि योजना में शामिल कर लिया है, लेकिन अब तक कोई प्रोजेक्ट सामने नहीं आया है।

क्रान्ति पथ ने बदला स्वरूप

बुन्देलखण्ड को पर्यटन हब बनाने और रानी की शौर्य गाथा से लोगों को परिचित कराने के लिए तत्कालीन केन्द्रीय मन्त्री उमा भारती ने क्रान्ति पथ की परिकल्पना की थी। शासन ने उमा भारती के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर जबरदस्त तरीके से कैंची चलाई है। 700 करोड़ रुपए के प्रारम्भिक एस्टिमेट के साथ बनाई गई परियोजना 18.98 करोड़ पर ठहर गई है। परियोजना का दायरा भी झाँसी व ललितपुर के बीच ही सिमट गया है।

पानी में बहा गढ़मऊ झील का विकास

महानगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गढ़मऊ झील का पर्यटन विकास करने के लिए 5.86 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मं़जूरी मिली। तत्कालीन सपा सरकार ने प्रथम किश्त के रूप में 1.17 करोड़ रुपए उपलब्ध करा दिए गए। इससे 4 घाट, सीढ़ी व नहरों की लाइनिंग का कार्य कराया गया। इसके बाद सरकार ने पैसा नहीं दिया, जिससे यहाँ कराए गए विकास कार्य भी बह गए।

इन योजनाओं पर टिका उम्मीदों का आसमान

डिफेंस कॉरिडोर : मोदी सरकार ने देश को 2 डिफेंस कॉरिडोर दिए। इसमें से एक की सौगात बुन्देलखण्ड की झोली में डाली गई। इसके लिए ़जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ते़ज हो गई है। सरकार ने 430.31 करोड़ के बजट में सर्वाधिक 328 करोड़ रुपए झाँसी जनपद के लिए स्वीकृत किए, जबकि चित्रकूट को 50 करोड़ व अलीगढ़ को 52.31 करोड़ रुपए की धनराशि दी गई है। यह परियोजना जब पूरी तरह से आकार लेगी, तो युवाओं के लिए रो़जगार के ढेरों अवसर खुलेंगे।

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे : मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले झाँसी दौरे में बुन्देलखण्ड को दिल्ली से जोड़ने के लिए 6 लेन एक्सप्रेस-वे देने की घोषणा की थी। सरकार ने ते़जी दिखाते हुए बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे का हवाई सर्वे कराया। चित्रकूट के भरत कूप से औरया के पास आगरा हाइवे से जुड़ने वाले इस एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास प्रधानमन्त्री द्वारा किया जाएगा, जिसकी तैयारी शुरू हो गई है।

लक्ष्मी तालाब : तत्कालीन केन्द्रीय मन्त्री उमा भारती के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल लक्ष्मी तालाब के विकास की योजना सपा सरकार में लटकी रही, लेकिन अब इसमें ते़जी आ गई है। लगभग 55 करोड़ की इस परियोजना पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट) का निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि तालाब की स़फाई की गई है। जल्द यह ऐतिहासिक तालाब पर्यटकों को आकर्षित करेगा।

स्मार्ट सिटि : मोदी सरकार ने देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटि में शामिल किया है, जिसमें झाँसी का नाम भी है। इसके तहत कई बड़ी योजनाएँ धरातल पर उतरनी हैं। इनकी योजना बनकर तैयार हो गई हैं। फिलहाल इसके तहत शहर में कई पिंक टॉयलेट का निर्माण कराया जा रहा है, तो रानी लक्ष्मीबाई पार्क और काँशीराम पार्क में ओपन जिम लगाने के साथ ही रानी लक्ष्मीबाई पार्क में 105 फीट ऊँचा तिरंगा लगाया गया है। इस योजना के तहत शहर के बीचों-बीच स्थित पानी वाली धर्मशाला का स्वरूप बदला जाएगा, तो नगर निगम के मुख्य गेट के बगल में पार्किंग स्थल के साथ ही कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा।

कोच फैक्ट्रि : मोदी सरकार ने झाँसी को कोच फैक्ट्रि की सौगात देने का निर्णय भी लिया है। प्रेमनगर क्षेत्र में रेलवे की ़जमीन पर प्रस्तावित कोच फैक्ट्रि की घोषणा हो चुकी है, जिसका काम जल्द प्रारम्भ होगा।

पेयजल महायोजना : महानगर की प्यास बुझाने के लिए जल निगम ने लगभग 800 करोड़ की पेयजल महायोजना को आकार दिया है। फेस-1 में समस्याग्रस्त क्षेत्रों में पाइप लाइन बिछाने के साथ ही टंकियों का निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि दूसरे फे़ज के कार्यो को भी डि़जाइन कर लिया गया है। हालाँकि कार्य अभी गति नहीं पकड़ पाया है, लेकिन दावा है कि अगले 3 साल में महानगर को जल संकट से मुक्त कर दिया जाएगा।

बीच में बॉक्स

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चुनावी वादा

घोषणा भर ही रह गई मेट्रो

चुनाव से पहले सभी राजनैतिक दल अपना वि़जन डॉक्यूमेण्ट व घोषणा पत्र जारी करते हैं, जिसमें सरकार बनने के बाद के संकल्प शामिल होते हैं। भाजपा ने भी घोषणा पत्र में कई वादे किए थे, जिसमें झाँसी को मेट्रो की सौगात देने का वादा भी था। ढाई साल बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है।

फाइल : राजेश शर्मा

6 दिसम्बर 2019

समय : 5.15 बजे

1952 से 2020 तक इन राज्यों के विधानसभा चुनाव की हर जानकारी के लिए क्लिक करें।

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